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Sawan 2025: भगवान शिव कहलाए बाबा त्रिवटीनाथ, 700 वर्ष पुराना है बरेली का यह शिव मंदिर

Mon, 28 Jul 2025 04:18 PM IST
मुकेश कुमार अमर उजाला ब्यूरो, बरेली
अमर उजाला ब्यूरो, बरेली Published by: मुकेश कुमार Updated Mon, 28 Jul 2025 04:18 PM IST
सार

बरेली के बाबा त्रिवटीनाथ मंदिर में तीन वट वृक्षों के बीच शिवलिंग प्रकट हुए थे। इसलिए मंदिर का नाम बाबा त्रिवटीनाथ पड़ा। सावन में यहां प्रतिदिन भक्तों की भीड़ उमड़ती है। 

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बाबा त्रिवटीनाथ मंदिर - फोटो : अमर उजाला

विस्तार

बरेली का प्राचीन बाबा त्रिवटीनाथ मंदिर लगभग छह सौ वर्ष पुराना है। यह देश-विदेश में रहने वाले श्रद्धालुओं की आस्था का केंद्र भी है। भक्तों का विश्वास है कि यहां सभी के मनोरथ पूर्ण होते हैं। सावन में हजारों भक्तों की भीड़ रही है। 
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त्रिवटीनाथ मंदिर का इतिहास 
सात सौ वर्ष पूर्व यहां घना जंगल हुआ करता था। आम आदमी यहां नहीं आते थे। यदा-कदा अपने पशुओं को लेकर चरवाहे यहां आ जाते थे। एक बार एक चरवाहा अपने पशु चराने आया और और थकान के कारण यहां स्थित वट वृक्ष के नीचे विश्राम करते हुए गहरी नींद में सो गया। उसके सपने में महादेव ने उसको दर्शन दिए और कहा कि उठ, मैं इसी वट वृक्ष के नीचे विराजमान हूं। 
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चरवाहे की नींद खुली तो उसे वहीं वट वृक्ष के नीचे विशाल शिवलिंग मिला। चरवाहे ने महादेव को नमन किया और शहर आकर लोगों को पूरी बात बताई। इसके बाद यहां दर्शन-पूजन के लिए श्रद्धालुओं के आने का सिलसिला शुरू हुआ, जो कालांतर में बढ़ता गया। लोगों की मनोकामनाएं पूर्ण होने से इस स्थल की मान्यता भी बढ़ती गई।
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विशेषता 
यहां तीन वट वृक्ष के मध्य में भगवान शंकर लिंग के रूप में विराजमान हैं। इसी के चलते इनका नाम भी बाबा त्रिवटीनाथ पड़ा। पुजारी पंडित रविंद्र शर्मा ने बताया कि बाबा का यह पावन स्वरूप शिवभक्तों के हृदय में अंकित है। आज यह धर्म स्थल शिवभक्तों की आस्था का प्रमुख केंद्र है।


भव्यता 
बाबा त्रिवटीनाथ मंदिर सेवा समिति इसका संचालन करती है। मीडिया प्रभारी संजीव अवतार अग्रवाल ने बताया कि परिसर में भव्य शिवालय, रामालय, नवग्रह मंदिर, बृहस्पतिदेव स्थान, नंदी वन, मनौती स्थल, यज्ञशाला आदि का निर्माण कराया गया है। बाहरी हिस्से में दो बड़े कथा स्थल भी हैं। पिछले वर्ष ही मंदिर के प्रवेश द्वार पर महादेव के दिव्य स्वरूप की स्थापना कराई गई है।

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