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Bareilly News: 'गुड गवर्नेंस पर सवालिया निशान हैं माफिया और माइनिंग, यह राष्ट्र के विकास में बाधक'

Thu, 16 Mar 2023 09:58 AM IST
मुकेश कुमार अमर उजाल ब्यूरो, बरेली
अमर उजाल ब्यूरो, बरेली Published by: मुकेश कुमार Updated Thu, 16 Mar 2023 09:58 AM IST
सार

यशोवर्धन आजाद ने कहा कि जियो टैगिंग, सेटेलाइट मैपिंग, ड्रोन के दौर में भी अगर माफियावाद पनप रहा है तो यह गवर्नेंस की कमी है, जो टेक्नोलॉजी गैप के तौर पर सामने आ रही है। यह किसी भी राष्ट्र के विकास में बाधक है।

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amar ujala talk show on national security ex ips yashovardhan ajad address the program in bareilly
संवाद कार्यक्रम में बोलते पूर्व आईपीएस यशोवर्धन आजाद - फोटो : अमर उजाला

विस्तार

बरेली के आईएमए हॉल में बुधवार को अमर उजाला की ओर से ‘राष्ट्रीय सुरक्षा’ विषय पर संवाद कार्यक्रम आयोजित हुआ। इसमें इंटेलिजेंस ब्यूरो के विशेष निदेशक रह चुके पूर्व आईपीएस यशोवर्धन आजाद ने अपने कार्यकाल के अनुभव भी साझा किए। उन्होंने कहा कि लोकतांत्रिक देश में तकनीकी तौर पर मजबूती के बावजूद माफिया और माइनिंग पर अंकुश नहीं लग पाना बड़ा सवाल है। जियो टैगिंग, सेटेलाइट मैपिंग, ड्रोन के दौर में भी अगर माफियावाद पनप रहा है तो यह गवर्नेंस की कमी है, जो टेक्नोलॉजी गैप के तौर पर सामने आ रही है। यह किसी भी राष्ट्र के विकास में बाधक है।

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उन्होंने कहा कि भ्रष्टाचार रहित शासन करना भी अब चुनौती बन रहा है। अंग्रेजों ने जमींदारी प्रथा के जरिये इसे स्थायी बना दिया। भ्रष्टाचार दीमक की तरह लोकतंत्र को खोखला कर रहा है। देश की सुरक्षा के लिए अहम बिंदु सैन्य शक्ति की मजबूती, चीन-पाकिस्तान सीमा की सुरक्षा, आंतरिक सुरक्षा की दृष्टि से जम्मू-कश्मीर, पंजाब, नक्सलवाद और साइबर अपराध से निपटने की चुनौती है। आंतरिक सुरक्षा के महत्व का अंदाजा इसी से लगा सकते हैं कि चीन ने साल 2020 में इस पर 200 बिलियन डॉलर खर्च किए। पूरे विश्व में आंतरिक सुरक्षा पर हो रहा खर्च सैन्य खर्च से आधा है। हमारे देश को भी इस पर ज्यादा ध्यान देने की जरूरत है।

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हैंकिंग के जरिए तोड़ रहे कोर इंफ्रास्ट्रक्चर

पूर्व आईपीएस यशोवर्धन आजाद ने बताया कि वर्तमान में चीन ने कोर इंफ्रास्ट्रक्चर को कमजोर करने के लिए करीब एक हजार से ज्याद हैकर लगा रखे हैं। वे वेबसाइट्स को हैक कर रहे हैं। देश की ओर से भी इसे रोकने के लिए काफी डिजिटल सुरक्षा विकसित की गई है। अब डिजिटल हाईवे कनेक्टिविटी सर्वाधिक है। इसी के सापेक्ष खतरा भी है। सुरक्षा पुख्ता करने के लिए अब डिजिटल इंजीनियर्स और कंप्यूटर्स ऑपरेटर्स चाहिए, ट्रेंड युवा चाहिए जो इसे भेदने से रोक सकें। इस दौरान उन्होंने राष्ट्रीय सुरक्षा को लेकर पूछे गए शहर के लोगों के सवालों के जवाब भी दिए। 

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जहीर अहमद, डॉ. रुचिन अग्रवाल और सुरेश सुंदरानी - फोटो : अमर उजाला

सवाल: देश की सुरक्षा के लिए वर्तमान में कितनी एजेंसियां सक्रिय हैं। - जहीर अहमद
जवाब: जिले में पुलिस-प्रशासन सक्रिय हैं। राज्य स्तर पर इंटेलीजेंस है। देश स्तर पर रा, आर्मी, बीएसएफ, सीआरपीएफ, सीआईएसएफ, आईटीबीपी, इकोनॉमिक एजेंसी, सीसीटीएनएस, नैट ग्रिड, एनटीआरओ, सेटेलाइट मैपिंग आदि हैं।

सवाल : जघन्य अपराध पर क्या फांसी की सजा से अंकुश लगेगा। - डॉ. रुचिन अग्रवाल
जवाब : फांसी देने से अपराध कम होंगे या नहीं, इस पर स्पष्ट नहीं कहा जा सकता। पुलिस अपराधी को पकड़ती है। कोर्ट में पेश करती है। पुलिस आईपीसी के आधार पर चालान पेश करती है। दंड देने का निर्णय न्यायपालिका के पास सुरक्षित है।

Bareilly : देश की सीमाएं सुरक्षित मगर साइबर हमलों से आंतरिक सुरक्षा को खतरा, निगरानी तंत्र की दरकार

सवाल : भ्रष्टाचार पर अंकुश क्यों नहीं लग रहा। - सुरेश सुंदरानी
जवाब : चाणक्य के समय से भ्रष्टाचार हमारे देश में आया। ब्रिटिश काल में यह स्थायी हो गया। सरकार को अंकुश लगाने के लिए पहल करनी होगी। पुलिस सिस्टम को रिफॉर्म करने में कहीं न कहीं राज्य सरकार ही अड़चन है।

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लाइवा, संजीव कुमार और पवन अरोड़ा - फोटो : अमर उजाला
सवाल : जलवायु परिवर्तन से क्या देश की सुरक्षा को खतरा है। - लाइवा, विद्यार्थी
जवाब : देश के लोगों को जिससे खतरा हो, वह राष्ट्र की सुरक्षा के लिए भी खतरा है। जलवायु परिवर्तन वर्तमान में बड़ी समस्या बन रहा है। इसे लेकर विकसित, विकासशील देशों में संघर्ष की स्थिति है। इसे काबू करने में सभी देश सिर्फ बातें कर रहे हैं।

सवाल : कश्मीर मैनेज, पर आगे इसका क्या समाधान है। संजीव कुमार, एफएसओ
जवाब : कश्मीर में घटनाएं थम चुकी हैं और अब वह पीस जोन में शामिल हो रहा है। आगे इसकी सुरक्षा के लिए सरकार की ओर से प्रयास किए जा रहे हैं। पैरामिलिट्री और आर्मी वहां पर सक्रिय है। पाकिस्तानी घुसपैठ पर अंकुश लगाने के सार्थक प्रयास हो रहे हैं।

सवाल : आतंकवादी को तत्काल मौत की सजा क्यों नहीं दी जाती। पवन अरोड़ा
जवाब : यह निर्णय न्यायपालिका को लेना होता है। किसी भी निर्णय के कई पहलू हो सकते हैं।
 

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प्रीति पाराशरी, डॉ. बीनम सक्सेना और संजीव जिंदल - फोटो : अमर उजाला
सवाल: उपकरण लगे हैं पर उनका उपयोग नहीं हो रहा। - प्रीति पाराशरी
जवाब : स्टेशनों पर लगे ज्यादातर डीएफएमडी का उपयोग न होने की बड़ी वजह है कि वहां बड़ी तादाद में लोग गुजरते हैं। प्रत्येक की निगरानी मुमकिन नहीं। डीएफएमडी ऐसी जगह न लगे जहां पुलिस न हो और प्रशिक्षित स्टाफ का अभाव हो।

सवाल : गुप्तचर एजेंसियां क्या आंतरिक सुरक्षा में सक्षम हैं। - डॉ. बीनम सक्सेना
जवाब : देश का इंटेलीजेंस ब्यूरो और रॉ काफी सजग हैं। इनकी सूचनाओं पर प्रभावी कार्रवाई सरकारों को करनी होती है। प्राप्त सूचनाओं और तथ्यों का किस तरह से इस्तेमाल किया जाएगा, यह एजेंसियों की जिम्मेदारी नहीं है।

सवाल: अगर एजेंसियां सक्रिय हैं तो घुसपैठ कैसे हुई। - संजीव जिंदल
जवाब : कारगिल युद्ध के बाद सौंपी गई रिपोर्ट के मुताबिक एजेंसियों से सूचना प्राप्त होने के बाद देश की सेनाएं सतर्क हुईं और हमारी जीत हुई। अब सेटेलाइट मैपिंग से इस पर प्रभावी अंकुश लगने की उम्मीद है।

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एडवोकेट अरविंद श्रीवास्तव, राजेश यादव और डॉ. विनोद पागरानी अध्यक्ष आईएमए - फोटो : अमर उजाला
सवाल: किसी भी भवन पर बुलडोजर चलाना क्या सही है ।
जवाब: कोई ऐसा कानून नहीं है कि कहीं भी निर्माण पर बुलडोजर चला दिया जाए। अगर ऐसा हो रहा है तो गलत है। इस मामले में वकील संगठन को आवाज उठानी चाहिए ताकि न्याय मिल सके। 

सवाल: अपराध के इन्वेस्टीगेशन में सुधार कैसे हो। - एडवोकेट राजेश यादव, पूर्व डीजीसी
जवाब : इन्वेस्टीगेशन में सुधार के लिए आधुनिक उपकरणों का प्रयोग करना होगा। फॉरेंसिक जांच के लिए लैब की संख्या बढ़ानी होगी। विवेचना के दौरान संबंधित अधिकारी का भी सक्षम होना जरूरी है।

सवाल : बीआरआई से क्या खतरा है, इस पर अंकुश लगाएं। - डॉ. विनोद पागरानी, अध्यक्ष, आईएमए
जवाब : बीआरआई एक्सप्रेशन है चीन का। चीन क्रेडिट बांटकर दुनिया के कई देशों में डिप्लोमेसी बनाना चाहता है। बीआरआई मामले में अंकुश लगाने के लिए लगातार पहल हो रही है, जो सफल भी है।


 
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