बरेली: इंसानों में प्रयोग होने वाली प्लेट से जोड़ी गाय की टूटी हड्डी, आईवीआरआई पॉलीक्लीनिक में हुई सर्जरी
आईवीआरआई के वैज्ञानिकों ने चार क्विंटल वजन की एक गाय की तीन जगह से टूटी हड्डी की सफल सर्जरी की है। इस सर्जरी में इन्सानों में इस्तेमाल होने वाली विशेष प्लेट का प्रयोग किया गया। दो सप्ताह बाद गाय चलने-फिरने में सक्षम हो गई।
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बरेली के इज्जतनगर स्थित भारतीय पशु चिकित्सा अनुसंधान संस्थान (आईवीआरआई) के वैज्ञानिकों ने पशु चिकित्सा के क्षेत्र में एक महत्वपूर्ण उपलब्धि हासिल की है। उन्होंने करीब चार क्विंटल वजन की एक गाय की तीन जगह से टूटी हड्डी की सफल सर्जरी की है। इस सर्जरी में पहली बार इंसानों में इस्तेमाल होने वाली एक विशेष प्लेट का प्रयोग किया गया, जिसके दो सप्ताह बाद गाय चलने-फिरने में सक्षम हो गई है।
आईवीआरआई रेफरल पॉलीक्लिनिक के वैज्ञानिक डॉ रोहित कुमार के मुताबिक बदायूं के बिल्सी निवासी किसान संदीप कुर कुमार सिंह की साहीवाल नस्ल की गाय पिछले महीने गिरने से घायल हो गई थी। उसकी पिछली टांग की हड्डी तीन जगह से टूट गई थी।
स्थानीय पशु चिकित्सकों ने इलाज में असमर्थता जताई। इसके बाद किसान गाय को आईवीआरआई पॉलीक्लिनिक लेकर पहुंचे। पहले असमर्थता जताई पर किसान के अनुरोध पर चुनौती मानकर सर्जरी का निर्णय लिया। डॉ. रोहित कुमार ने बताया कि पशुओं के लिए बाजार में उपलब्ध प्लेट टिकाऊ नहीं होतीं। इससे जोखिम बढ़ जाता है।
चार घंटे चली सर्जरी
इस चुनौती को स्वीकार करते हुए, इंसानों की जांघ की टूटी हड्डी जोड़ने वाली एक डिजाइनर प्लेट का उपयोग करने का निर्णय लिया गया। करीब चार घंटे चली सर्जरी में इस प्लेट को सटीकता से लगाया गया, जो सफल रही। डॉ. रोहित ने बताया कि बड़े पशुओं में फ्रैक्चर का प्रबंधन उनके अधिक भार के कारण चुनौतीपूर्ण होता है। यह मामला पशु चिकित्सा में एक सफल अध्ययन के रूप में देखा जा रहा है।
डॉ. रोहित ने बताया कि 300-400 किलो वजन वाले पशुओं की टांग पर लगातार भार पड़ता है। पशु के हिलने-डुलने से प्लेट लेट और अन्य इंप्लांट पर दबाव बढ़ने का जोखिम रहता है। इस मामले में प्लेटिंग के दो हफ्ते बाद भी कोई बड़ा घाव नहीं हुआ। पशु अब खड़ा होकर चल पा रहा है।
किसान का गाय से भावनात्मक जुड़ाव
किसान संदीप कुमार सिंह ने बताया कि उन्होंने इस गाय को छोटी बछिया के रूप में छुट्टा घूमते देखा था और फिर उसे पाल लिया। उन्होंने कहा कि यह सिर्फ पशु का इलाज ही नहीं, बल्कि गाय से जुड़े उनके लगाव को भी टूटने से बचाया है। सर्जरी के बाद गाय अब खड़ी हो रही है, थोड़ी दूरी तक चल भी रही है और सामान्य रूप से घास खा रही है। किसान ने वैज्ञानिक टीम का आभार व्यक्त किया।