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श्री गुरु गोविंद सिंह के साहबजादों की शहादत को किया नमन
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बाल खालसा मार्च निकालते बच्चे। - अमर उजाला
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बरेली। दशमेश पिता श्री गुरु गोविंद सिंह जी महाराज के चार साहबजादों की शहादत को नमन करने के लिए शहर में ‘बाल खालसा मार्च’ निकाला गया। यह लोगों के बीच आकर्षण का केंद्र रहा। इसे साहबजादों की लासानी शहादत को मुख्य रखते हुए माता भाग कौर ग्रुप की ओर से निकाला गया। रास्ते में मार्च का जगह-जगह स्वागत किया गया।
मार्च जनकपुरी गुरुद्वारे से आरंभ हुआ, जो डीडीपुरम, मॉडल टाउन, पीला क्वार्टर गुरुद्वारा होते हुए शाम को गुरु गोविंद सिंह नगर मॉडल टाउन स्थित गुरुद्वारा श्री गुरु सिंह सभा पर समाप्त हुआ। इसमें सबसे आगे छोटा सा बालक निशान साहिब लेकर चल रहा था। रणजीत नगाड़ा भी खालसाई वेशभूषा शामिल था। बाल खालसा पारंपरिक गतका के नजारों से मार्च की शान बढ़ा रहे थे। छोटे-छोटे बच्चे पंज प्यारे की भूमिका में नजर आए।
नानकमत्ता साहिब से आई फूलों से सजी गाड़ी में श्री गुरु ग्रंथ साहिब विराजमन थे। इससे आगे सिख संगत सफाई और जल छिड़ककर फूलों की बारिश करती चल रही थी। गाड़ी के पीछे गुरमुखी लिपि को प्रोत्साहित करते हुए 35 अक्षरों को बालक बालिकाएं हाथ में उठाए चल रहे थे। सारागढ़ी युद्ध को दर्शाती बालकों की फौज आकर्षण का केंद्र रही। मार्च में कोरोना काल के दौरान सिखों की ओर से की गईं सेवाओं की झांकी के अलावा साहबजादों की शहादत संबंधी झांकियां भी शामिल थीं। आखिर में संगत शबद कीर्तन हरिजस गायन करते चल रही थी। आयोजन में राजेंदर सिंह, मालिक सिंह कालड़ा, रंजीत कौर, बलविंदर कौर, कमलजीत कौर, परमजीत कौर, सतनाम कौर और इंद्र्रप्रीत आदि का सहयोग रहा।
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मार्च जनकपुरी गुरुद्वारे से आरंभ हुआ, जो डीडीपुरम, मॉडल टाउन, पीला क्वार्टर गुरुद्वारा होते हुए शाम को गुरु गोविंद सिंह नगर मॉडल टाउन स्थित गुरुद्वारा श्री गुरु सिंह सभा पर समाप्त हुआ। इसमें सबसे आगे छोटा सा बालक निशान साहिब लेकर चल रहा था। रणजीत नगाड़ा भी खालसाई वेशभूषा शामिल था। बाल खालसा पारंपरिक गतका के नजारों से मार्च की शान बढ़ा रहे थे। छोटे-छोटे बच्चे पंज प्यारे की भूमिका में नजर आए।
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नानकमत्ता साहिब से आई फूलों से सजी गाड़ी में श्री गुरु ग्रंथ साहिब विराजमन थे। इससे आगे सिख संगत सफाई और जल छिड़ककर फूलों की बारिश करती चल रही थी। गाड़ी के पीछे गुरमुखी लिपि को प्रोत्साहित करते हुए 35 अक्षरों को बालक बालिकाएं हाथ में उठाए चल रहे थे। सारागढ़ी युद्ध को दर्शाती बालकों की फौज आकर्षण का केंद्र रही। मार्च में कोरोना काल के दौरान सिखों की ओर से की गईं सेवाओं की झांकी के अलावा साहबजादों की शहादत संबंधी झांकियां भी शामिल थीं। आखिर में संगत शबद कीर्तन हरिजस गायन करते चल रही थी। आयोजन में राजेंदर सिंह, मालिक सिंह कालड़ा, रंजीत कौर, बलविंदर कौर, कमलजीत कौर, परमजीत कौर, सतनाम कौर और इंद्र्रप्रीत आदि का सहयोग रहा।
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