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Bareilly News: बदहाल एस्ट्रो टर्फ...कैसे चक दे शहर
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बरेली। कैंट स्थित साईं स्टेडियम में बना हॉकी मैदान बदहाल हो चुका है। इस कारण खिलाड़ियों को परेशानी का सामना करना पड़ता है। जगह-जगह से सिंथेटिक रबर उखड़ने के कारण इसके नीचे की बजरी भी दिखने लगी है और टर्फ की सतह पर सलवटें भी आ गई हैं। आंधी के बाद तो मैदान की सतह पूरी तरह से हट जाती है। इस कारण खिलाड़ी तैयारी नहीं कर पा रहे है।
प्रशिक्षकों के मुताबिक हॉकी के एस्ट्रो टर्फ की औसतन आयु पांच से छह साल होती है, लेकिन यहां की टर्फ करीब 15 वर्षों से भी अधिक पुरानी है। इसकी समय पर न मरम्म्त हुई और न ही बदलाव। खराब मैदान के चलते कई बार खिलाड़ी चोटिल हो चुके हैं। मैदान की हालत खराब होने के कारण कई बार अधिकारियों को प्रतियोगिताओं की मेजबानी लेने से भी इन्कार करना पड़ा। इससे स्थानीय प्रतिभाओं को अवसर नहीं मिल पा रहा और शहर की खेल में पहचान भी धूमिल होती जा रही है।
प्रशासनिक स्तर पर भी इस समस्या को कई बार उठाया गया है। संबंधित विभागों और केंद्रीय लोक निर्माण विभाग (सीपीडब्ल्यूडी) को बार-बार पत्र भेजे गए हैं। विभाग के इंजीनियरों ने मैदान का निरीक्षण कर, पूरी टर्फ को बदलना ही इसका एकमात्र विकल्प बताया है। जिसमें करीब चार करोड़ रुपये का खर्चा है। स्टेडियम प्रबंधन का कहना है कि वे महीनों से इस मुद्दे को उठा रहे हैं, लेकिन कोई ठोस कदम अब तक नहीं उठाया गया है। संवाद
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हमारी ओर से लगातार पत्राचार किया गया है। कुछ महीनों पूर्व निरीक्षण के लिए टीम भी आई थी, लेकिन कोई विकास कार्य नहीं शुरु हुआ। - गायत्री देवी, केंद्र प्रभारी
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प्रशिक्षकों के मुताबिक हॉकी के एस्ट्रो टर्फ की औसतन आयु पांच से छह साल होती है, लेकिन यहां की टर्फ करीब 15 वर्षों से भी अधिक पुरानी है। इसकी समय पर न मरम्म्त हुई और न ही बदलाव। खराब मैदान के चलते कई बार खिलाड़ी चोटिल हो चुके हैं। मैदान की हालत खराब होने के कारण कई बार अधिकारियों को प्रतियोगिताओं की मेजबानी लेने से भी इन्कार करना पड़ा। इससे स्थानीय प्रतिभाओं को अवसर नहीं मिल पा रहा और शहर की खेल में पहचान भी धूमिल होती जा रही है।
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प्रशासनिक स्तर पर भी इस समस्या को कई बार उठाया गया है। संबंधित विभागों और केंद्रीय लोक निर्माण विभाग (सीपीडब्ल्यूडी) को बार-बार पत्र भेजे गए हैं। विभाग के इंजीनियरों ने मैदान का निरीक्षण कर, पूरी टर्फ को बदलना ही इसका एकमात्र विकल्प बताया है। जिसमें करीब चार करोड़ रुपये का खर्चा है। स्टेडियम प्रबंधन का कहना है कि वे महीनों से इस मुद्दे को उठा रहे हैं, लेकिन कोई ठोस कदम अब तक नहीं उठाया गया है। संवाद
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हमारी ओर से लगातार पत्राचार किया गया है। कुछ महीनों पूर्व निरीक्षण के लिए टीम भी आई थी, लेकिन कोई विकास कार्य नहीं शुरु हुआ। - गायत्री देवी, केंद्र प्रभारी