UP News: बरेली को जल्द मिलेगा ट्रॉमा सेंटर... रोड की अड़चन दूर, खुलेंगे छह एनबीएसयू और पांच पॉलीक्लीनिक
बरेली में एक अदद ट्रामा सेंटर की बाट जोह रहे शहरवासियों की उम्मीद जल्द पूरी होगी। 300 बेड अस्पताल में प्रस्तावित निर्माण में अड़चन बनी रोड को शामिल करने पर शासन की मुहर लग गई है। बजट मिलते ही कार्य शुरू होगा। साथ ही, स्वास्थ्य केंद्रों पर सेवाओं का विस्तार भी होगा।
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विस्तार
बरेली जिले में सरकारी ट्रॉमा सेंटर न होने से दुर्घटनाग्रस्त गंभीर घायलों को हायर सेंटर रेफर किया जा रहा है। जिला अस्पताल के इमरजेंसी में प्राथमिक जांच के बाद करीब पांच घंटे बाद लखनऊ या अलीगढ़ पहुंचने तक घायलों की जान जोखिम में रहती है। लिहाजा, तीमारदार पीड़ित को निजी अस्पताल ले जाने के लिए विवश हैं। इलाज में भारी खर्च उठाते हैं। इस समस्या को अमर उजाला ने प्रमुखता से प्रकाशित किया था, तब बरेली के सांसद, विधायक और मंत्रियों ने सामूहिक रूप से मुख्यमंत्री को ट्रॉमा सेंटर निर्माण के लिए पत्र भेजा था। इस पर शासन ने भी सहमति जताई। इससे ट्रामा सेंटर की बाट जोह रहे शहरवासियों की उम्मीद जल्द पूरी होगी।
पिछले वर्ष शासन से निर्माण के लिए भूमि और प्रोजेक्ट रिपोर्ट मांगी गई। तीन सौ बेड अस्पताल में चल रही ओपीडी के सामने खाली पड़ी भूमि की नापजोख हुई तो थोड़ी सी जगह कम पड़ी। इस पर रोड का हिस्सा शामिल करने के लिए शासन को प्रस्ताव भेजा गया। अब इस पर भी मुहर लग गई है। करीब 40 करोड़ रुपये से ट्रॉमा सेंटर का निर्माण प्रस्तावित है।
डॉक्टरों की भर्ती प्रक्रिया शुरू
वर्षों से डॉक्टरों की कमी से जूझ रहे स्वास्थ्य विभाग को जल्द 37 नए डॉक्टर मिलेंगे। वॉक इन इंटरव्यू से डॉक्टरों की तैनाती होगी। आवेदन प्रक्रिया एक जनवरी को समाप्त हो गई है। आठ जनवरी को साक्षात्कार प्रस्तावित था लेकिन किन्हीं वजहों से प्रक्रिया स्थगित हो गई।
प्रशासन के उच्चाधिकारियों की अध्यक्षता में पैनल बन गया है। साक्षात्कार प्रक्रिया शनिवार को होगी। चयनित डॉक्टरों को एचडीयू, एसएनसीयू, सरकारी अस्पताल में संचालित ओपीडी और एनसीडी क्लीनिक में तैनात किया जाएगा। इससे मरीजों को काफी हद तक सहूलियत मिलेगी।
इन केंद्रों पर एनबीएसयू संचालन प्रस्तावित
शासन की मंजूरी के बाद फतेहगंज पश्चिमी, क्यारा, कुआंडांडा, क्योलड़िया, रिछा और शेरगढ़ पर एनीएसयू खोलने की कवायद शुरू की गई है। इसके लिए छह फोटोथेरेपी मशीन, सात रेडिएंट वॉर्मर खरीदे जाएंगे। प्रशिक्षित स्टाफ 24 घंटे निगरानी करेगा। फिलहाल, फरीदपुर, बहेड़ी, नवाबगंज, मीरगंज, भमोरा, मझगवां, बिथरी और भोजीपुरा में न्यू बॉर्न स्टेबिलाइजेशन यूनिट (एनबीएसयू) संचालित हैं। अप्रैल से दिसंबर तक यहां 1,182 नवजात भर्ती हुए। 28 फीसदी बच्चे ऐसे थे, जिनका वजन कम था और सांस लेने में परेशानी थी। कुछ पीलिया, सेप्सिस की चपेट में थे।
पांच यूपीएचसी पर विशेषज्ञ चिकित्सक देंगे परामर्श
केंद्र सरकार के निर्देश पर राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन के तहत पांच नगरीय प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र (यूपीएचसी) पर पॉली क्लीनिक की कवायद शुरू कर दी गई है। यहां विशेषज्ञ चिकित्सा सेवा के साथ कई तरह की जांच की सुविधा मरीजों को मिलेगी। इनका निर्माण 15 वें वित्त आयोग की राशि से होगा। योजना है कि त्वचा, दंतरोग और नाक-कान-गला की ओपीडी यहां शुरू कराई जाएगी। विशेषज्ञ चिकित्सकों की कमी पर रोटेशन से पाली क्लीनिक चलेगा। इससे जिला अस्पताल पर मरीजों का दबाव कम होगा। लोगों को घर के पास बेहतर चिकित्सा सुविधा मिल सकेगी।
मुख्य चिकित्साधिकारी डॉ. विश्राम सिंह ने बताया कि स्वास्थ्य सेवाओं को बेहतर बनाने के साथ विस्तार के लिए प्रयास जारी हैं। ट्रामा सेंटर के साथ एनबीएसयू, पॉजीक्लीनिक, मिनी लैब संचालन की कवायद चल रही है। चिकित्सकों की कमी दूर करने के लिए वॉक इन इंटरव्यू शनिवार को प्रस्तावित है। जल्द ही उच्चाधिकारियों के निर्देशानुसार साक्षात्कार किए जाएंगे।