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शाम से ही गुस्से में थी जयंती, पहले ससुर
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भुता में भाई बहन की मौत के बाद सहम गयी बहन ममता ।
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बरेली/भुता। परिवार वालों का कहना है कि जयंती काफी गुस्सैल मिजाज की है। उसका पति बंटू से अक्सर विवाद होता था। बुधवार को रात भर जयंती गायब रही, इसे लेकर बृहस्पतिवार को दोपहर से ही पति-पत्नी में विवाद हो रहा था। शाम को जयंती ने पहले तो अपने ससुर छेदालाल को दौड़ाया और फिर पति बंटू पर फरसा से हमला कर दिया। इसी बीच पति उसे कमरे में बंद करके चला गया तो उसने दोनों बच्चों को मार डाला।
भुता के गांव मटकापुर में रहने वाले छेदालाल ने बताया कि उनके दो बेटे बंटू और पप्पू हैं। गांव में वह बड़े बेटे बंटू के साथ रहते हैं लेकिन बहू जयंती से नहीं बनती, इसलिए अपनी रोटी खुद बनाते हैं। छोटा बेटा पप्पू फरीदपुर में रहता है। दिवाली पर वह उसके पास चले गए थे। छेदालाल ने बताया कि बुधवार शाम जयंती बच्चों को लेकर कहीं चली गई थी। वह बृहस्पतिवार दोपहर घर लौटी। इसे लेकर बंटू से उसका झगड़ा हुआ। शाम को वह फरीदपुर से आए तो उन्हें देखते ही जयंती भूत-प्रेत का नाटक करते हुए उन पर हमलावर हो गई और दौड़ा लिया। किसी तरह वहां से भागकर उन्होंने खुद को बचाया।
पड़ोसियों ने बताया कि ससुर को दौड़ाने के बाद जयंती अपने पति से झगड़ा करने लगी लेकिन उन लोगों ने जाकर समझा दिया। रात आठ बजे पति-पत्नी में फिर विवाद हो गया और जयंती ने बंटू पर फरसा से हमला कर दिया। उसके सिर में चोट लग गई। इसके बाद ही जयंती ने खुद को कमरे में बंद कर लिया, दो बच्चे बालकृष्ण और कोमल भी अंदर ही थे। हमले से घबराया बंटू कमरे के बाहर रह गई ममता को लेकर अपनी मां के पास चला गया। रात में जयंती कहीं चली न जाए, इसलिए बाहर से ताला डाल दिया।
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खुद ही कमरे से निकालकर लाई बच्चों के शव
पूर्व प्रधान रामचंद्र ने बताया कि शुक्रवार सुबह करीब पौने सात बजे बंटू के पिता छेदालाल उनके पास पहुंचे कि घर चलकर ताला खुलवा दो, उन लोगों की वहां जाने की हिम्मत नहीं पड़ रही थी। वह जब पहुंचे तो कमरे में कोई हलचल नहीं दिखी, जिसके चलते उन्होंने ताला खोलने से मना कर दिया। फिर गांव में रहने वाली जयंती की रिश्ते की बहन दुलारो को बुलाकर उनसे ताला खुलवाया गया। अंदर जाकर देखा तो जयंती खिड़की के पास खड़ी थी। वे लोग अंदर वाले कमरे में पहुंचे तो चारपाई पर दोनों बच्चों के शव पड़े थे। यह देखकर उन लोगों की चीख निकल गई। सभी बाहर निकल आए और जयंती को दोबारा कमरे में बंद कर दिया। पुलिस के पहुंचने तक जयंती ने दोनों बच्चों के शव कमरे से बाहर निकालकर चारपाई पर रख दिए।
सोते पर ही गला घोटने की आशंका
फोरेसिंग टीम ने भी मौके पर पहुंचकर जांच की और बच्चों के शव का भी परीक्षण किया। दोनों बच्चों के गले पर दबाने के निशान थे। बिस्तर पर ही बच्चों का मल मिलने से आशंका जताई जा रही है कि जयंती ने सोते समय ही दोनों का गला घोट दिया।
पोस्टमार्टम में गला दबाने की पुष्टि
बच्चों के शव के पोस्टमार्टम में हाथ से गला दबाने की पुष्टि हुई है। उनके शरीर पर और कोई चोट का निशान नहीं मिला है।
परिवार से नहीं बनी तो अलग हो गई
बंटू बिहार से शादी करके लाया था जयंती को
बरेली। छेदालाल गंगवार ने बताया कि जमीन बिकने के चलते उनकी आर्थिक स्थिति अच्छी नहीं थी। उनका बेटा बंटू मेहनत-मजदूरी करता था लेकिन उसकी शादी नहीं हो रही थी। तब गांव के ही सोनपाल की पत्नी दुलारो देवी छह साल पहले उसको बिहार में जिला हजारीबाग, थाना विष्णुगढ़ के गांव गोविंदपुर लेकर गईं। वहां उन्होंने जयंती से बंटू की शादी करा दी और ले आईं। जयंती मांसाहारी थी, जबकि बंटू की मां प्रेमवती पूजा-पाठ करती थीं। इस वजह से उन लोगों में नहीं बनी। घर में क्लेश होने लगा तो बंटू ने अपना हिस्सा बेच दिया और गांव में बाहर की ओर अलग मकान बनाकर रहने लगा। छेदालाल ने बताया कि उनकी भी अपनी पत्नी से नहीं बनती है, इसलिए वह भी बंटू के साथ रहने लगे। मगर जयंती उनसे झगड़ा करती थी, लिहाजा वह अपना खाना अलग बनाते थे। ब्यूरो
जयंती के चेहरे पर नहीं दिखा पछतावा
बोली- काली माई ने कहा तो मार डाला
- थाने में मां-बाप के घर पहुंचाने की लगाए रही रट
बरेली। गिरफ्तारी के बाद जयंती को भुता थाने ले जाया गया लेकिन उसके चेहरे पर न तो कोई पछतावा था और न बच्चों की मौत का कोई गम। पुलिस की पूछताछ में उसने कहा कि पति शराब पीकर पीटता था। काम भी नहीं करता था। बताया कि रात में बंटू ने मारपीट की और उससे कहा कि वह छोड़ देगा। इसके बाद वह उसे कमरे में बंद करके चला गया तो उसकी काली माई से बात हुई। काली माई ने बच्चों को मारने को कहा तो उसने गला दबा दिया। इस दौरान वह पुलिस वालों से बिहार में अपने मां-बाप के पास पहुंचाने की रट लगाए रही। परिवार वालों ने बताया कि बृहस्पतिवार शाम को ससुर पर हमला करने के दौरान भी वह भूत-प्रेत का ढोंग कर रही थी। यही ढोंग करके वह अक्सर घर से गायब हो जाती थी और पूरी-पूरी रात नहीं लौटती थी। ब्यूरो
बेटी बोली... मम्मी ने टेटुआ दबाकर मार डाला
बरेली। जयंती की साढ़े तीन साल की बेटी ममता ने कहा कि मम्मी भैया को बहुत लाड़ करती थीं। मगर उसे और सुनीता को मारती थीं। गांव वालों ने भी इस बात की तस्दीक की। बताया कि बच्चे दिन का ज्यादातर समय घर के बाहर ही बिताते थे क्योंकि घर में अक्सर ही उनकी पिटाई होती थी। ममता ने कहा कि मम्मी को गुस्सा बहुत आता था और तब वह टेटुआ (गर्दन) दबा देती थीं। बोली- रात में मम्मी ने खिचड़ी बनाई थी लेकिन वह दादी के घर चली गई। सुबह आई तो उसने खिचड़ी खा ली। जब उससे भाई-बहन की मौत का कारण पूछा तो कहने लगी कि मम्मी ने टेटुआ दबाकर मार डाला।
बक्से में रखती थी खाने का सामान
ममता ने बताया कि मम्मी खाने का सामान भी बक्से में रखती थी। उसमें ताला लगा रहता था। उसकी चाबी मम्मी अपने गले में माला की तरह डाले रहती थीं। ममता की दादी ने कहा कि जयंती बच्चों को खाने-पीने के लिए भी परेशान करती थी। इस वजह से वह अक्सर अपने घर से कुछ न कुछ बनाकर बच्चों के लिए भेज देती थीं।
बेटी बोली.. थोड़ी देर में आ जाएगी मम्मी
जयंती की सबसे बड़ी बेटी सुनीता अपनी बुआ के घर थी। शुक्रवार सुबह वह बुआ के साथ ही यहां पहुंची। इस घटना को लेकर सुनीता और उसकी छोटी बहन ममता दोनों ही सहमे हुए थे। मगर उन्हें यह अंदाजा नहीं था कि उनकी मां ने कितना बड़ा अपराध किया है और न ही उन दोनों ने पुलिस को मां को ले जाते देखा था। इस वजह से दोनों बार-बार कह रही थीं कि मम्मी थोड़ी देर में आ जाएंगी।
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भुता के गांव मटकापुर में रहने वाले छेदालाल ने बताया कि उनके दो बेटे बंटू और पप्पू हैं। गांव में वह बड़े बेटे बंटू के साथ रहते हैं लेकिन बहू जयंती से नहीं बनती, इसलिए अपनी रोटी खुद बनाते हैं। छोटा बेटा पप्पू फरीदपुर में रहता है। दिवाली पर वह उसके पास चले गए थे। छेदालाल ने बताया कि बुधवार शाम जयंती बच्चों को लेकर कहीं चली गई थी। वह बृहस्पतिवार दोपहर घर लौटी। इसे लेकर बंटू से उसका झगड़ा हुआ। शाम को वह फरीदपुर से आए तो उन्हें देखते ही जयंती भूत-प्रेत का नाटक करते हुए उन पर हमलावर हो गई और दौड़ा लिया। किसी तरह वहां से भागकर उन्होंने खुद को बचाया।
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पड़ोसियों ने बताया कि ससुर को दौड़ाने के बाद जयंती अपने पति से झगड़ा करने लगी लेकिन उन लोगों ने जाकर समझा दिया। रात आठ बजे पति-पत्नी में फिर विवाद हो गया और जयंती ने बंटू पर फरसा से हमला कर दिया। उसके सिर में चोट लग गई। इसके बाद ही जयंती ने खुद को कमरे में बंद कर लिया, दो बच्चे बालकृष्ण और कोमल भी अंदर ही थे। हमले से घबराया बंटू कमरे के बाहर रह गई ममता को लेकर अपनी मां के पास चला गया। रात में जयंती कहीं चली न जाए, इसलिए बाहर से ताला डाल दिया।
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खुद ही कमरे से निकालकर लाई बच्चों के शव
पूर्व प्रधान रामचंद्र ने बताया कि शुक्रवार सुबह करीब पौने सात बजे बंटू के पिता छेदालाल उनके पास पहुंचे कि घर चलकर ताला खुलवा दो, उन लोगों की वहां जाने की हिम्मत नहीं पड़ रही थी। वह जब पहुंचे तो कमरे में कोई हलचल नहीं दिखी, जिसके चलते उन्होंने ताला खोलने से मना कर दिया। फिर गांव में रहने वाली जयंती की रिश्ते की बहन दुलारो को बुलाकर उनसे ताला खुलवाया गया। अंदर जाकर देखा तो जयंती खिड़की के पास खड़ी थी। वे लोग अंदर वाले कमरे में पहुंचे तो चारपाई पर दोनों बच्चों के शव पड़े थे। यह देखकर उन लोगों की चीख निकल गई। सभी बाहर निकल आए और जयंती को दोबारा कमरे में बंद कर दिया। पुलिस के पहुंचने तक जयंती ने दोनों बच्चों के शव कमरे से बाहर निकालकर चारपाई पर रख दिए।
सोते पर ही गला घोटने की आशंका
फोरेसिंग टीम ने भी मौके पर पहुंचकर जांच की और बच्चों के शव का भी परीक्षण किया। दोनों बच्चों के गले पर दबाने के निशान थे। बिस्तर पर ही बच्चों का मल मिलने से आशंका जताई जा रही है कि जयंती ने सोते समय ही दोनों का गला घोट दिया।
पोस्टमार्टम में गला दबाने की पुष्टि
बच्चों के शव के पोस्टमार्टम में हाथ से गला दबाने की पुष्टि हुई है। उनके शरीर पर और कोई चोट का निशान नहीं मिला है।
परिवार से नहीं बनी तो अलग हो गई
बंटू बिहार से शादी करके लाया था जयंती को
बरेली। छेदालाल गंगवार ने बताया कि जमीन बिकने के चलते उनकी आर्थिक स्थिति अच्छी नहीं थी। उनका बेटा बंटू मेहनत-मजदूरी करता था लेकिन उसकी शादी नहीं हो रही थी। तब गांव के ही सोनपाल की पत्नी दुलारो देवी छह साल पहले उसको बिहार में जिला हजारीबाग, थाना विष्णुगढ़ के गांव गोविंदपुर लेकर गईं। वहां उन्होंने जयंती से बंटू की शादी करा दी और ले आईं। जयंती मांसाहारी थी, जबकि बंटू की मां प्रेमवती पूजा-पाठ करती थीं। इस वजह से उन लोगों में नहीं बनी। घर में क्लेश होने लगा तो बंटू ने अपना हिस्सा बेच दिया और गांव में बाहर की ओर अलग मकान बनाकर रहने लगा। छेदालाल ने बताया कि उनकी भी अपनी पत्नी से नहीं बनती है, इसलिए वह भी बंटू के साथ रहने लगे। मगर जयंती उनसे झगड़ा करती थी, लिहाजा वह अपना खाना अलग बनाते थे। ब्यूरो
जयंती के चेहरे पर नहीं दिखा पछतावा
बोली- काली माई ने कहा तो मार डाला
- थाने में मां-बाप के घर पहुंचाने की लगाए रही रट
बरेली। गिरफ्तारी के बाद जयंती को भुता थाने ले जाया गया लेकिन उसके चेहरे पर न तो कोई पछतावा था और न बच्चों की मौत का कोई गम। पुलिस की पूछताछ में उसने कहा कि पति शराब पीकर पीटता था। काम भी नहीं करता था। बताया कि रात में बंटू ने मारपीट की और उससे कहा कि वह छोड़ देगा। इसके बाद वह उसे कमरे में बंद करके चला गया तो उसकी काली माई से बात हुई। काली माई ने बच्चों को मारने को कहा तो उसने गला दबा दिया। इस दौरान वह पुलिस वालों से बिहार में अपने मां-बाप के पास पहुंचाने की रट लगाए रही। परिवार वालों ने बताया कि बृहस्पतिवार शाम को ससुर पर हमला करने के दौरान भी वह भूत-प्रेत का ढोंग कर रही थी। यही ढोंग करके वह अक्सर घर से गायब हो जाती थी और पूरी-पूरी रात नहीं लौटती थी। ब्यूरो
बेटी बोली... मम्मी ने टेटुआ दबाकर मार डाला
बरेली। जयंती की साढ़े तीन साल की बेटी ममता ने कहा कि मम्मी भैया को बहुत लाड़ करती थीं। मगर उसे और सुनीता को मारती थीं। गांव वालों ने भी इस बात की तस्दीक की। बताया कि बच्चे दिन का ज्यादातर समय घर के बाहर ही बिताते थे क्योंकि घर में अक्सर ही उनकी पिटाई होती थी। ममता ने कहा कि मम्मी को गुस्सा बहुत आता था और तब वह टेटुआ (गर्दन) दबा देती थीं। बोली- रात में मम्मी ने खिचड़ी बनाई थी लेकिन वह दादी के घर चली गई। सुबह आई तो उसने खिचड़ी खा ली। जब उससे भाई-बहन की मौत का कारण पूछा तो कहने लगी कि मम्मी ने टेटुआ दबाकर मार डाला।
बक्से में रखती थी खाने का सामान
ममता ने बताया कि मम्मी खाने का सामान भी बक्से में रखती थी। उसमें ताला लगा रहता था। उसकी चाबी मम्मी अपने गले में माला की तरह डाले रहती थीं। ममता की दादी ने कहा कि जयंती बच्चों को खाने-पीने के लिए भी परेशान करती थी। इस वजह से वह अक्सर अपने घर से कुछ न कुछ बनाकर बच्चों के लिए भेज देती थीं।
बेटी बोली.. थोड़ी देर में आ जाएगी मम्मी
जयंती की सबसे बड़ी बेटी सुनीता अपनी बुआ के घर थी। शुक्रवार सुबह वह बुआ के साथ ही यहां पहुंची। इस घटना को लेकर सुनीता और उसकी छोटी बहन ममता दोनों ही सहमे हुए थे। मगर उन्हें यह अंदाजा नहीं था कि उनकी मां ने कितना बड़ा अपराध किया है और न ही उन दोनों ने पुलिस को मां को ले जाते देखा था। इस वजह से दोनों बार-बार कह रही थीं कि मम्मी थोड़ी देर में आ जाएंगी।