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Bareilly News: कांपेक्टर लगवाकर मिटा सकते हैं कूड़े और डलावघरों का दाग
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बरेली। नगर निगम कांपेक्टर लगवाकर शहर को कूड़े और डलावघरों से मुक्ति दिला सकता है। इससे जहां स्थानीय नागरिकों को राहत मिलेगी, वहीं स्वच्छता की दौड़ में हमारी रैंकिंग और बेहतर होगी। सॉलिड वेस्ट मैनेजमेंट मैनुअल-2016 में शहरों को डलावघरों से मुक्त किए जाने का प्रावधान है। राजधानी लखनऊ सहित कुछ अन्य शहरों में डलावघर वाले स्थानों पर कांपेक्टर लगवाए गए हैं। वहां आने वाले कूड़े को जमीन के बजाय सीधे कांपेक्टर में गिराया जाता है। उसे कंप्रेस कर न्यूनतम जगह में एकत्रित किया जाता है। इसके बाद इसे डंपिंग ग्राउंड या प्लांट पर भेज दिया जाता है। ब्यूरो
रास्ते और भी हैं...
- श्यामगंज और कुतुबखाना डलावघर में आने वाला गीला कूड़ा करीबी ट्रांसफर स्टेशन सीआई पार्क भेजा जा सकता है। सूखा कूड़ा बरेली कॉलेज के सामने स्थित एमआरएफ सेंटर पर निस्तारित करें।
- डलावघर में जिन मोहल्लों से कूड़ा आ रहा है, वहां के लोग डोर-टू-डोर सर्विस को अपनाएं। कोई व्यक्ति डलावघर में कूड़ा फेंके तो कर्मचारी उसे रोकें। नहीं मानने पर कार्रवाई की जाए।
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- श्यामगंज समेत अन्य छोटे डलावघरों में भी रिफ्यूज कांपेक्टर से समाधान हो सकता है। कूड़ा जमीन पर नहीं दिखेगा। कांपेक्टर लगने पर कूड़ा वाहन से वाहन में चला जाएगा।
(मौजूदा समय में नगर निगम लखनऊ के पर्यावरण अभियंता और बरेली में सेवारत रहे पर्यावरण अधिशासी संजीव प्रधान से बातचीत के मुताबिक)
नगर आयुक्त और जनप्रतिनिधियों के सामने उठाएंगे मुद्दा
डलावघर का मुद्दा पहले भी उठाया था। व्यापारियों का प्रतिनिधिमंडल नगर आयुक्त व जनप्रतिनिधियों से मिलकर फिर इस मुद्दे को उठाएगा। -जफर बेग, संरक्षक, बरेली मर्चेंट एसोसिएशन
जब इंदिरानगर और चौपुला से डलावघर हटाए जा सकते हैं तो फिर श्यामगंज में क्या दिक्कत है। नगर निगम बताए या फिर इसका समाधान कराएं। -जयप्रकाश देवयानी, व्यापारी
अगर डलावघर खत्म किया जाए तो श्यामगंज में कारोबार को विस्तार मिलेगा। डलावघर हटते ही शहर की शान बढ़ेगी। बदबू से व्यापारियों को राहत मिलेगी। - संजय हजारा, व्यापारी
मैं जॉब के लिए रोज श्यामगंज आती हूं। बारिश के दिनों में जब सड़क पर डलावघर की गंंदगी बह रही होती है तो निकलना दुश्वार होता है। - संगीता, कटरा चांद खां
तलाश रहे विकल्प
श्यामगंज में बड़ा कांपेक्टर लगाने के लिए पर्याप्त जगह नहीं है। छोटे कांपेक्टर के विकल्प पर विचार कर रहे हैं। जमीन भी तलाश रहे हैं। आसपास पर्याप्त जगह नहीं मिलेगी तो कुछ दूरी पर देखेंगे। गीला कूड़ा ट्रांसफर स्टेशन और सूखा कूड़ा एमआरएफ सेंटर भेजने पर भी काम किया जा सकता है। -संजीव कुमार मौर्य, नगर आयुक्त
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रास्ते और भी हैं...
- श्यामगंज और कुतुबखाना डलावघर में आने वाला गीला कूड़ा करीबी ट्रांसफर स्टेशन सीआई पार्क भेजा जा सकता है। सूखा कूड़ा बरेली कॉलेज के सामने स्थित एमआरएफ सेंटर पर निस्तारित करें।
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- डलावघर में जिन मोहल्लों से कूड़ा आ रहा है, वहां के लोग डोर-टू-डोर सर्विस को अपनाएं। कोई व्यक्ति डलावघर में कूड़ा फेंके तो कर्मचारी उसे रोकें। नहीं मानने पर कार्रवाई की जाए।
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- श्यामगंज समेत अन्य छोटे डलावघरों में भी रिफ्यूज कांपेक्टर से समाधान हो सकता है। कूड़ा जमीन पर नहीं दिखेगा। कांपेक्टर लगने पर कूड़ा वाहन से वाहन में चला जाएगा।
(मौजूदा समय में नगर निगम लखनऊ के पर्यावरण अभियंता और बरेली में सेवारत रहे पर्यावरण अधिशासी संजीव प्रधान से बातचीत के मुताबिक)
नगर आयुक्त और जनप्रतिनिधियों के सामने उठाएंगे मुद्दा
डलावघर का मुद्दा पहले भी उठाया था। व्यापारियों का प्रतिनिधिमंडल नगर आयुक्त व जनप्रतिनिधियों से मिलकर फिर इस मुद्दे को उठाएगा। -जफर बेग, संरक्षक, बरेली मर्चेंट एसोसिएशन
जब इंदिरानगर और चौपुला से डलावघर हटाए जा सकते हैं तो फिर श्यामगंज में क्या दिक्कत है। नगर निगम बताए या फिर इसका समाधान कराएं। -जयप्रकाश देवयानी, व्यापारी
अगर डलावघर खत्म किया जाए तो श्यामगंज में कारोबार को विस्तार मिलेगा। डलावघर हटते ही शहर की शान बढ़ेगी। बदबू से व्यापारियों को राहत मिलेगी। - संजय हजारा, व्यापारी
मैं जॉब के लिए रोज श्यामगंज आती हूं। बारिश के दिनों में जब सड़क पर डलावघर की गंंदगी बह रही होती है तो निकलना दुश्वार होता है। - संगीता, कटरा चांद खां
तलाश रहे विकल्प
श्यामगंज में बड़ा कांपेक्टर लगाने के लिए पर्याप्त जगह नहीं है। छोटे कांपेक्टर के विकल्प पर विचार कर रहे हैं। जमीन भी तलाश रहे हैं। आसपास पर्याप्त जगह नहीं मिलेगी तो कुछ दूरी पर देखेंगे। गीला कूड़ा ट्रांसफर स्टेशन और सूखा कूड़ा एमआरएफ सेंटर भेजने पर भी काम किया जा सकता है। -संजीव कुमार मौर्य, नगर आयुक्त