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याद हैं वो दिन- दस दिन नहीं मिला था काम भूख से हो गया था बुरा हाल
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बरेली। 70 साल के हो चुके याकूब अली को आज भी 25 साल पुराना वो दौर नहीं भूला जब रामजन्मभूमि आंदोलन अपने चरम पर था। कारसेवकों के जत्थे देश भर से अयोध्या रवाना हो रहे थे। हर तरफ जुनून का माहौल था। जिधर देखो लोग आशंकाओं में घिरे हुए थे। चक महमूद में मजदूरी करके परिवार का पेट भरने वाले याकूब अली का परिवार भी डरा हुआ था। इसी बीच अयोध्या में कारसेवकों पर गोलियां चलीं और फिर विवादित ढांचा ढहा दिया गया। उसी दौर में एक वक्त ऐसा भी आया जब याकूब अली को दस दिनों तक मजदूरी नहीं मिली। याकूब अली बताते हैं कि घर में सबके भूखे मरने की नौबत आ गई। बाहर निकलने में भी डर था, कहीं कुछ हो न जाए। इस वजह से काम ढूंढने भी नहीं निकलते थे। आज इस मामले में फैसला आ गया और उलझे मसले का हल निकल आया तो यह सुकून महसूस कर रहे हैं कि अब वो हालात नहीं दोहराए जाएंगे और अमन रहेगा। याकूब अली ने कहा कि किसी की जीत हुई या हार, यह तो नहीं कह सकते लेकिन मामला निपट गया है, बस यही सबसे अच्छी बात है।
सुकून है कि नफरत फैलाने वाला मसला निपट गया
अयोध्या का विवाद जब पूरे देश की फिजा पर छाया हुआ था, ठीक उसी वक्त रोहली टोला में रहने वाले हाजी शहजाद मलिक ने रबर फैक्ट्री में नई-नई नौकरी शुरू की थी। शहजाद मलिक उन दिनों को याद करते हुए बताते हैं कि हालात ने देखते-देखते ऐसा पलटा खाया कि हर तरफ माहौल बदल गया। आपस का भाईचारा कम हो गया। दिन रात साथ में रहने वाले लोगों ने भी एक दूसरे को शक की नजर से देखना शुरू कर दिया था। हंसी-मजाक करने में भी डर लगता था कि कौन किस बात का बुरा मान जाए। वाकई वह बहुत बुरा दौर था। आज जब यह सुना कि मामला तय हो गया है तो दिल को सुकून हुआ कि चलो अब तनाव खत्म हुआ। हाजी शहजाद मलिक कहते हैं कि सियासी लोगों ने इस मसले को हल नहीं होने दिया वर्ना शायद मुल्क में इतने समय तक नफरत का माहौल नहीं खिंचता। वह कहते हैं कि यह मसला अगर आपसी रजामंदी से हल होता तो और भी अच्छी बात होती।
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सुकून है कि नफरत फैलाने वाला मसला निपट गया
अयोध्या का विवाद जब पूरे देश की फिजा पर छाया हुआ था, ठीक उसी वक्त रोहली टोला में रहने वाले हाजी शहजाद मलिक ने रबर फैक्ट्री में नई-नई नौकरी शुरू की थी। शहजाद मलिक उन दिनों को याद करते हुए बताते हैं कि हालात ने देखते-देखते ऐसा पलटा खाया कि हर तरफ माहौल बदल गया। आपस का भाईचारा कम हो गया। दिन रात साथ में रहने वाले लोगों ने भी एक दूसरे को शक की नजर से देखना शुरू कर दिया था। हंसी-मजाक करने में भी डर लगता था कि कौन किस बात का बुरा मान जाए। वाकई वह बहुत बुरा दौर था। आज जब यह सुना कि मामला तय हो गया है तो दिल को सुकून हुआ कि चलो अब तनाव खत्म हुआ। हाजी शहजाद मलिक कहते हैं कि सियासी लोगों ने इस मसले को हल नहीं होने दिया वर्ना शायद मुल्क में इतने समय तक नफरत का माहौल नहीं खिंचता। वह कहते हैं कि यह मसला अगर आपसी रजामंदी से हल होता तो और भी अच्छी बात होती।
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