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बरेली कॉलेज प्राचार्य विवाद- विश्वविद्यालय के नियम और बायलॉज के आधार पर कार्रवाई करेंगे कमिश्नर
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बरेली। बरेली कॉलेज में प्राचार्य विवाद को लेकर कमिश्नर/बोर्ड ऑफ कंट्रोल के अध्यक्ष रणवीर प्रसाद ने पूर्व डीएम वीरेंद्र कुमार सिंह की रिपोर्ट का अध्ययन शुरू कर दिया है। उनका कहना है कि जल्द ही विश्वविद्यालय के नियम और कॉलेज के बायलॉज के अनुसार इस मामले में निर्णय लिया जाएगा। ऐसे में मौजूदा प्राचार्य डॉ. अनुराग मोहन की मुश्किलें बढ़ सकती हैं क्योंकि कॉलेज के बायलॉज में प्राचार्य की नियुक्ति का अधिकार मैनेजमेंट कमेटी को नहीं बल्कि बोर्ड ऑफ कंट्रोल को है।
बरेली कॉलेज में प्राचार्य पद पर डॉ. अनुराग मोहन की ताजपोशी के बाद से ही उठापटक मची हुई है। डॉ. पूर्णिमा अनिल ने खुद को उनसे वरिष्ठ बताते हुए प्राचार्य पद पर अपना दावा प्रस्तुत किया है। इस पर तत्कालीन डीएम वीरेंद्र कुमार ने क्षेत्रीय उच्च शिक्षा अधिकारी डॉ. राजेश प्रकाश से जांच कराने के बाद अपनी रिपोर्ट कमिश्नर को सौंप दी है। इसमें उन्होंने प्राचार्य की नियुक्ति को नियमविरुद्ध ठहराया है। उनका कहना है कि इसमें न तो विधिक प्रक्रिया का पालन किया गया है और न ही संबंधित अधिकारियों को जानकारी दी गई। उनकी रिपोर्ट मिलने के बाद कमिश्नर रणवीर प्रसाद ने इसका अध्ययन शुरू कर दिया है। उन्होंने जल्द ही निर्णय लेने की बात कही है।
वर्ष 1988 के बायलॉज से बढ़ेंगी डॉ. अनुराग मोहन की मुश्किलें
कमिश्नर रणवीर प्रसाद ने इस मामले में विश्वविद्यालय की नियमावली और कॉलेज के बायलॉज के आधार पर निर्णय लेने की बात कही है। ऐसे में मौजूदा प्राचार्य डॉ. अनुराग मोहन की मुश्किलें बढ़ना तय है क्योंकि बरेली कॉलेज में बायलॉज के बिंदु संख्या नौ के पैरा नंबर छह में प्राचार्य की नियुक्ति और उन्हें पदच्युत करने का अधिकार सिर्फ बोर्ड ऑफ कंट्रोल को दिया गया है। हालांकि कॉलेज प्रबंधन यह कहता आ रहा है वर्ष 2002 और 2003 में संशोधन किए गए थे लेकिन सात अप्रैल, 2004 को तत्कालीन कुलपति प्रोफेसर जाहिद हुसैन जैदी ने इन संशोधनों को अमान्य कर दिया था। साथ ही स्पष्ट कर दिया था कि कॉलेज में 1988 का बायलॉज ही लागू होगा। इसी आधार पर पिछले दिनों प्रोफेसर एके जैतली ने बरेली कॉलेज की मैनेजमेंट कमेटी को अवैध करार दिया था।
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बरेली कॉलेज में प्राचार्य पद पर डॉ. अनुराग मोहन की ताजपोशी के बाद से ही उठापटक मची हुई है। डॉ. पूर्णिमा अनिल ने खुद को उनसे वरिष्ठ बताते हुए प्राचार्य पद पर अपना दावा प्रस्तुत किया है। इस पर तत्कालीन डीएम वीरेंद्र कुमार ने क्षेत्रीय उच्च शिक्षा अधिकारी डॉ. राजेश प्रकाश से जांच कराने के बाद अपनी रिपोर्ट कमिश्नर को सौंप दी है। इसमें उन्होंने प्राचार्य की नियुक्ति को नियमविरुद्ध ठहराया है। उनका कहना है कि इसमें न तो विधिक प्रक्रिया का पालन किया गया है और न ही संबंधित अधिकारियों को जानकारी दी गई। उनकी रिपोर्ट मिलने के बाद कमिश्नर रणवीर प्रसाद ने इसका अध्ययन शुरू कर दिया है। उन्होंने जल्द ही निर्णय लेने की बात कही है।
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वर्ष 1988 के बायलॉज से बढ़ेंगी डॉ. अनुराग मोहन की मुश्किलें
कमिश्नर रणवीर प्रसाद ने इस मामले में विश्वविद्यालय की नियमावली और कॉलेज के बायलॉज के आधार पर निर्णय लेने की बात कही है। ऐसे में मौजूदा प्राचार्य डॉ. अनुराग मोहन की मुश्किलें बढ़ना तय है क्योंकि बरेली कॉलेज में बायलॉज के बिंदु संख्या नौ के पैरा नंबर छह में प्राचार्य की नियुक्ति और उन्हें पदच्युत करने का अधिकार सिर्फ बोर्ड ऑफ कंट्रोल को दिया गया है। हालांकि कॉलेज प्रबंधन यह कहता आ रहा है वर्ष 2002 और 2003 में संशोधन किए गए थे लेकिन सात अप्रैल, 2004 को तत्कालीन कुलपति प्रोफेसर जाहिद हुसैन जैदी ने इन संशोधनों को अमान्य कर दिया था। साथ ही स्पष्ट कर दिया था कि कॉलेज में 1988 का बायलॉज ही लागू होगा। इसी आधार पर पिछले दिनों प्रोफेसर एके जैतली ने बरेली कॉलेज की मैनेजमेंट कमेटी को अवैध करार दिया था।
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