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Bareilly News: 34 साल बाद धरातल पर उतर सकेगी रिंग रोड परियोजना, भूमि अधिग्रहण की प्रक्रिया शुरू
Fri, 29 Nov 2024 10:42 AM IST
मुकेश कुमार
अतुल भारद्वाज, बरेली ब्यूरो
अतुल भारद्वाज, बरेली ब्यूरो
Published by: मुकेश कुमार
Updated Fri, 29 Nov 2024 10:42 AM IST
सार
Bareilly Ring Road News: बरेली की बहुप्रतीक्षित रिंग रोड परियोजना अब साकार होने जा रही है। डीपीआर को मंजूरी मिल गई है। इसके लिए भूमि अधिग्रहण और निर्माण की प्रक्रिया शुरू कर दी गई है।
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रिंग रोड परियोजना
- फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
करीब 34 साल पहले बरेली शहर को ट्रैफिक जाम से मुक्ति और बाहर से आने वाले बड़े वाहनों को अंदर से गुजरने की मजबूरी खत्म करने के लिए रिंग रोड परियोजना बनी, लेकिन यह मूर्त रूप नहीं ले सकी। मांग बढ़ी तो बाइपास के रूप में रामपुर, पीलीभीत, नैनीताल, शाहजहांपुर राष्ट्रीय राजमार्ग को जोड़ने के लिए अधूरे रिंग रोड का निर्माण कर दिया गया। अब एनएचएआई इस बहुप्रतीक्षित परियोजना को पूरा करेगा। इसके लिए जमीन के अधिग्रहण और निर्माण की प्रक्रिया शुरू कर दी है।
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रिंग रोड के निर्माण से जुड़ी अमर उजाला आर्काइव में मिली 18 मार्च 1993 की एक खबर ‘रिंगरोड का निर्माण बम्बई की निजी कंपनी करेगी’ में मौजूद जानकारी के मुताबिक 1990 के आसपास इस परियोजना पर काम शुरू हो गया था। करीब तीन साल का समय इस परियोजना पर काम शुरू कराने के लिए टेंडर प्रक्रिया को पूरा करने और बजट का इंतजाम करने में लग गया। इसके बाद इसका निर्माण शुरू हो सका।
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करीब 28 किमी लंबाई में आधा प्रोजेक्ट उस समय हो सका। अब अधूरा बचा 29 किमी का हिस्सा 34 साल के इंतजार के बाद पूरा होने की उम्मीद में है। ऐसा इसलिए है क्योंकि जमीन अधिग्रहण के लिए करीब 700 करोड़ रुपये के बजट को मंजूरी मिल गई है। जमीन अधिग्रहण के साथ ही टेंडर प्रक्रिया भी एनएचएआई शुरू करेगा, जिससे तेजी से निर्माण हो सके।
आवासीय योजनाएं होंगी विकसित
आर्काइव की खबर के मुताबिक काउंटर मैग्नेट सिटी योजना में इस रिंगरोड का निर्माण किया जाना था, जिससे एनसीआर में शामिल शहरों पर जनसंख्या दबाव को कम किया जा सके। इस रिंग रोड पर भविष्य की जरूरतों को देखते हुए औद्योगिक और आवासीय योजनाओं को भी विकसित किए जाने का विकल्प रखा गया। पूरा रिंग रोड नहीं बन पाने की वजह इस पूरी परियोजना के लिए फंड नहीं मिल पाना रहा।
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अधिकारियों ने फंड जुटाने के लिए हरसंभव प्रयास किए, लेकिन इस जरूरत को पूरा नहीं किया जा सका। करीब 42 करोड़ रुपये की जरूरत उस समय निर्माण के लिए बाइपास के लिए बताई गई। इस पर टोल लगाकर निर्माण की लागत निकालने का प्रस्ताव भी बना। हालांकि, सरकारी फंड से निर्माण हो जाने के बाद यहां टोल नहीं लगाया गया।
पहले दो लेन बाइपास की बनी योजना
बजट की कमी को देखते हुए इस बाईपास को पहले दो लेन बनाने की योजना भी बनी। इस पर विचार करते हुए राज्य सरकार के फंड से इसे बनाने की तैयारी थी। हालांकि, एनएचएआई के खर्च के लिए तैयार होने के बाद इस चार लेन बनाया गया। इस प्रोजेक्ट को पूरा होने के बाद भविष्य में चौड़ीकरण कर छह लेन तक बनाया जा सकता है।
आर्काइव की खबर के मुताबिक काउंटर मैग्नेट सिटी योजना में इस रिंगरोड का निर्माण किया जाना था, जिससे एनसीआर में शामिल शहरों पर जनसंख्या दबाव को कम किया जा सके। इस रिंग रोड पर भविष्य की जरूरतों को देखते हुए औद्योगिक और आवासीय योजनाओं को भी विकसित किए जाने का विकल्प रखा गया। पूरा रिंग रोड नहीं बन पाने की वजह इस पूरी परियोजना के लिए फंड नहीं मिल पाना रहा।
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अधिकारियों ने फंड जुटाने के लिए हरसंभव प्रयास किए, लेकिन इस जरूरत को पूरा नहीं किया जा सका। करीब 42 करोड़ रुपये की जरूरत उस समय निर्माण के लिए बाइपास के लिए बताई गई। इस पर टोल लगाकर निर्माण की लागत निकालने का प्रस्ताव भी बना। हालांकि, सरकारी फंड से निर्माण हो जाने के बाद यहां टोल नहीं लगाया गया।
पहले दो लेन बाइपास की बनी योजना
बजट की कमी को देखते हुए इस बाईपास को पहले दो लेन बनाने की योजना भी बनी। इस पर विचार करते हुए राज्य सरकार के फंड से इसे बनाने की तैयारी थी। हालांकि, एनएचएआई के खर्च के लिए तैयार होने के बाद इस चार लेन बनाया गया। इस प्रोजेक्ट को पूरा होने के बाद भविष्य में चौड़ीकरण कर छह लेन तक बनाया जा सकता है।