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लॉकडाउन में वैवाहिक कार्यक्रम नहीं होने से कारोबार पर पड़ी भारी चोट
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बरेली का बंद पड़ा जगत सिनेमा।
- फोटो : अमर उजाला ब्यूरो, बरेली
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इस बार शादी-ब्याह सीजन 700 करोड़ रुपये का धंधा होने की थी उम्मीद
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कारोबारी बोले, इस नुकसान की भरपाई संभव नहीं, सरकार करे सहयोग
तीन माह में 29 शादियों का मुहूर्त, कैटर्स और अन्य आर्डर लोगों ने किए रद
बरेली। तमाम कारोबारी डेढ़ महीने के लॉकडाउन में ही प्रशासन को अपने नुकसान की दुहाई देते घूम रहे हैं लेकिन कुछ ऐसे कारोबार भी हैं जिनका साल भर का पूरा सीजन ही कोरोना निगल गया। ब्याह-शादियों की रौनक के साथ करीब बरातघरों, कैटरर और बैंड-बाजे वालों का अरबों का कारोबार भी इस खतरनाक वायरस की भेंट चढ़ गया। दान-दहेज और जश्न का इंतजाम करने वाले दूसरे सप्लायर्स को जोड़ा जाए तो यह नुकसान सात सौ करोड़ से ज्यादा का माना जा रहा है।
अर्थ चक्र में कोरोना का ब्रेक लगने से यूं तो मजदूर और प्राइवेट वर्कर से लेकर हर शख्स परेशान है लेकिन कारोबारियों का कहना है कि कोरोना की जो चोट कारोबार पर पड़ी है, वह लंबे समय तक असर दिखाएगी। लॉकडाउन जिस तरह लगातार बढ़ रहा है, उससे साफ है कि अप्रैल और मई के बाद जून से भी बहुत ज्यादा उम्मीद नहीं की जा सकती। कारोबारियों के मुताबिक इन तीन महीनों में कुल मिलाकर 29 मांगलिक तिथियां हैं। सबसे प्रमुख तिथि अक्षय तृतीया गिनी-चुनी शादियों के निकल चुकी है। इन शादियों पर भी सादगी हावी रही। कारोबारियों के मुताबिक अक्षय तृतीया पर शहर में 25 से ज्यादा बड़े बजट की शादियां होनी थीं। इनके निमंत्रण पत्र छप चुके थे, बरातघर और लॉन बुक कराने के साथ कैटरर भी तय हो चुके थे, लेकिन लॉकडाउन लागू हुआ तो सारी शादियां टाल दी गईं। कारोबारियों का कहना है कि इन तीन महीनों में करीब सात सौ करोड़ का कारोबार पर होना था। यह नुकसान वह पूूरा नहीं कर पाएंगे।
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बीएस-4 का पुराना स्टॉक और नए मॉडलों के लिए बुकिंग सभी डीलरों पर आने लगी थी। पुराना स्टॉक की डिलीवरी 25 अप्रैल और बीएस-6 नए मॉडल की बुकिंग जून तक होनी थी। यह मांग सहालगों की बजह से ही थी लेकिन लॉकडाउन ने पूरा सीन और प्लान बदल दिया। करोड़ों का कारोबार प्रभावित हुआ है। - विनोद ग्रोवर, ऑटामोबाइल कारोबारी
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मोबाइल सेक्टर में तीन माह में करोड़ों का कारोबार होना था। मोबाइल के साथ दूसरा इलेक्ट्रेनिक्स सामान भी वैवाहिक कार्यक्रमों में लिया-दिया होता है। बरेली मोबाइल , उसकेपार्ट्स और एसेसरी और रिपेयरिंग का बड़ा बाजार है। हर महीने करीब 50 करोड़ रुपये का कारोबार होता है जो अब ठप हो गया है। - संदीप मेहरा, मोबाइल फोन कारोबारी
अकल्पनीय नुकसान है, इसकी उम्मीद ही नहीं थी। करोड़ों का स्टाक डंप हो गया है। लॉकडाउन में स्टाफ का वेतन दे रहे हैं, इससे दोहरी मार पड़ रही है। सहालग और त्योहारी सीजन पूरी तरह पिट गया है। सरकार ने सर्विस सेंटर तो खुलवा दिए हैं, अब शोरूम भी खुलने दे या फिर ऑनलाइन सेल होने दी जाए। - एसपीएस चौहान, ऑटोमोबाइल डीलर
तीन महीने में 29 शादियां थीं और उसके अलावा भी तमाम और कार्यक्रम होते हैं। इनमें कैटरिंग के साथ कई और कारोबार चलते हैं। शौकीन लोग वैवाहिक कार्यक्रम को यादगार बनाने को जी खोलकर खर्च करते हैं। एक तरह से सारे के सारे आयोजनों की बुकिंग रद्द हो गई, इससे बड़ा नुकसान हुआ है। - गिरीश चौपड़ा, कैटरर
हजारों लोगों ने शादी और दूसरे शुभ कार्यक्रमों के लिए निमंत्रण पत्र छपवाए थे। जून तक होने वाले कार्यक्रम लोगों ने स्थगित कर दिए हैं। प्रिटिंग आर्डर लाखों रुपये के थे। शादियों में कई और सेक्टर भी काम करते हैं। बड़े स्तर पर श्रमिक भी लगते हैं, इस सबकी वजह से करोड़ों की क्षति हुई है। - नरेंद्र सिंह चौहान, प्रिंटर
मनोरंजन करने वाले सिनेमा घर 50 वें दिन भी बंद
बरेली। कोरोना को लेकर जिस तरह की भविष्यवाणियां की जा रही हैं, उसने सिनेमाघरों के भविष्य पर सबसे बड़ा8 प्रश्नचिह्न लगा दिया है। शहर के सारे सिनेमाघरों में 50 दिनों से ताला लटका है। रुपहले पर्दे के पीछे सैकड़ों लोगों के स्टाफ की रोजी-रोटी भी खतरे में है।
मल्टीप्लेक्स और सिनेमाघर चलाने वालों के चेहरों पर उदासी की गहरी छाया है। उनका कहना है कि शहर में ही इस कारोबार को 50 दिनों से पांच करोड़ से ज्यादा नुकसान हो चुका है और अभी यह भी पता नहीं है कि सिनेमाघरों को चलाए जाने लायक स्थिति कब सामान्य हो पाएगी। सिनेमाघर बंद होने से उनमें चल रही कैंटीन, स्टैंड, सिगरेट-पान जैसे छोटे-मोटे कारोबार भी बंद हो गए हैं और सैकड़ों लोगों का रोजगार हाथ से चला गया।
सिनेमाघर वालों ने वेतन रोका, भटक रहा स्टाफ
सिनेमाघर वालों ने अपने स्टाफ को मार्च का वेतन तो दे दिया था लेकिन ज्यादातर ने अप्रैल का वेतन देने से हाथ खड़े कर दिए हैं। मॉल में चल रहे मल्टीप्लेक्स के स्टाफ को भी वेतन नहीं दिया गया है। स्टाफ लगातार प्रबंधन को अपने परिवारों की दुहाई दे रहा है लेकिन बात नहीं बन रही है। सिनेमा हाल और मल्टीप्लेक्स में करीब सवा दो सौ स्टाफ बताया जाता है।
इंफो:
सिनेमा घर 06
मल्टीप्लेक्स 06
50 दिनों से कारोबार ठप है। तमाम देनदारियां और स्टाफ का भुगतान भी करना है। सभी सेक्टरों पर खोलने पर विचार और चर्चा हो रही है लेकिन सिनेमा उद्योग को लेकर कोई चिंता नहीं दिख रही है। इसमें कोई विकल्प नही है। जल्द कोई कार्ययोजना बनना जरूरी है। - चेतन मेहरा, मल्टीप्लेक्स
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कारोबारी बोले, इस नुकसान की भरपाई संभव नहीं, सरकार करे सहयोग
तीन माह में 29 शादियों का मुहूर्त, कैटर्स और अन्य आर्डर लोगों ने किए रद बरेली। तमाम कारोबारी डेढ़ महीने के लॉकडाउन में ही प्रशासन को अपने नुकसान की दुहाई देते घूम रहे हैं लेकिन कुछ ऐसे कारोबार भी हैं जिनका साल भर का पूरा सीजन ही कोरोना निगल गया। ब्याह-शादियों की रौनक के साथ करीब बरातघरों, कैटरर और बैंड-बाजे वालों का अरबों का कारोबार भी इस खतरनाक वायरस की भेंट चढ़ गया। दान-दहेज और जश्न का इंतजाम करने वाले दूसरे सप्लायर्स को जोड़ा जाए तो यह नुकसान सात सौ करोड़ से ज्यादा का माना जा रहा है।
अर्थ चक्र में कोरोना का ब्रेक लगने से यूं तो मजदूर और प्राइवेट वर्कर से लेकर हर शख्स परेशान है लेकिन कारोबारियों का कहना है कि कोरोना की जो चोट कारोबार पर पड़ी है, वह लंबे समय तक असर दिखाएगी। लॉकडाउन जिस तरह लगातार बढ़ रहा है, उससे साफ है कि अप्रैल और मई के बाद जून से भी बहुत ज्यादा उम्मीद नहीं की जा सकती। कारोबारियों के मुताबिक इन तीन महीनों में कुल मिलाकर 29 मांगलिक तिथियां हैं। सबसे प्रमुख तिथि अक्षय तृतीया गिनी-चुनी शादियों के निकल चुकी है। इन शादियों पर भी सादगी हावी रही। कारोबारियों के मुताबिक अक्षय तृतीया पर शहर में 25 से ज्यादा बड़े बजट की शादियां होनी थीं। इनके निमंत्रण पत्र छप चुके थे, बरातघर और लॉन बुक कराने के साथ कैटरर भी तय हो चुके थे, लेकिन लॉकडाउन लागू हुआ तो सारी शादियां टाल दी गईं। कारोबारियों का कहना है कि इन तीन महीनों में करीब सात सौ करोड़ का कारोबार पर होना था। यह नुकसान वह पूूरा नहीं कर पाएंगे।
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बीएस-4 का पुराना स्टॉक और नए मॉडलों के लिए बुकिंग सभी डीलरों पर आने लगी थी। पुराना स्टॉक की डिलीवरी 25 अप्रैल और बीएस-6 नए मॉडल की बुकिंग जून तक होनी थी। यह मांग सहालगों की बजह से ही थी लेकिन लॉकडाउन ने पूरा सीन और प्लान बदल दिया। करोड़ों का कारोबार प्रभावित हुआ है। - विनोद ग्रोवर, ऑटामोबाइल कारोबारी
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मोबाइल सेक्टर में तीन माह में करोड़ों का कारोबार होना था। मोबाइल के साथ दूसरा इलेक्ट्रेनिक्स सामान भी वैवाहिक कार्यक्रमों में लिया-दिया होता है। बरेली मोबाइल , उसकेपार्ट्स और एसेसरी और रिपेयरिंग का बड़ा बाजार है। हर महीने करीब 50 करोड़ रुपये का कारोबार होता है जो अब ठप हो गया है। - संदीप मेहरा, मोबाइल फोन कारोबारी
अकल्पनीय नुकसान है, इसकी उम्मीद ही नहीं थी। करोड़ों का स्टाक डंप हो गया है। लॉकडाउन में स्टाफ का वेतन दे रहे हैं, इससे दोहरी मार पड़ रही है। सहालग और त्योहारी सीजन पूरी तरह पिट गया है। सरकार ने सर्विस सेंटर तो खुलवा दिए हैं, अब शोरूम भी खुलने दे या फिर ऑनलाइन सेल होने दी जाए। - एसपीएस चौहान, ऑटोमोबाइल डीलर
तीन महीने में 29 शादियां थीं और उसके अलावा भी तमाम और कार्यक्रम होते हैं। इनमें कैटरिंग के साथ कई और कारोबार चलते हैं। शौकीन लोग वैवाहिक कार्यक्रम को यादगार बनाने को जी खोलकर खर्च करते हैं। एक तरह से सारे के सारे आयोजनों की बुकिंग रद्द हो गई, इससे बड़ा नुकसान हुआ है। - गिरीश चौपड़ा, कैटरर
हजारों लोगों ने शादी और दूसरे शुभ कार्यक्रमों के लिए निमंत्रण पत्र छपवाए थे। जून तक होने वाले कार्यक्रम लोगों ने स्थगित कर दिए हैं। प्रिटिंग आर्डर लाखों रुपये के थे। शादियों में कई और सेक्टर भी काम करते हैं। बड़े स्तर पर श्रमिक भी लगते हैं, इस सबकी वजह से करोड़ों की क्षति हुई है। - नरेंद्र सिंह चौहान, प्रिंटर
मनोरंजन करने वाले सिनेमा घर 50 वें दिन भी बंद
बरेली। कोरोना को लेकर जिस तरह की भविष्यवाणियां की जा रही हैं, उसने सिनेमाघरों के भविष्य पर सबसे बड़ा8 प्रश्नचिह्न लगा दिया है। शहर के सारे सिनेमाघरों में 50 दिनों से ताला लटका है। रुपहले पर्दे के पीछे सैकड़ों लोगों के स्टाफ की रोजी-रोटी भी खतरे में है।मल्टीप्लेक्स और सिनेमाघर चलाने वालों के चेहरों पर उदासी की गहरी छाया है। उनका कहना है कि शहर में ही इस कारोबार को 50 दिनों से पांच करोड़ से ज्यादा नुकसान हो चुका है और अभी यह भी पता नहीं है कि सिनेमाघरों को चलाए जाने लायक स्थिति कब सामान्य हो पाएगी। सिनेमाघर बंद होने से उनमें चल रही कैंटीन, स्टैंड, सिगरेट-पान जैसे छोटे-मोटे कारोबार भी बंद हो गए हैं और सैकड़ों लोगों का रोजगार हाथ से चला गया।
सिनेमाघर वालों ने वेतन रोका, भटक रहा स्टाफ
सिनेमाघर वालों ने अपने स्टाफ को मार्च का वेतन तो दे दिया था लेकिन ज्यादातर ने अप्रैल का वेतन देने से हाथ खड़े कर दिए हैं। मॉल में चल रहे मल्टीप्लेक्स के स्टाफ को भी वेतन नहीं दिया गया है। स्टाफ लगातार प्रबंधन को अपने परिवारों की दुहाई दे रहा है लेकिन बात नहीं बन रही है। सिनेमा हाल और मल्टीप्लेक्स में करीब सवा दो सौ स्टाफ बताया जाता है।इंफो:
सिनेमा घर 06
मल्टीप्लेक्स 06
50 दिनों से कारोबार ठप है। तमाम देनदारियां और स्टाफ का भुगतान भी करना है। सभी सेक्टरों पर खोलने पर विचार और चर्चा हो रही है लेकिन सिनेमा उद्योग को लेकर कोई चिंता नहीं दिख रही है। इसमें कोई विकल्प नही है। जल्द कोई कार्ययोजना बनना जरूरी है। - चेतन मेहरा, मल्टीप्लेक्स