बरेली: कोरोना से मुक्त हुआ पूरा परिवार, बंदिशों के साथ सब घर में ही रहेंगे
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बरेली फिलहाल कोरोना से पूरी तरह मुक्त हो गया है। नोएडा की सीजफायर कंपनी में काम करने वाले युवक के परिवार के बाकी तीन सदस्यों की रिपोर्ट भी शुक्रवार शाम आठ बजे आईवीआरआई ने जारी कर दी जो निगेटिव है। इसके बाद अब जिले में एक भी कोरोना संक्रमित मरीज नहीं रहा। रिपोर्ट मिलते ही कोरोना वार्ड में भर्ती इन लोगों की खुशी का ठिकाना नहीं रहा। देर शाम उन्हें घर भेज दिया गया।
जिले में पहला कोरोना संक्रमित मरीज 29 मार्च को मिला था जिसके बाद उसके परिवार के पांच सदस्यों को भी क्वारंटीन करा दिया गया था। 31 मार्च को सभी की पॉजिटिव रिपोर्ट आने पर उन्हें जिला अस्पताल के आइसोलेशन वार्ड में शिफ्ट कर दिया गया। सीजफायर में काम करने वाले कोरोना संक्रमित और उसकी पत्नी की लगातार निगेटिव रिपोर्ट आने के बाद पिछले दिनों उन्हें होम क्वारंटीन के निर्देश देते हुए घर भेज दिया गया। बाकी चार सदस्यों का सैंपल फिर जांच के लिए भेजा गया था।
बृहस्पतिवार को आई रिपोर्ट में बहन का सैंपल निगेटिव मिलने पर शुक्रवार दोपहर उसे भी घर भेज दिया गया। इसके बाद सुबह युवक की मां, पिता और भाई का सैंपल आईवीआरआई भेजा गया था। रात आठ बजे आई रिपोर्ट में ये भी निगेटिव पाए गए। लगातार दो निगेटिव रिपोर्ट के बाद सीएमओ डॉ. विनीत शुक्ला, सीएमएस डॉ. टीएस आर्या, नोडल अफसर डॉ. रंजन गौतम, एमएस डॉ. एके गौतम के साथ स्टाफ ने फूलमाला पहनाकर उन्हें भी घर के लिए विदा कर दिया। यह हिदायत भी दी कि घर पर वे एक-दूसरे के संपर्क में न आएं और 14 दिन तक आपस में दूरी बनाकर रखें।
एक-एक दिन बेहद तनाव में गुजरा पर देवदूत साबित हुए डॉक्टर और स्टाफ
कोरोना संक्रमित रहे परिवार ने फोन पर अमर उजाला से बातचीत करते हुए कहा कि बेटे के बाद पूरे परिवार की रिपोर्ट पॉजिटिव आने के बाद उन्हें गहरी निराशा ने घेर लिया था। लगा था कि वे अब कभी घर नहीं लौट पाएंगे। शुरू में जिला अस्पताल में मौजूद स्टाफ भी उनसे कतरा रहा था। 31 मार्च की रात अस्पताल में पूरा परिवार लाउडस्पीकर पर कोरोना अलर्ट सुनकर घबरा गया था। उन्होंने डॉ. वागीश वैश्य को कॉल कर बुलाया तब लाउडस्पीकर बंद हुआ। अगले दिन पूरा स्टाफ बदल दिया गया।
नए स्टाफ ने काफी सकारात्मक रवैया दिखाया। उनमें इससे उम्मीद जगी कि हिम्मत हारने से कुछ नहीं होगा। उन्होंने खुद को समझाया कि जो हुआ वह ईश्वर की देन है और जो होगा वह भी ईश्वर की कृपा से होगा। एक-एक दिन भारी तनाव में गुजरा। इस बीच वार्ड में एक-दूसरे के पास जाने तक की मनाही थी। किसी का कोई सामान भी नहीं छू सकते थे। खाना बाहर रखने पर उसे अंदर लेकर दरवाजा बंद कर देते थे ताकि कोई स्टाफ उनसे संक्रमित न हो। अब जब पूरा परिवार ठीक होकर घर आ गया है तो एक-दूसरे के गले लगने का मन है लेकिन फिर भी 14 दिन इंतजार करेंगे। जिला अस्पताल के डॉक्टर और स्टाफ ने देवदूत की तरह नई जिंदगी दे दी।