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... और रोशन हो उठे मन्नतों के चिराग
ब्यूरो/अमर उजाला, बरेली
Updated Tue, 17 Jan 2017 01:08 AM IST
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... And became lighted lamp vows
- फोटो : बरेली, अमर उजाला
खानकाह नियाजिया में सोमवार को खास दिन था। यहां लोग अपनी-अपनी मन्नतों मुराद लेकर दोपहर से ही कतारबद्ध थे। सब को इंतजार था शाम होने का। जब उन्हें मन्नतों का चिराग जलाने का मौका मिल सके। सूरज डूबते ही खानकाह में एक-एक करके चिराग रोशन होने लगे। रात तक पूरी आंगन में हजारों चिराग झिलमिला उठे और इसकी पीली रोशनी से नहाई खानकाह के दरो दीवार सोने की तरह जगमगाने लगे। इस रूहानी मंजर के बीच अपनी परेशानी से निजात के लिए दुआ मांगते हुए तमाम मन्नतियों की आंखें आंसुओं से डबडबाती नजर आईं।
यह मौका था यहां जश्न-ए-चिरागां का। जिसके लिए कहा जाता है कि इस जश्न में चिराग जलाने के एक साल में उसकी मुराद पूरी हो जाती है। इसी उम्मीद को लेकर इस बार भी शहर के अलावा दूर दराज सूबों तक के जायरीन यहां अपनी मन्नते लिए पहुंचे। इस जश्न का पहला खानकाही चिराग सज्जदानशीन शाह मोहम्मद हसनैन नियाजी उर्फ हसनी मियां ने रोशन किया। फिर इसी चिराग की लौ से लौ जुड़ती गई। जो उनके ही हाथों से बांटे गए। इसके बाद इस जिम्मेदारी को नायब सज्जादा शाह मेंहदी मियां ने अंजाम दिया।
खानकाह में सुबह से चली तकरीब के दरमियान शाम को पांच बजे महबूबे इलाही और शाम छह बजे महबूबे सुब्हानी के कुल शरीफ की रस्म अदा की गई। रात में कव्वाली की महफिल सजी। यह सारी तकरीब प्रबंधक शब्बू मियां नियाजी की देख रेख में संपन्न हुई। उन्होंने बताया कि चिरागां की रस्म के बाद साहिबे सज्जादा दिल्ली के लिए रवाना हो गए जो मंगलवार को हजरत निजामउद्दीन औलिया के उर्स में शिरकत करेंगे।
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यह मौका था यहां जश्न-ए-चिरागां का। जिसके लिए कहा जाता है कि इस जश्न में चिराग जलाने के एक साल में उसकी मुराद पूरी हो जाती है। इसी उम्मीद को लेकर इस बार भी शहर के अलावा दूर दराज सूबों तक के जायरीन यहां अपनी मन्नते लिए पहुंचे। इस जश्न का पहला खानकाही चिराग सज्जदानशीन शाह मोहम्मद हसनैन नियाजी उर्फ हसनी मियां ने रोशन किया। फिर इसी चिराग की लौ से लौ जुड़ती गई। जो उनके ही हाथों से बांटे गए। इसके बाद इस जिम्मेदारी को नायब सज्जादा शाह मेंहदी मियां ने अंजाम दिया।
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खानकाह में सुबह से चली तकरीब के दरमियान शाम को पांच बजे महबूबे इलाही और शाम छह बजे महबूबे सुब्हानी के कुल शरीफ की रस्म अदा की गई। रात में कव्वाली की महफिल सजी। यह सारी तकरीब प्रबंधक शब्बू मियां नियाजी की देख रेख में संपन्न हुई। उन्होंने बताया कि चिरागां की रस्म के बाद साहिबे सज्जादा दिल्ली के लिए रवाना हो गए जो मंगलवार को हजरत निजामउद्दीन औलिया के उर्स में शिरकत करेंगे।
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