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तीन दिन में एनजीटी मानदंडों को करें पूरा, वरना कार्रवाई को रहें तैयार
Wed, 06 Nov 2019 06:29 AM IST
बरेली ब्यूरो
अमर उजाला ब्यूरो, बरेली
अमर उजाला ब्यूरो, बरेली
Published by: बरेली ब्यूरो
Updated Wed, 06 Nov 2019 06:29 AM IST
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देश के कई प्रमुख राज्यों के प्रदूषण से घिरने के बाद शीर्ष संस्थाएं गंभीर हुईं तो इसका असर नीचे भी दिखने लगा है और प्रदूषण रोकने के लिए फाइलों में दबे पड़े एनजीटी के नियम-कायदों पर अमल कराने की कवायद शुरू हो गई है।
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बीडीए अफसरों ने मंगलवार को क्रेडाई के सदस्यों और ठेकेदारों के साथ एक बैठक कर साफ निर्देश दिए कि वे अपने बनाए भवनों मेें तीन दिनों के अंदर एनजीटी के नियम और शर्तों को पूरा करें वर्ना उनके भवनों पर पेनाल्टी लगाई जाएगी।
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क्रेडाई के सदस्यों और ठेकेदारों को इस बैठक में भवन निर्माण के संबंध में एनजीटी के नियमों और ग्रीन बेल्ट एरिया के अतिक्रमण पर होने वाली कार्रवाई की भी जानकारी दी गई।
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इसके साथ शहर में पर्यावरण संतुलन बनाए रखने के उपायों पर भी विचार-विमर्श किया गया। बीडीए वीसी दिव्या मित्तल ने एनजीटी के कायदों की जानकारी दी। बिल्डरों के संगठन क्रेडाई के सदस्यों ने भी एनजीटी के नियम-शर्तों पर सहमति जताते हुए उन पर पूरी तरह अमल करने का भरोसा दिलाया।
बैठक में चीफ इंजीनियर अजीत प्रताप सिंह के अलावा क्रेडाई सदस्यों में हरदीप ओबराय, आशीष अग्रवाल, अजय अग्रवाल व ठेकेदारों में विपिल भाटिया, राजीव ट्रेडर्स आदि भी शामिल हुए।
बीडीए ने माना- शहर में टूट रहे हैं नियम-कायदे
बीडीए सचिव अंबरीश कुमार श्रीवास्तव ने बताया कि शहर मेें लगातार ग्रीन बेल्ट एरिया में अतिक्रमण और व्यावसायिक भवनों के पार्किंग एरिया के दुरुपयोग की शिकायतें मिल रहीं हैं। भवन निर्माण में भी एनजीटी के नियमों की धज्जियां उड़ाई जा रही हैं।
शहर में ऐसे सैकड़ों व्यावसायिक प्रतिष्ठान हैं जो अपने पार्किंग एरिया और बेसमेंट का व्यावसायिक उपयोग कर रहे हैं। कई जगह पार्किंग के लिए ग्रीन बेल्ट के साथ सड़क तक कब्जा कर लिया गया है। सड़क पर निर्माण सामग्री डालना भी गलत है। इस संबंध में एनजीटी के नियमों का पालन करने के लगातार निर्देश दिए जा रहे हैं।
स्प्रिंकलिंग सिस्टम से कम होगा वायु प्रदूषण
बिल्डरों ने प्राधिकरण को सुझाव दिया कि शहर में बढ़ते वायु प्रदूषण को रोकने के लिए सबसे अधिक प्रदूषित चौराहों और इलाकों में स्प्रिंकलिंग सिस्टम लगाया जा सकता है। पानी की बूंदों के साथ हवा के हानिकारक तत्व जमीन पर आ गिरते हैं तो हवा शुद्घ हो जाती है। बीडीए ने भविष्य में इस संदर्भ में विचार करने की बात कही।
अब तक फाइलों में ही दबे रहे एनजीटी के ये निर्देश
- भवन निर्माण के दौरान सड़क के किनारे निर्माण सामग्री या मलबा नहीं डाला जाएगा।
- भवन निर्माणकर्ता निर्माण सामग्री को तिरपाल से ढंककर रखेगा।
- भवन निर्माता को सुनिश्चित करना होगा कि निर्माण के दौरान वायु प्रदूषण न हो।
- नियम तोड़ने पर एनजीटी के आदेश के अनुसार अर्थदंड डाला जाएगा।
- ट्रक आदि वाहनों में सीमेंट-बालू आदि को पूरी तरह ढंक कर ले जाना होगा।
- भवन निर्माणस्थल को पूरी तरह तिरपाल या ऐसी ही किसी चीज से कवर करना होगा।
- निर्माण स्थल पर धूल उत्सर्जन को रोकने के लिए सभी उपाय किए जाएंगे।
- निर्माण स्थल पर काम करने वाले मजदूरों को मास्क देना होगा ताकि धूल उनकी सांस में न जाए।
- पत्थर तोड़ने या घिसने के स्थान पर पानी का छिड़काव करना होगा।
- इन नियमों को तोड़ने पर दोषी भवन निर्माता पर 50 हजार रुपये का अर्थदंड व नियम विरुद्घ निर्माण सामग्री को लाने ले जाने पर पांच हजार का अर्थदंड देना होगा।
- निर्माण सामग्री, मनवा व अपशिष्ट आदि के नदी आदि में प्रवाहित करने पर भी एनजीटी की शर्तें लागू होंगी।
- सामाजिक स्थलों पर निर्माण सामग्री स्टोर करने पर 50 हजार का जुर्माना लगेगा।