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बैंक की ऋण प्रक्रिया जटिल, सूदखोर झटपट दे देते रुपये
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रुपये (प्रतीकात्मक तस्वीर)
- फोटो : pixabay
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कागजी कार्रवाई पूरी होने में लगता है समय तो सूदखोर के चंगुल में फंस जाते हैं लोग
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बरेली। बैंक की ऋण प्रक्रिया काफी जटिल है। दस्तावेज बनवाने और गारंटी लेने वाले की जरूरत होने के चलते लोग आसानी से लोन नहीं ले पाते हैं। अगर इन सब चीजों की व्यवस्था हो भी जाती है तो उसमें कई दिन लगते हैं। ऐसे में जरूरत के वक्त लोग बैंक न जाकर सूदखोर से रुपये लेकर उसके चंगुल में फंस जाते हैं।
किसी भी बैंक में ऋण लेने की प्रक्रिया आसान नहीं है। अगर किसान क्रेडिट कार्ड लेने की ही बात करें तो आवेदन के साथ ही किसान को जमीन के दस्तावेज, बैंक की डिटेज, जमीन में मालिकाना हक, खसरा-खतौनी के अलावा पूरी फाइल बैंक के अधिकृत वकील के जरिये तैयार करानी पड़ती है। इसके बाद बैंक का सर्वेयर जमीन का मौके पर जाकर निरीक्षण करता है और फिर लोन स्वीकृत होने के बाद रुपये खाते में आते हैं। कितना भी जल्दी हो, इस प्रक्रिया में करीब 15 दिन का समय लग ही जाता है। ऐसे में अगर किसी व्यक्ति को तत्काल ऋण की जरूरत है तो उसे सूदखोर के पास ही जाना पड़ता है। इसके बाद वह सूदखोर के चंगुल में ऐसा फंसता है कि बाहर निकलना मुश्किल हो जाता है।
किसी भी बैंक में ऋण लेने की प्रक्रिया आसान नहीं है। अगर किसान क्रेडिट कार्ड लेने की ही बात करें तो आवेदन के साथ ही किसान को जमीन के दस्तावेज, बैंक की डिटेज, जमीन में मालिकाना हक, खसरा-खतौनी के अलावा पूरी फाइल बैंक के अधिकृत वकील के जरिये तैयार करानी पड़ती है। इसके बाद बैंक का सर्वेयर जमीन का मौके पर जाकर निरीक्षण करता है और फिर लोन स्वीकृत होने के बाद रुपये खाते में आते हैं। कितना भी जल्दी हो, इस प्रक्रिया में करीब 15 दिन का समय लग ही जाता है। ऐसे में अगर किसी व्यक्ति को तत्काल ऋण की जरूरत है तो उसे सूदखोर के पास ही जाना पड़ता है। इसके बाद वह सूदखोर के चंगुल में ऐसा फंसता है कि बाहर निकलना मुश्किल हो जाता है।
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बैंक की ऋण प्रक्रिया इतनी जटिल है कि आम आदमी को ऋण प्राप्त करने में कई दिन लग जाते हैं। यही वजह है कि आम आदमी लोन लेने के लिए बैंक के बजाय सूदखोर से ब्याज पर रुपये ले लेता है। - उमंग रावत, अधिवक्ता
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शहर के तमाम छोटे व्यापारी सूदखोरों के चंगुल में फंसे हैं। बैंक की ऋण प्रक्रिया कठिन होती और छोटे-छोटे व्यापारी उन्हें पूरा नहीं कर पाते हैं। यही वजह है कि वे इनसे रुपये लेकर अपना काम चलाते हैं । - राजेंद्र गुप्ता, व्यापारी नेता
नगर निगम के तमाम सफाई कर्मचारी सूदखोरों के जाल में फंसे हुए हैं। बैंक लोन देने में काफी समय लगा देता है, इसके कारण जरूरत पड़ने पर वे लोग सूदखोर से रुपये लेकर अपना काम चलाते हैं। - राजेश कुमार, सफाई कर्मचारी नेता
बैंक में ऋण देने की प्रक्रिया सरकार के मानकों के अनुरूप तय की जाती है। हर तरह के लोन के लिए अलग व्यवस्था है। बिना कागजी प्रक्रिया पूरी किए किसी को भी लोन नहीं दिया जा सकता है। - पीके माहेश्वरी, महामंत्री, यूनियन बैंक स्टाफ एसोसिएशन