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Bareilly News: रहें सतर्क... मुंह और कान में दर्द भी हो सकता है कैंसर की वजह
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बरेली। मुंह के कैंसर के मामले जिले में तेजी से बढ़ते जा रहे हैं। आंकड़ों पर गौर करें तो करीब तीन हजार लोगों के मुंह के कैंसर का इलाज निजी मेडिकल कॉलेज और अस्पतालों में चल रहा है। राष्ट्रीय दंत चिकित्सक के मौके पर दंत चिकित्सक मुंह की तकलीफों को नजरंदाज करने से भी कैंसर के मामले बढ़ने की आशंका जताई है। उन्होंने शुरुआत में ही कैंसर की पुष्टि होने पर बेहतर इलाज की बात कही है।
अक्सर मुंह में दिक्कत होने पर लोग इसे नजरंदाज करते हैं। वरिष्ठ दंत चिकित्सक डॉ. अनूप आर्य के मुताबिक बीमारी बढ़ने पर ही ज्यादातर लोग इलाज के लिए अस्पताल पहुंचते हैं। तब तक बीमारी मुंह, गर्दन, सिर और गले के काफी हिस्से में पहुंच जाती है। ऐसे में जांच कराने पर अगर कैंसर की पुष्टि होती है तो इलाज लंबा चलता है। इससे पीड़ित को मानसिक और शारीरिक के साथ आर्थिक समस्या बढ़ जाती है। हालांकि, अब पहले, दूसरे और तीसरे स्टेज तक के कैंसर का इलाज हो जाता है मगर कई बार स्थिति बेहद खराब होने पर पीड़ित को बचा पाना मुश्किल होता है। अगर समय से पहचान हो जाए तो तकलीफ से बचा जा सकता है।
आंकड़ों पर गौर करें तो जिले के एसआरएमएस में मुंह के कैंसर के 612, रुहेलखंड मेडिकल कॉलेज में 308, ग्लेन कैंसर सेंटर में 1554, केशलता अस्पताल मेें 452 मरीजोें का इलाज चल रहा है। आंकड़ा कम होने के बजाय बढ़ते जाने की बात कैंसर विशेषज्ञों ने की है।
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शुरुआती लक्षण की विशेषज्ञ से जांच जरूरी
दंत चिकित्सक डॉ. पुनीत लुनियाल के मुताबिक मुंह में छाले, गांठ और किसी विशेष स्थान पर लगातार दर्द बने रहने के साथ अगर कान में भी दर्द हो रहा है तो यह खतरे की घंटी है। ऐसी स्थिति में विशेषज्ञ चिकित्सक से जांच कराना जरूरी है। दर्द की कई वजहों में कैंसर के मुंह में फैलने के शुरुआती लक्षण हो सकते हैं। उन्होंने मुंह की सफाई अच्छे से करने, गुटखा, तंबाकू, धूम्रपान की लत छोड़ने, फ्लूरॉयड युक्त टूथपेस्ट इस्तेमाल करने का सुझाव दिया है। कड़क रेशे वाले ब्रश के बजाय नर्म, मुलायम ब्रश को प्रयोग करने, तेज से दबाव के साथ रगड़ने से बचने का सुझाव दिया है।
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अक्सर मुंह में दिक्कत होने पर लोग इसे नजरंदाज करते हैं। वरिष्ठ दंत चिकित्सक डॉ. अनूप आर्य के मुताबिक बीमारी बढ़ने पर ही ज्यादातर लोग इलाज के लिए अस्पताल पहुंचते हैं। तब तक बीमारी मुंह, गर्दन, सिर और गले के काफी हिस्से में पहुंच जाती है। ऐसे में जांच कराने पर अगर कैंसर की पुष्टि होती है तो इलाज लंबा चलता है। इससे पीड़ित को मानसिक और शारीरिक के साथ आर्थिक समस्या बढ़ जाती है। हालांकि, अब पहले, दूसरे और तीसरे स्टेज तक के कैंसर का इलाज हो जाता है मगर कई बार स्थिति बेहद खराब होने पर पीड़ित को बचा पाना मुश्किल होता है। अगर समय से पहचान हो जाए तो तकलीफ से बचा जा सकता है।
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आंकड़ों पर गौर करें तो जिले के एसआरएमएस में मुंह के कैंसर के 612, रुहेलखंड मेडिकल कॉलेज में 308, ग्लेन कैंसर सेंटर में 1554, केशलता अस्पताल मेें 452 मरीजोें का इलाज चल रहा है। आंकड़ा कम होने के बजाय बढ़ते जाने की बात कैंसर विशेषज्ञों ने की है।
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शुरुआती लक्षण की विशेषज्ञ से जांच जरूरी
दंत चिकित्सक डॉ. पुनीत लुनियाल के मुताबिक मुंह में छाले, गांठ और किसी विशेष स्थान पर लगातार दर्द बने रहने के साथ अगर कान में भी दर्द हो रहा है तो यह खतरे की घंटी है। ऐसी स्थिति में विशेषज्ञ चिकित्सक से जांच कराना जरूरी है। दर्द की कई वजहों में कैंसर के मुंह में फैलने के शुरुआती लक्षण हो सकते हैं। उन्होंने मुंह की सफाई अच्छे से करने, गुटखा, तंबाकू, धूम्रपान की लत छोड़ने, फ्लूरॉयड युक्त टूथपेस्ट इस्तेमाल करने का सुझाव दिया है। कड़क रेशे वाले ब्रश के बजाय नर्म, मुलायम ब्रश को प्रयोग करने, तेज से दबाव के साथ रगड़ने से बचने का सुझाव दिया है।