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आवासीय भवनों में अस्पताल, सुरक्षा मानक दरकिनार
बरेली
Updated Tue, 16 Jan 2018 02:00 AM IST
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शहर में 450 से अधिक अस्पताल हैं लेकिन इनमें से गिने-चुने अस्पतालों के भवन ही बीडीए से स्वीकृत है। अधिकांश अस्पताल आवासीय भवनों के नक्शे पर संचालित किए जा रहे हैं। दो दिन पहले मेयर उमेश गौतम भी यही कह चुके हैं। इससे भी बड़ी बात यह कि आग लगने या किसी अन्य आपात स्थिति से निपटने के भी इनमें पर्याप्त इंतजाम नहीं हैं। फिर भी अधिकारियों की शह पर बिना किसी रोकटोक के अस्पताल चल रहे हैं। फायर ब्रिगेड से भी उन्हें एनओसी मिल जाती है और बीडीए से भी आवासीय भवन में संचालन पर कोई कार्रवाई नहीं होती। चिकित्सा विभाग भी कभी इनमें झांकने की जहमत नहीं उठाता।
बेसमेंट में मरीज
सुरक्षा मानकों के अनुरूप अस्पताल बेसमेंट में संचालित नहीं होना चाहिए ताकि आपात स्थिति में मरीजों को बाहर निकालने में कोई समस्या न हो। मगर शहर के अस्पतालों के हालात तो बहुत ही खराब हैं। कई अस्पतालों में तो बेसमेंट में ही दो तल बनाकर मरीजों को भर्ती किया जाता है। कुछ अस्पतालों में गंभीर मरीजों के लिए एमआरआई जैसी जांच करने का इंतजाम ही बेसमेंट में किया गया हैै।
एक ही निकास द्वार
अस्पताल समेत किसी भी बड़े भवन के लिए नियम यह है कि वहां कम से कम दो निकास द्वार हों ताकि आपात स्थिति में एक द्वार से लोग बाहर निकलते रहें और दूसरे से राहत कार्य जारी रहे। मगर इस नियम का भी यहां कई अस्पतालों में पालन नहीं हो रहा है। कुछ अस्पतालों में दो रास्ते ही नही हैं।
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अप्रशिक्षित कर्मचारी
किसी भी संस्थान के कर्मचारियों के लिए आग और अन्य आपदा की स्थिति से निपटने के लिए सरकार द्वारा प्रशिक्षण अनिवार्य किए गए हैं। इसके बावजूद अस्पताल या अन्य संस्थान इसको लेकर गंभीर नहीं हैं। सोमवार तड़के साईं अस्पताल में हुए हादसे में भी ऐसा ही हुआ, जब आग लगने के बाद कर्मचारी बचाव कार्य करने के बजाय अपनी ही जान बचाने के लिए भागते नजर आए।
अस्पतालों के लिए अग्नि सुरक्षा के मानक
- न्यूनतम डेढ़-डेढ़ मीटर चौड़े दो दरवाजे होने चाहिए।
- ऊपरी मंजिल पर ओवरहेड टैंक हो, जिसमें हमेशा पानी भरा रहे।
- प्रत्येक मंजिल पर होज रील का इंतजाम हो।
- जगह-जगह अग्निशमन यंत्र लगे हों।
- आपातकालीन संकेतक और फायर अलार्म हो।
- बेसमेंट में अस्पताल का संचालन न हो।
- अग्निशमन विभाग की एनओसी ली हो।
- अग्निशमन विभाग, पुलिस और आपातकालीन नंबरों का डिस्प्ले हो।
वर्जन
साईं अस्पताल में आग लगने के मामले में तकनीकी पहलुओं की जांच की जाएगी। इसके बाद उसी आधार पर कार्रवाई होगी।
- मिथलेश कुमार, उपनिदेशक विद्युत सुरक्षा
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बेसमेंट में मरीज
सुरक्षा मानकों के अनुरूप अस्पताल बेसमेंट में संचालित नहीं होना चाहिए ताकि आपात स्थिति में मरीजों को बाहर निकालने में कोई समस्या न हो। मगर शहर के अस्पतालों के हालात तो बहुत ही खराब हैं। कई अस्पतालों में तो बेसमेंट में ही दो तल बनाकर मरीजों को भर्ती किया जाता है। कुछ अस्पतालों में गंभीर मरीजों के लिए एमआरआई जैसी जांच करने का इंतजाम ही बेसमेंट में किया गया हैै।
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एक ही निकास द्वार
अस्पताल समेत किसी भी बड़े भवन के लिए नियम यह है कि वहां कम से कम दो निकास द्वार हों ताकि आपात स्थिति में एक द्वार से लोग बाहर निकलते रहें और दूसरे से राहत कार्य जारी रहे। मगर इस नियम का भी यहां कई अस्पतालों में पालन नहीं हो रहा है। कुछ अस्पतालों में दो रास्ते ही नही हैं।
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अप्रशिक्षित कर्मचारी
किसी भी संस्थान के कर्मचारियों के लिए आग और अन्य आपदा की स्थिति से निपटने के लिए सरकार द्वारा प्रशिक्षण अनिवार्य किए गए हैं। इसके बावजूद अस्पताल या अन्य संस्थान इसको लेकर गंभीर नहीं हैं। सोमवार तड़के साईं अस्पताल में हुए हादसे में भी ऐसा ही हुआ, जब आग लगने के बाद कर्मचारी बचाव कार्य करने के बजाय अपनी ही जान बचाने के लिए भागते नजर आए।
अस्पतालों के लिए अग्नि सुरक्षा के मानक
- न्यूनतम डेढ़-डेढ़ मीटर चौड़े दो दरवाजे होने चाहिए।
- ऊपरी मंजिल पर ओवरहेड टैंक हो, जिसमें हमेशा पानी भरा रहे।
- प्रत्येक मंजिल पर होज रील का इंतजाम हो।
- जगह-जगह अग्निशमन यंत्र लगे हों।
- आपातकालीन संकेतक और फायर अलार्म हो।
- बेसमेंट में अस्पताल का संचालन न हो।
- अग्निशमन विभाग की एनओसी ली हो।
- अग्निशमन विभाग, पुलिस और आपातकालीन नंबरों का डिस्प्ले हो।
वर्जन
साईं अस्पताल में आग लगने के मामले में तकनीकी पहलुओं की जांच की जाएगी। इसके बाद उसी आधार पर कार्रवाई होगी।
- मिथलेश कुमार, उपनिदेशक विद्युत सुरक्षा