Bareilly News: आईवीआरआई में जनवरी से बीटेक और एमबीए की होगी पढ़ाई, ये छात्र ले सकेंगे प्रवेश
आईवीआरआई में पहले से ही बैचलर इन वेटरनरी साइंस समेत अन्य डिप्लोमा कोर्स संचालित हो रहे हैं। अब बीटेक बायोटेक्नोलॉजी के साथ एमबीए इन एग्री बिजनेस मैनेजमेंट, एमएससी इन एग्रीकल्चर इकोनॉमिक्स और एग्रीकल्चर स्टेटिस्टिक्स कोर्स शुरू होंगे।
विस्तार
बरेली के भारतीय पशु चिकित्सा अनुसंधान संस्थान इज्जतनगर परिसर में अब बीटेक (बायोटेक्नोलॉजी) और एमबीए की पढ़ाई भी होगी। इसी सत्र से पाठ्यक्रम के संचालन की तैयारी है। वहीं, आईसीएआर के हैदराबाद और बेंगलुरू परिसर भी एजुकेशन हब बनेंगे।
आईवीआरआई के संयुक्त निदेशक (शैक्षणिक) डॉ. एसके मेंदीरत्ता के मुताबिक इज्जतनगर परिसर में पहले से ही बैचलर इन वेटरनरी साइंस समेत अन्य डिप्लोमा कोर्स संचालित हो रहे हैं। अब बीटेक बायोटेक्नोलॉजी के साथ एमबीए इन एग्री बिजनेस मैनेजमेंट, एमएससी इन एग्रीकल्चर इकोनॉमिक्स और एग्रीकल्चर स्टेटिस्टिक्स कोर्स शुरू होंगे। बीटेक में 12वीं पास और एमबीए में बीवीएससी और बीएससी एग्रीकल्चर पास अभ्यर्थी प्रवेश ले सकेंगे।
भारतीय कृषि अनुसंधान संस्थान के हैदराबाद व बेंगलुरू परिसर में भी आईवीआरआई इज्जतनगर के सहयोग से शैक्षिक गतिविधियां संचालित होंगी, ताकि पढ़ाई के लिए दक्षिण भारतीय अभ्यर्थियों को उत्तर भारत तक भागदौड़ न करनी पड़े। डॉ. मेंदीरत्ता के मुताबिक हैदराबाद में पोल्ट्री से जुड़े दो पाठ्यक्रम संचालित होंगे। इसमें पोल्ट्री साइंस में पीएचडी और मास्टर इन वेटरनरी साइंस शामिल हैं।
बेंगलुरू कैंपस में संचालित होंगे ये कोर्स
बेंगलुरू कैंपस में वेटरनरी बायोकेमिस्ट्री, वेटरनरी माइक्रोबायोलॉजी, वेटरनरी पब्लिक हेल्थ, वेटरनरी एनिमल न्यूट्रिशन, वेटरनरी फिजियोलॉजी डिग्री कोर्स शामिल हैं। संबंधित पाठ्यक्रमों में प्रवेश के लिए आईसीएआर की वेबसाइट पर ऑनलाइन आवेदन हुए थे। आईसीएआर में आवेदकों की काउंसलिंग चल रही है। इसके बाद पैनल फाइनल परिणाम जारी करेगा। चयनित अभ्यर्थियों की पढ़ाई नए सत्र से शुरू होगी। सकारात्मक परिणाम मिलने पर कोर्स का विस्तार होगा।
आईवीआरआई के निदेशक डॉ. त्रिवेणी दत्त के मुताबिक आईवीआरआई इज्जतनगर ने नई शिक्षा नीति को लागू करने का सकारात्मक प्रयास किया है। ताकि विद्यार्थियों को बेहतर शिक्षा मिले और स्किल डेवलपमेंट हो सके। हैदराबाद और बंगलूरू परिसर में अभी शोध कार्य होते हैं। शैक्षिक गतिविधियां संचालित होने से पढ़ाई के साथ प्रयोगात्मक ज्ञान भी मिलेगा।