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Bareilly News: साइबर ठगों की गिरफ्तारी बनी चुनौती, कंबोडिया में बैठकर गुर्गों से करा रहे ठगी

Mon, 20 Oct 2025 02:22 AM IST
Bareily Bureau बरेली ब्यूरो
Updated Mon, 20 Oct 2025 02:22 AM IST
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Arresting cyber fraudsters poses a challenge, with operatives operating in Cambodia.
बरेली। साइबर ठगी के कई बड़े मामले पिछले दिनों सामने आ चुके हैं, लेकिन बरामदगी और असली आरोपियों की गिरफ्तारी में पर्याप्त सफलता नहीं मिल पा रही है। दरअसल मुख्य आरोपी कंबोडिया व दक्षिण पूर्व एशिया के दूसरे देशों में बैठकर भारत में नेटवर्क चला रहे हैं। यही वजह है कि पुलिस इनके गुर्गों तक ही पहुंच पा रही है।
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साइबर ठगों ने धंधे का तरीका भी पहले के मुकाबले काफी बदल दिया है। कंबोडिया में बैठे भारत के ही अधिकांश साइबर ठगों ने बरेली जैसे जिले में मौजूद शातिरों के साथ मिलकर नेटवर्क बना लिया है। कंबोडिया में बैठे साइबर ठग रुपये ट्रांसफर करने और उसे क्रिप्टो करेंसी में बदलने में माहिर हैं।
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कंबोडिया के साइबर ठगों को स्थानीय शातिर किराये के खाते उपलब्ध कराते हैं। इनमें ठगी की रकम ट्रांसफर की जाती है। इसके बदले स्थानीय शातिरों को कमीशन मिलता है। ब्यूरो
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वैज्ञानिक के खाते से उड़ाई रकम का 10 फीसदी भी सीज नहीं
आईवीआरआई के वैज्ञानिक से पिछले दिनों साइबर ठगों ने एक करोड़ 29 लाख रुपये की ठगी की थी। साइबर ठगों ने खुद को बंगलूरू पुलिस और सीबीआई का अधिकारी बताया था। वैज्ञानिक की रकम खातों में ट्रांसफर करवाकर क्रिप्टो करेंसी में बदलकर वॉलेट में भेज दी गई। इस मामले में लखनऊ और बरेली से साइबर ठगों की गिरफ्तारियां हुई थीं लेकिन ठगी की रकम को रिकवर नहीं किया जा सका। केवल नौ लाख रुपये सीज करने का दावा किया जा रहा है। हालांकि यह रकम भी वैज्ञानिक को कब तक वापस मिलेगी, इसे लेकर स्थिति स्पष्ट नहीं है।
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खाते और डाटा उपलब्ध कराने वाले नेटवर्क पर नहीं होती कार्रवाई
कंबोडिया में बैठे साइबर ठगों को स्थानीय ठग ही खाते और शिकार का डाटा उपलब्ध कराते हैं। जिनके खाते में बड़ी रकम होती है उनका डाटा जब कंबोडिया में बैठे ठगों तक पहुंचता है तो वह ठगी करने में लग जाते हैं। शिकार फंसने पर वह भारतीय खातों में ही रुपये ट्रांसफर कर देते हैं। इसके बाद रकम क्रिप्टो करेंसी में बदल दी जाती है। यदि कंबोडिया में बैठे ठगों को डाटा और खाते उपलब्ध कराने वाले नेटवर्क पर प्रभावी कार्रवाई हो तो ठगी के मामले कम हो सकते हैं।

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वर्जन
किसी के बहकावे में न आएं
साइबर ठगों की गिरफ्तारी में टीम लगी रहती हैं। स्थानीय स्तर पर कार्रवाई में दिक्कत आती है तो उच्चाधिकारियों के हस्तक्षेप से सीबीआई जैसी एजेंसियों से भी मदद ली जाती है। हालांकि विदेश में धन जाने के बाद उसकी बरामदगी मुश्किल होती है। फिर भी लोगों को चाहिए कि लुभावने विज्ञापनों व किसी तरह के बहकावे व झांसे में न आएं। ठगी होते ही सबसे पहले साइबर क्राइम हेल्पलाइन 1930 पर शिकायत करें। जितनी जल्दी शिकायत दर्ज होगी, उतना ही धन वापसी की उम्मीद रहेगी। - नीरज सिंह, इंस्पेक्टर साइबर थाना
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