International Dance Day: अंतरराष्ट्रीय कलाकार नलिनी-कमलिनी के लिए नृत्य का तीर्थ है बरेली
भारतीय शास्त्रीय नृत्य के क्षेत्र में अपने प्रदर्शन से दर्शकों का मनमोहने वाली जोड़ी नलिनी और कमलिनी अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भी एक बड़ा नाम हैं। वर्ष 2022 में उनको इस क्षेत्र में पद्मश्री से सम्मानित किया गया था।
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बरेली के अस्थाना परिवार से ताल्लुक रखने वाली अंतरराष्ट्रीय कलाकार नलिनी व कमलिनी के लिए बरेली शहर बेहद खास है। वह कहती हैं कि जहां प्रसिद्ध गुरु जितेंद्र महाराज ने नृत्य साधना की, वह शहर नृत्य की दुनिया में तीर्थ से कम नहीं है। बदलते दौर के साथ नृत्य में आधुनिकता जरूर आई है, मगर शहर के लिए भाव वैसा ही है।
भारतीय शास्त्रीय नृत्य के क्षेत्र में अपने प्रदर्शन से दर्शकों का मनमोहने वाली जोड़ी नलिनी और कमलिनी अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भी एक बड़ा नाम हैं। वर्ष 2022 में उनको इस क्षेत्र में पद्मश्री से सम्मानित किया गया था। अंतरराष्ट्रीय नृत्य दिवस पर उन्होंने नृत्य की साधना, बरेली शहर से लगाव व जितेंद्र महाराज के बारे में चर्चा की।
आगरा में पैदा हुईं नलिनी और कमलिनी ने बताया कि उनके पिता का घर बरेली के कूंचा सीताराम में स्थित है। वह अक्सर बरेली आती हैं और यहां के त्रिवटीनाथ मंदिर व बड़ा बाजार का भ्रमण करती हैं। उन्होंने बताया कि अंतरराष्ट्रीय स्तर पर शहर को झुमके, सुरमे के साथ नृत्य और सुंदरता के लिए भी जाना जाता है।
आधुनिकता बढ़ने से दूर हो गए चेहरे के भाव
कथक नृत्यांगना नलिनी- कमलिनी ने बताया कि पहले नृत्य से ज्यादा चेहरे के भाव प्रस्तुति को रंग देते थे। छोटा सा मंच होता था और चुनिंदा लोग, लेकिन समय के साथ मंच बड़े होते चले गए। मंच पर माइक, स्पीकर, कैमरों का इस्तेमाल बढ़ गया और नृत्य मनोरंजन का एक साधन बन गया। अब दूर बैठे दर्शक को चेहरे के भाव दिखें भी तो कैसे, और बिना भाव के नृत्य की गहराई नहीं समझी जा सकती।समय कम है, अब नहीं होती पहले वाली साधना
युवा पीढ़ी के लिए उन्होंने कहा कि नृत्य एक साधना है, जो इसको पूरी तरह से अपना ले वही इसको निखार सकता है। पहले के जमाने में रिकॉर्डिंग की सुविधा नहीं थी। एक-एक प्रस्तुति की तैयारी में कई दिन लगते थे और जब नृत्य पेश किया जाता था तो एक से डेढ़ घंटे कोई नहीं रुकता था। अब प्रस्तुति 15 मिनट में सिमटकर रह गई है। पहले सोलो प्रस्तुतियां कार्यक्रम की जान होती थीं। अब ग्रुप को महत्व दिया जाता है।
दिल्ली में हुई थी गुरु जितेंद्र महाराज से मुलाकात
विश्व प्रसिद्ध कथक गुरु जितेंद्र महाराज बरेली की शान थे। उन्होंने करीब 77 वर्ष तक नृत्य सिखाया। बरेली में वह त्रिवटीनाथ मंदिर में नृत्य साधना करते थे। इस साल फरवरी में उनका निधन हुआ। उनकी शिष्य नलिनी-कमलिनी ने बताया कि उनकी मुलाकात जितेंद्र महाराज से दिल्ली में हुई। कई साल वहां रहकर उन्होंने महाराज से नृत्य सीखा और विश्व भर में नाम कमाया।