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Bareilly News: तस्करी के लिए ऑनलाइन खरीदी कार, पांच आरोपी गिरफ्तार
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बरेली। बिथरी पुलिस ने गोकशी के मामले में जो गैंग पकड़ा, वह वारदात के लिए ऑनलाइन कार खरीदकर इस्तेमाल कर रहा था। पांच गो तस्करों को जेल भेज दिया। आरोपियों पर गैंगस्टर एक्ट समेत 36 आपराधिक मुकदमे दर्ज हैं।
एसपी सिटी राहुल भाटी के मुताबिक पुलिस रविवार सुबह गश्त कर रही थी। सरदार बल्लभ भाई पटेल स्कूल के पास कार से पांच लोग जाते दिखे। पुलिस को देखकर वे भागने लगे तो दौड़ाकर पकड़ लिया गया। आरोपियों की पहचान मोहल्ला ग्यासपुर बीसलपुर पीलीभीत निवासी गुलाम फरीद, एजाजनगर गौटिया बरेली निवासी शाकिर व फरहान, गंझेडी थाना देवरिया कलां पीलीभीत निवासी इकबाल व इमरान खां के रूप में हुई। पुलिस की पकड़ में आने से पहले इनके साथी बीसलपुर पीलीभीत निवासी कामिल उर्फ नकटा कुरैशी और रजा चौक आजमनगर निवासी हाजी महबूब मौके से भाग निकले। इन्होंने अपना अपराध स्वीकार कर लिया।
फर्जी नाम-पते पर उत्तराखंड से ऑनलाइन खरीदी थी कार
एसपी सिटी के मुताबिक गिरफ्तार आरोपियों ने बताया कि उन्होंने दस अप्रैल की रात बिथरी चैनपुर में और छह अप्रैल की रात हाफिजगंज में गोकशी की थी। इन्होंने एक ऑनलाइन मार्केटिंग कंपनी से आठ अगस्त को पुरानी कार सितारगंज के शख्स से खरीदी थी। पुलिस ने कार मालिक का रिकॉर्ड चेक किया तो 2016 में दर्ज मालिक का नाम पता मिला। उससे पूछताछ की तो पता लगा कि 12 बार गाड़ी स्टांप पर ही बिक चुकी है। इसमें भी फर्जी नंबर प्लेट लगाई गई थी। आरोपियों ने स्वीकार किया कि वे हर घटना के लिए पुरानी कार खरीद लेते थे और उसे अपने नाम नहीं कराते थे। फंसने की स्थिति में कार छोड़कर फरार हो जाते थे। इनके साथी फरहान और फरार हाजी महबूब रात में छुट्टा पशुओं की रेकी करते थे, फिर उनको जंगल में ले जाकर काटते थे। वहां अवशेष छोड़कर मांस भर ले जाते थे।
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एसपी सिटी राहुल भाटी के मुताबिक पुलिस रविवार सुबह गश्त कर रही थी। सरदार बल्लभ भाई पटेल स्कूल के पास कार से पांच लोग जाते दिखे। पुलिस को देखकर वे भागने लगे तो दौड़ाकर पकड़ लिया गया। आरोपियों की पहचान मोहल्ला ग्यासपुर बीसलपुर पीलीभीत निवासी गुलाम फरीद, एजाजनगर गौटिया बरेली निवासी शाकिर व फरहान, गंझेडी थाना देवरिया कलां पीलीभीत निवासी इकबाल व इमरान खां के रूप में हुई। पुलिस की पकड़ में आने से पहले इनके साथी बीसलपुर पीलीभीत निवासी कामिल उर्फ नकटा कुरैशी और रजा चौक आजमनगर निवासी हाजी महबूब मौके से भाग निकले। इन्होंने अपना अपराध स्वीकार कर लिया।
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फर्जी नाम-पते पर उत्तराखंड से ऑनलाइन खरीदी थी कार
एसपी सिटी के मुताबिक गिरफ्तार आरोपियों ने बताया कि उन्होंने दस अप्रैल की रात बिथरी चैनपुर में और छह अप्रैल की रात हाफिजगंज में गोकशी की थी। इन्होंने एक ऑनलाइन मार्केटिंग कंपनी से आठ अगस्त को पुरानी कार सितारगंज के शख्स से खरीदी थी। पुलिस ने कार मालिक का रिकॉर्ड चेक किया तो 2016 में दर्ज मालिक का नाम पता मिला। उससे पूछताछ की तो पता लगा कि 12 बार गाड़ी स्टांप पर ही बिक चुकी है। इसमें भी फर्जी नंबर प्लेट लगाई गई थी। आरोपियों ने स्वीकार किया कि वे हर घटना के लिए पुरानी कार खरीद लेते थे और उसे अपने नाम नहीं कराते थे। फंसने की स्थिति में कार छोड़कर फरार हो जाते थे। इनके साथी फरहान और फरार हाजी महबूब रात में छुट्टा पशुओं की रेकी करते थे, फिर उनको जंगल में ले जाकर काटते थे। वहां अवशेष छोड़कर मांस भर ले जाते थे।
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