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बीएसएल-2 लैब की जांच में भी पिछड़ा बरेली

Thu, 03 Sep 2020 01:55 AM IST
Bareily Bureau बरेली ब्यूरो
Updated Thu, 03 Sep 2020 01:55 AM IST
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Backward Bareilly also in the investigation of BSL-2 Lab
corona virus - फोटो : sociol media

कोरोना सैंपल की जांच के लिए शासन ने खोली थी बीएसएल-2 लैब

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बरेली। सैंपलिंग की संख्या बढ़ने के साथ ही जिला अस्पताल में चल रही बीएसएल-2 लैब जांच करने में पिछड़ गई है। आठ मंडल मुख्यालयों पर स्थित जिला अस्पतालों में खोली गईं इन लैब में बरेली की लैब जांच के मामले में चौथे स्थान पर है। अलीगढ़ की लैब पहले स्थान पर रही है। सैंपलिंग की जांच कम होने पर शासन ने स्वास्थ्य विभाग को जांच बढ़ाने के निर्देश दिए हैं।
मुख्यमंत्री योगी आदित्य नाथ ने जिला अस्पताल में बायो सेफ्टी लेवल-2 (बीएसएल-2) लैब की शुरूआत की थी। इन लैब में आरटीपीसीआर जांच होती हैं। अलीगढ़ के अतिरिक्त एसएसपीजी अस्पताल वाराणसी, डिवीजनल अस्पताल गोंडा, डिवीजनल अस्पताल मुरादाबाद, डिवीजनल अस्पताल मिर्जापुर, डिवीजनल अस्पताल बरेली, बलरामपुर अस्पताल लखनऊ और एमएमजी संयुक्त अस्पताल गाजियाबाद में बायो सेफ्टी लैब-2 की शुरूआत हुई थी। 29 अगस्त तक प्रदेश की इन आठ लैबों में बरेली की लैब चौथे स्थान पर है। अलीगढ़ अब तक 3136 जांचें करके पहले स्थान है। लखनऊ में 3083, वाराणसी में 2184, बरेली में 2046, मिर्जापुर में 1451, गोंडा में 1278, मुरादाबाद में 1269 और गाजियाबाद में 1015 जांचें हुई हैं।
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दावा: जहां हो चुका सैनिटाइजेशन वहां मलेरिया का प्रकोप रहेगा कम

बरेली। कोरोना संक्रमण रोकने के लिए किया जा रहा सैनिटाइजेशन मलेरिया की रोकथाम में भी कारगर रहेगा। इससे मच्छरों का लार्वा भी नष्ट हो जाता है। जिन इलाकों में सैनिटाइजेशन किया जा रहा है, वहां मच्छरों का प्रकोप कम होने से मलेरिया के पांव पसारने की गुंजाइश न के बराबर है। सीएमओ डॉ. विनीत शुक्ल के मुताबिक, जनवरी से अगस्त तक 1312 वाईवैक्स मलेरिया के पीड़ित मिले हैं। वहीं, फैल्सीपेरम मलेरिया के महज 60 संक्रमित मिले हैं। ये बीते वर्षों की तुलना में आधे से भी कम है। आशंका जताई कि वाईवैक्स मलेरिया से पीड़ितों की तादाद अधिक होने की वजह है कि इसमें ज्यादातर फॉलोअप मरीज हैं, जिन्होंने दवा का कोर्स पूरा नहीं किया होगा। बताया कि सैनिटाइजेशन के लिए प्रयोग किए जाने वाले हाइपो सोडियम क्लोराइट के घोल से मच्छरों का लार्वा खत्म हो जाता है, इसलिए जिन इलाकों में सैनिटाइजेशन कराया जाएगा, वहां फॉगिंग कराने की जरूरत नहीं होगी।
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