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सेंट्रल जेल में बदायूं के कैदी ने फांसी लगाकर जान दी
बरेली।
Updated Tue, 03 Oct 2017 02:01 AM IST
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सेंट्रल जेल में आजीवन कारावास की सजा काट रहे कैदी कल्याण यादव (45) की लाश सोमवार दोपहर गमछे के सहारे जामुन के पेड़ से लटकी मिली। बंदी रक्षक की सूचना पर डीआईजी जेल शशि श्रीवास्तव, इज्जतनगर थाने की पुलिस सहित कई प्रशासनिक अधिकारी जेल पहुंचे। ढाई घंटे की जद्दोजहद के बाद फायर ब्रिगेड की मदद से करीब पचास फिट ऊपर लटका शव नीचे उतारा जा सका। दरोगा संजीव कुमार ने पंचनामा भरकर शव को पोस्टमार्टम के लिए भेजा। जेल प्रशासन ने कल्याण के अवसादग्रस्त होने की वजह से आत्महत्या करने की बात कही है।
बदायूं के कुंवरगांव कस्बा निवासी कल्याण ने पांच सितंबर, 2005 को अपनी भाभी ओमवती और तीन साल की भतीजी क्रांति की हत्या कर दी थी। क्रांति का शव बरामद नहीं हुआ था। उसके सिर्फ बाल मिले थे। कोर्ट ने 14 जुलाई, 2009 को कल्याण को आजीवन कारावास की सजा सुनाई थी। जेल अधीक्षक केदारनाथ के मुताबिक 25 मार्च, 2012 को बदायूं से कल्याण को सेंट्रल जेल में शिफ्ट किया गया था। उसे सर्किल चार की बैरक नंबर चार में रखा गया था। जेल अधीक्षक केदार नाथ ने करीब 1.30 बजे अधिकारियों को जामुन के पेड़ पर कैदी की लाश लटकी होने की सूचना दी। कुछ ही देर में जेल, प्रशासन और पुलिस के कई अधिकारी मौके पर पहुंच गए। इज्जतनगर थाना इंस्पेक्टर नरेश त्यागी ने फायर ब्रिगेड की मदद से लाश को नीचे उतारा। जेल प्रशासन के मुताबिक कोई सुसाइड नोट नहीं मिला। कल्याण के परिवार को सूचना देने के लिए सिपाही को भेजा गया है।
कैदी पेड़ चढ़ गया और किसी ने देखा नहीं
सर्किल नंबर चार में ड्यूटी पर तैनात प्रधान बंदी रक्षक संजीव तिवारी को जेल अधीक्षक ने निलंबित कर दिया है। डीआईजी ने इस पर नाराजगी जताई थी कि एक कैदी 50 फिट ऊंचे पेड़ पर चढ़ता रहा और किसी बंदी रक्षक की निगाह उस पर नहीं पड़ी। इससे ज्यादा लापरवाही और को सकती है।
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कैदी ने पेड़ पर लटककर खुदकुशी की है। शव को पोस्टमार्टम के बाद परिवार के सुपुर्द किया जाएगा। घरवालों को सूचना भेज दी गई है। प्रधान बंदी रक्षक की लापरवाही मानते हुए उसे निलंबित किया गया है।
- शशि श्रीवास्तव, डीआईजी जेल
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बदायूं के कुंवरगांव कस्बा निवासी कल्याण ने पांच सितंबर, 2005 को अपनी भाभी ओमवती और तीन साल की भतीजी क्रांति की हत्या कर दी थी। क्रांति का शव बरामद नहीं हुआ था। उसके सिर्फ बाल मिले थे। कोर्ट ने 14 जुलाई, 2009 को कल्याण को आजीवन कारावास की सजा सुनाई थी। जेल अधीक्षक केदारनाथ के मुताबिक 25 मार्च, 2012 को बदायूं से कल्याण को सेंट्रल जेल में शिफ्ट किया गया था। उसे सर्किल चार की बैरक नंबर चार में रखा गया था। जेल अधीक्षक केदार नाथ ने करीब 1.30 बजे अधिकारियों को जामुन के पेड़ पर कैदी की लाश लटकी होने की सूचना दी। कुछ ही देर में जेल, प्रशासन और पुलिस के कई अधिकारी मौके पर पहुंच गए। इज्जतनगर थाना इंस्पेक्टर नरेश त्यागी ने फायर ब्रिगेड की मदद से लाश को नीचे उतारा। जेल प्रशासन के मुताबिक कोई सुसाइड नोट नहीं मिला। कल्याण के परिवार को सूचना देने के लिए सिपाही को भेजा गया है।
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कैदी पेड़ चढ़ गया और किसी ने देखा नहीं
सर्किल नंबर चार में ड्यूटी पर तैनात प्रधान बंदी रक्षक संजीव तिवारी को जेल अधीक्षक ने निलंबित कर दिया है। डीआईजी ने इस पर नाराजगी जताई थी कि एक कैदी 50 फिट ऊंचे पेड़ पर चढ़ता रहा और किसी बंदी रक्षक की निगाह उस पर नहीं पड़ी। इससे ज्यादा लापरवाही और को सकती है।
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कैदी ने पेड़ पर लटककर खुदकुशी की है। शव को पोस्टमार्टम के बाद परिवार के सुपुर्द किया जाएगा। घरवालों को सूचना भेज दी गई है। प्रधान बंदी रक्षक की लापरवाही मानते हुए उसे निलंबित किया गया है।
- शशि श्रीवास्तव, डीआईजी जेल