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UP: ब्रिगेडियर की वर्दी और भाड़े के बाउंसर, नीट फेल 21 साल के आर्यन ने ऐसा रचा खेल, हर कोई रह गया दंग

Sat, 13 Jun 2026 03:28 PM IST
Mukesh Kumar संवाद न्यूज एजेंसी, शाहजहांपुर
संवाद न्यूज एजेंसी, शाहजहांपुर Published by: Mukesh Kumar Updated Sat, 13 Jun 2026 03:28 PM IST
सार

ब्रिगेडियर की वर्दी, गाड़ी पर सेना का फ्लैग-स्टार और साथ में एनएसजी कमांडो। शाहजहांपुर की सड़कों पर महीनों से रौब झाड़ रहे एक शातिर युवक को सैन्य अफसरों ने शुक्रवार को पकड़ लिया। पूछताछ में उसने चौंकाने वाली बातें बताई हैं। 

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Brigadier uniform and hired bouncers 21-year-old Aryan was exposed by ex-servicemen in shahjahanpur
आरोपी आर्यन और उसके साथी - फोटो : अमर उजाला

विस्तार

शाहजहांपुर में ब्रिगेडियर की वर्दी में शहर की सड़कों पर महीनों से रौब झाड़ रहे आर्यन के आत्मविश्वास, चाल-ढाल और रुतबे में कोई कमी नहीं थी। बस कम थी तो उसकी उम्र। ब्रिगेडियर की रैंक 20 से 25 वर्ष की सैन्य सेवा के बाद मिल पाती है और आर्यन तो महज 20-21 वर्ष का साफ दिख रहा था। इसी वजह से पूर्व सैनिकों की निगाहों को वह धोखा नहीं दे सका।

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कई बार उसे वर्दी में देखने के बाद पूर्व सैनिकों ने सारी जानकारी जुटाने के बाद सैन्य अधिकारियों के साथ मिलकर उसे पकड़ने के लिए प्लान बनाया। फिर शुक्रवार को कई महीने के उसके नाटक से पर्दा हटा दिया। उसे कैंट स्थित शहीद संग्रहालय से दबोच लिया। मामला राष्ट्रीय सुरक्षा से जुड़ा होने के कारण बरेली से आई मिलिट्री इंटेलीजेंस टीम ने आरोपी से बंद कमरे में लंबी पूछताछ की और उसे पुलिस के हवाले कर दिया।
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स्टेशन हेडक्वार्टर शाहजहांपुर के नायब सूबेदार अमित कुमार की ओर से आर्यन वर्मा के खिलाफ सदर बाजार थाने में धोखाधड़ी, लोकसेवक का रूप धारण करने, जाली दस्तावेजों या इलेक्ट्रॉनिक रिकॉर्ड्स को गैरकानूनी तरीके से अपने पास रखने और उन्हें बनाने समेत अन्य धाराओं में प्राथमिकी दर्ज कराई गई है।
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इन पूर्व सैनिकों ने खोली जालसाज की पोल 
आर्यन की सच्चाई सामने लाने वालों में आवास विकास कॉलोनी निवासी अखिल भारतीय पूर्व सैनिक सेवा परिषद के अध्यक्ष सूबेदार मेजर रमेश दीक्षित, वृंदावन कॉलोनी निवासी वरिष्ठ उपाध्यक्ष सतीश चौहान, जिला सचिव स्वदेश मिश्रा, जिला संगठन मंत्री योगेंद्र त्यागी व अन्य शामिल रहे। इन पूर्व सैनिकों ने बताया कि आर्यन को पहली बार बावर्दी देखा था। निजी कार पर ब्रिगेडियर का झंडा व स्टार देख संदेह हुआ। तभी से उसके पीछे लगे हुए थे। 

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आरोपी आर्यन - फोटो : संवाद

फुलप्रूफ प्लान बनाकर पकड़ा 
इसके बाद वह फिर अप्रैल में इसी हाल में दिखाई दिया। तब उसके घर के आसपास जाकर पड़ताल की। आर्यन के फर्जीवाड़े के बारे में सारी जानकारी जुटाने के बाद उसे पकड़ने का फुलप्रूफ प्लान बनाया गया। एक आम नागरिक बनकर आर्यन को फोन किया गया कि शहीद संग्रहालय में कुछ युवाओं को सेना में भर्ती के लिए प्रेरित करना है। पहले 11 जून को कार्यक्रम निर्धारित किया गया लेकिन आर्यन ने खुद के लखनऊ में होने की बात कही। इस पर शुक्रवार को सुबह दस बजे कार्यक्रम का सारा सेटअप बनाया गया। 

एक एकेडमी में अग्निवीर भर्ती की तैयारी कर रहे 10-12 युवाओं को म्यूजियम में बुलाया गया। सुबह करीब 10:45 बजे आर्यन अपनी पूरी ठसक के साथ कार से आया। उसके साथ बाउंसर आए, जिन्हें वह एनएसजी कमांडो बताता था। गेट खोला और फिर ब्रिगेडियर की फुल ड्रेस में आर्यन उतरा। आसपास बिना वर्दी के सैनिक सतर्क खड़े रहे। दरअसल अधिकारियों को शंका थी कि पकड़े जाने के डर से वह कोई अनहोनी कर सकता है इसलिए पूरी सतर्कता बरती गई। उसने युवाओं को संबोधित भी किया। 

अधिकारियों ने उसे युवाओं को गिफ्ट देने के लिए कहा, वही सही मौका मानकर सैनिकों ने उसे दबोच लिया। तब उसे एहसास हुआ कि वह फंस गया है। इसके बाद उससे पूछताछ शुरू की गई। पकड़े जाने के बाद भी आर्यन पूरे आत्मविश्वास से सभी को गुमराह करने का प्रयास करता रहा। कभी दिल्ली तो कभी चंडीगढ़ में अपनी तैनाती बताई। दोनों स्थानों पर पता किया, लेकिन ऐसा कोई युवक वहां पोस्टेड नहीं मिला। आर्मी इंटेलिजेंस की टीम ने उसके किसी देशविरोधी कृत्य में शामिल होने की भी जांच की। उसके पास से बरामद लैपटॉप-मोबाइल के अलावा उसके    घर जाकर भी जांच की गई। उसके पास स्टेथोस्कोप भी मिला है।

Brigadier uniform and hired bouncers 21-year-old Aryan was exposed by ex-servicemen in shahjahanpur
आरोपी आर्यन और उसके साथी - फोटो : संवाद
ब्रिगेडियर ने दो बाउंसर रखे थे भाड़े पर
शहर के मोहल्ला वर्कजई निवासी शशांक व मोहसिन साउथ सिटी कॉलोनी स्थित जी-20 ग्रुप में बाउंसर का काम करते हैं। शशांक का कहना है कि वह केवल एक ही बार कंपनी के जरिये फर्जी ब्रिगेडियर के साथ गया, जबकि मोहसिन का कहना है कि वह दो बार साथ गया। बाकी उन्हें कोई जानकारी नहीं है। एक दिन का एक हजार रुपया मिलता था। 

रोजा की मठिया कॉलोनी निवासी चालक जगवीर भी पूरी वर्दी में दिखा। जगवीर का फर्जी पहचान कार्ड दिल्ली के लक्ष्मीनगर पिलर नंबर फिफ्टी की एक शॉप से बनवाया था। उसने वर्दी भी दिल्ली से सिलवाई। पूछताछ में उसने बताया कि उसे एक दिन का पांच-छह सौ रुपया मिलता था। अब तक वह चार-पांच बार साथ जा चुका है। पूर्व सैनिकों ने नाराजगी जताते हुए चालक की भूमिका संदिग्ध बताई है।  

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कार पर रखी टोपी, बेंत व नकली पिस्टल - फोटो : संवाद

दिल्ली से खरीदी थी एयर गन और बेंत 
आर्यन वर्मा के अनुसार, उसे शूटिंग का शौक है, इसलिए पिछले साल दिल्ली से उसने एयर गन खरीदी थी। साथ ही आर्मी की बेंत भी उसने दिल्ली से खरीदने की बात बताई।

आर्यन बोला- मां का सपना पूरा करना चाहता था
रोजा क्षेत्र की दुर्गा एंक्लेव कॉलोनी में रहने वाले आर्यन की मां मनोज कुमारी भावलखेड़ा ब्लॉक के एक प्राइमरी स्कूल में शिक्षिका हैं। पिता अनिल वर्मा पहले विकास भवन में उद्यान विभाग में इंस्पेक्टर थे, लेकिन वर्तमान में पुवायां के लखपेड़ा में तैनात हैं। पिता की कार ही आर्यन इस्तेमाल करता था। 

आर्यन के अनुसार, दिल की मरीज उसकी मां उसे सैन्य अधिकारी बनाना चाहती थीं। मां का सपना पूरा करने के लिए ऐसा किया। वह करीब दो साल से दिल्ली में रहकर नीट की तैयारी कर रहा था। दो बार परीक्षा दी, लेकिन रैंक इतनी अच्छी नहीं थी कि उसे सरकारी कॉलेज मिल जाए। इसके बाद दिल्ली से ब्रिगेडियर की वर्दी खरीदी। बिहार के मयंक नाम के सोशल साइट पर बने दोस्त के जरिये फर्जी पहचान कार्ड बनवाया। साथ ही जनरल ब्रिगेडियर डॉ. आर्यन वर्मा के नाम से गवर्नमेंट ऑफ इंडिया एवं मिनिस्ट्री ऑफ डिफेंस का विजिटिंग कार्ड भी छपवाया। 

आरोपी ने परिवार को भी किया गुमराह 
कार्ड के पीछे आर्म्ड फोर्स मेडिकल कॉलेज पुणे महाराष्ट्र, कमांड हॉस्पिटल कमांडेंट ऑफिसर हरियाणा, एयरफोर्स स्टेशन जनरल ब्रिगेडियर, पंचकुला, हरियाणा लिखा हुआ है। उसने बताया कि वर्ष 2023 में वह आर्म्ड फोर्स मेडिकल कॉलेज, पुणे गया था। वहां लोगों को वर्दी पहना देख प्रभावित हुआ था। उसकी बहन की बीमारी से मौत हो चुकी है। उसका एक छोटा भाई भी है। वहीं, पिता के मुताबिक आर्यन ने जनवरी में परिजनों को बताया था कि उसका चयन सेना की मेडिकल कोर में ब्रिगेडियर के पद पर हो गया है। उसे आउट ऑफ टर्न प्रमोशन मिला है। परिजनों ने आसानी से उसकी बात का विश्वास कर लिया। 

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