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बरेली-सितारगंज हाईवे: जमीन पर कब्जा न मिलने से अंडरपास का अटका
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बरेली। बरेली-सितारगंज हाईवे के पहले पैकेज में चार स्थानों पर जमीन का कब्जा न मिलने के चौड़ीकरण अटक गया है। इसमें रिठौरा के पास पांच महीने से अंडरपास का काम रुका हुआ है। ऐसे ही बरकापुर में पुलिया का काम रुक गया है। फरीदपुर गंगा उर्फ नवादा और लाड़पुर उस्मानपुर के पास भी काम रुका हुआ है।
हाईवे के पहले पैकेज में 32 किलोमीटर का मार्ग है। इसका 20 फीसदी चौड़ीकरण हो चुका है। चार स्थानों पर चौड़ीकरण रुक गया है। भारतीय राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण (एनएचएआई) के सदस्य एडमिन विशाल चौहान 25 फरवरी को जिले के दौरे पर आए थे। एनएचएआई के अधिकारियों ने उन्हें अवगत कराया तो उन्होंने स्थानीय अधिकारियों से मामले को सुलझाने का आग्रह किया था। अब तक उसका पत्राचार चल रहा है। एनएचएआई के स्थानीय अधिकारियों ने इस मामले में भू अध्याप्ति अधिकारी से मुलाकात की। परियोजना प्रबंधक की ओर से डीएम को पत्र भेजा गया है। इसके बाद अड़चन दूर करने के लिए मौके पर आकलन कराया गया है लेकिन अभी तक अड़चन बरकरार हैं।
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कहां क्या है अड़चन
रिठौरा: यहां करीब 25 भू-स्वामी ऐसे हैं, जिन्हें परिसंपत्तियों का मुआवजा मिल गया लेकिन जमीन का मुआवजा नहीं मिल सका। इसके चलते एनएचएआई को कब्जा नहीं मिल सका। करीब 400 मीटर का चौड़ीकरण अटका है।
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बरकापुर: एलाइनमेंट को लेकर संशय है। किसानों की तरफ से शिकायत आई है। किसानों का कहना है कि उनकी जितनी जमीन ली जा रही है, वह ज्यादा है जबकि मुआवजा कम मिला है।
फरीदपुर गंगा: पचास परिवार ऐसे हैं जो सार्वजनिक श्रेणी की जमीन पर कब्जा किए हैं। इसके बदले इन परिवारों को कहीं और स्थापित किया जाना है। अगर इन परिवारों के लिए मुआवजा तय हो जाए तो एनएचएआई इसका भुगतान करेगा और दूसरी जगह इन्हें विस्थापित किया जा सकेगा।
लाड़पुर उस्मानपुर: भू-स्वामियों के अंश का निर्धारण फंसा हुआ है। मुआवजा बंट नहीं पाया। भू-स्वामियों ने कब्जा नहीं दिया, जिससे चौड़ीकरण में बाधा बरकरार है।
ब्यूरो
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हाईवे के पहले पैकेज में 32 किलोमीटर का मार्ग है। इसका 20 फीसदी चौड़ीकरण हो चुका है। चार स्थानों पर चौड़ीकरण रुक गया है। भारतीय राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण (एनएचएआई) के सदस्य एडमिन विशाल चौहान 25 फरवरी को जिले के दौरे पर आए थे। एनएचएआई के अधिकारियों ने उन्हें अवगत कराया तो उन्होंने स्थानीय अधिकारियों से मामले को सुलझाने का आग्रह किया था। अब तक उसका पत्राचार चल रहा है। एनएचएआई के स्थानीय अधिकारियों ने इस मामले में भू अध्याप्ति अधिकारी से मुलाकात की। परियोजना प्रबंधक की ओर से डीएम को पत्र भेजा गया है। इसके बाद अड़चन दूर करने के लिए मौके पर आकलन कराया गया है लेकिन अभी तक अड़चन बरकरार हैं।
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कहां क्या है अड़चन
रिठौरा: यहां करीब 25 भू-स्वामी ऐसे हैं, जिन्हें परिसंपत्तियों का मुआवजा मिल गया लेकिन जमीन का मुआवजा नहीं मिल सका। इसके चलते एनएचएआई को कब्जा नहीं मिल सका। करीब 400 मीटर का चौड़ीकरण अटका है।
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बरकापुर: एलाइनमेंट को लेकर संशय है। किसानों की तरफ से शिकायत आई है। किसानों का कहना है कि उनकी जितनी जमीन ली जा रही है, वह ज्यादा है जबकि मुआवजा कम मिला है।
फरीदपुर गंगा: पचास परिवार ऐसे हैं जो सार्वजनिक श्रेणी की जमीन पर कब्जा किए हैं। इसके बदले इन परिवारों को कहीं और स्थापित किया जाना है। अगर इन परिवारों के लिए मुआवजा तय हो जाए तो एनएचएआई इसका भुगतान करेगा और दूसरी जगह इन्हें विस्थापित किया जा सकेगा।
लाड़पुर उस्मानपुर: भू-स्वामियों के अंश का निर्धारण फंसा हुआ है। मुआवजा बंट नहीं पाया। भू-स्वामियों ने कब्जा नहीं दिया, जिससे चौड़ीकरण में बाधा बरकरार है।
ब्यूरो