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Bareilly News: ठगी की आरोपी विप्रा और उसकी बहन की एक और जमानत याचिका निरस्त
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बरेली। अपर सत्र न्यायाधीश राघवेंद्र मणि ने आईएएस अधिकारी बनकर नौकरी के नाम पर लाखों रुपये ठगी की आरोपी बारादरी थाना क्षेत्र के ग्रेटर ग्रीन पार्क निवासी डॉ. विप्रा शर्मा और उसकी बहन सुभाषनगर थाना क्षेत्र के विकास नगर सनैया धन सिंह निवासी शिखा शर्मा उर्फ शिखा पाठक की जमानत याचिकाएं निरस्त कर दी हैं। विप्रा के खिलाफ अलग-अलग थानों में 20 और शिखा के खिलाफ 14 मामले दर्ज हैं।
रमेश चंद्र नाम के व्यक्ति ने 25 जून को कोतवाली में रिपोर्ट दर्ज कराई थी। उसने बताया था कि वह अपनी गजक की दुकान पर था। यहां उसकी मुलाकात डॉ. विप्रा शर्मा, उसके पिता वीरेंद्र शर्मा और बहन शिखा शर्मा से हुई। भांजे ने इन सभी से उसका परिचय कराया। विप्रा ने खुद को आईएएस अधिकारी बताया और कहा कि वह उसके बेटे की विकास भवन में चतुर्थ श्रेणी कर्मचारी के पद पर नौकरी लगवा देगी। इसके बदले दो लाख रुपये खर्च होंगे।
बेटे के भविष्य को देखते हुए उसने दो लाख रुपये दे दिए। इसके बाद विप्रा ने उसको फर्जी नियुक्ति पत्र दे दिया। दोनों बहनें जेल में हैं। जमानत के लिए उन्होंने तीसरी बार याचिका दाखिल की थी। विरोध करते हुए अभियोजन पक्ष ने विप्रा के खिलाफ 20 और शिखा के खिलाफ 14 ठगी के मामलों का रिकॉर्ड पेश किया। दोनों पक्षों को सुनने के बाद अदालत ने जमानत याचिकाएं निरस्त कर दीं।
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रमेश चंद्र नाम के व्यक्ति ने 25 जून को कोतवाली में रिपोर्ट दर्ज कराई थी। उसने बताया था कि वह अपनी गजक की दुकान पर था। यहां उसकी मुलाकात डॉ. विप्रा शर्मा, उसके पिता वीरेंद्र शर्मा और बहन शिखा शर्मा से हुई। भांजे ने इन सभी से उसका परिचय कराया। विप्रा ने खुद को आईएएस अधिकारी बताया और कहा कि वह उसके बेटे की विकास भवन में चतुर्थ श्रेणी कर्मचारी के पद पर नौकरी लगवा देगी। इसके बदले दो लाख रुपये खर्च होंगे।
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बेटे के भविष्य को देखते हुए उसने दो लाख रुपये दे दिए। इसके बाद विप्रा ने उसको फर्जी नियुक्ति पत्र दे दिया। दोनों बहनें जेल में हैं। जमानत के लिए उन्होंने तीसरी बार याचिका दाखिल की थी। विरोध करते हुए अभियोजन पक्ष ने विप्रा के खिलाफ 20 और शिखा के खिलाफ 14 ठगी के मामलों का रिकॉर्ड पेश किया। दोनों पक्षों को सुनने के बाद अदालत ने जमानत याचिकाएं निरस्त कर दीं।
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