फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   Uttar Pradesh ›   Bareilly News ›   BDA

अवैध कॉलोनियों के ले-आउट पास कराने का खर्चा पब्लिक को ही झेलना होगा

Wed, 25 Dec 2019 01:16 AM IST
Bareily Bureau बरेली ब्यूरो
Updated Wed, 25 Dec 2019 01:16 AM IST
विज्ञापन
BDA
बीडीए की दिक्कत- वर्षों पहले कॉलोनी बसाने वाले बिल्डरों को अब कहां ढूंढे
विज्ञापन

चिह्नित 149 अवैध कॉलोनियों को वैध करने की राह में नहीं अड़चन
बरेली। बीडीए 149 अवैध कॉलानियों को वैध करने की मुहिम चला रहा है। इसमें पहले चरण में उन कॉलोनियों को चिह्नित किया जा रहा है, जहां सड़क और पार्क सहित दूसरी जरूरी सुविधाएं उपलब्ध हैं। इस प्रक्रिया में दिक्कत यह आ रही है कि वर्षों पहले इन कॉलोनियों को बसाने वाले बिल्डरों का अब कोई अता-पता नहीं है। ऐसी जगहों का ले-आउट पास कराने के लिए डेवलपमेंट चार्ज समेत बीडीए के दूसरे निर्धारित खर्च कॉलोनी में ही रहने वालों को झेलने होंगे।
शहर में बीडीए से मंजूरी लिए बगैर ही सैकड़ों अवैध कॉलोनियां बस चुकी हैं। हजारों अनाधिकृत बिल्डिंग भी खड़ी हो चुकी हैं। बीडीए के लिए इनका ध्वस्तीकरण कर पाना मुमकिन नहीं है, लिहाजा इन अवैध कॉलोनियों को वैध करने की कार्रवाई बीडीए कर रहा है। अधिकारियों का कहना है कि पहले उन कॉलोनियों को चिह्नित किया जा रहा है, जहां चौड़ी सड़कें और पार्क सहित अन्य जरूरी सुविधाएं उपलब्ध हैं और बीडीए के मानकों को काफी हद तक पूरा कर रही हैं। हालांकि ऐसी कॉलोनियों को वैध करने में समस्या यह है कि बीडीए से इनके ले-आउट पास कराने के लिए मोटी रकम का भुगतान करना होगा। चूंकि कॉलोनियों को बसाने वाले बिल्डरों को ढूंढ पाना अब मुमकिन नहीं है, लिहाजा बीडीए ने संबंधित कॉलोनी के लोगों को यह विकल्प दिया है कि वे ले-आउट पास कराने का खर्च मिलकर वहन करें। ले-आउट पास होने के बाद इन भवन स्वामियों को नक्शा पास कराने के लिए कंपाउंडिंग भी करानी होगी। इस पर भी अच्छा खासा खर्चा आएगा। ऐसे में तमाम अवैध कॉलोनियों को वैध करने की प्रक्रिया में अड़ंगा भी लग सकता है।
विज्ञापन


मानक पूरे करने वाली कॉलोनियों को बीडीए वैध कर रहा है लेकिन ले-आउट को पास कराने के लिए जो तय खर्च हैं, उन्हें संबंधित कॉलोनी के लोगों को मिलजुल कर ही वहन करना है, क्योंकि इन कॉलोनियों को बसाने वाले बिल्डरों से वर्षों बाद इसका खर्च ले पाना मुमकिन नहीं है। -दिव्या मित्तल, उपाध्यक्ष, बीडीए
विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News App, iOS Hindi News App और Amarujala Hindi News APP अपने मोबाइल पे|
Get all India News in Hindi related to live update of politics, sports, entertainment, technology and education etc. Stay updated with us for all breaking news from India News and more news in Hindi.

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed