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Bareilly News: आत्मरक्षा के साथ पदक भी बटोर रहे मासूम हाथ
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बरेली। शहर की बेटियां आत्मरक्षा के साथ खेलों में भी अपनी पहचान बना रही हैं। खुद को सशक्त बनाने के इरादे से शुरू किया गया ताइक्वांडो का अभ्यास अब उनका कॅरिअर बनता जा रहा है। अब ताइक्वांडो उनके लिए केवल मार्शल आर्ट नहीं, बल्कि यह उनकी सफलता का मार्ग बन चुका है। बेहद कम उम्र में अकादमी में दाखिला लेने वाली बेटियों ने इस खेल में राष्ट्रीय स्तर तक अपनी धाक जमाई की है।
पिता की प्रेरणा... सोने सी निखर रहीं सांची
पुराना शहर निवासी सात वर्षीय सांची सिंह के पिता भानु प्रताप सिंह ताइक्वांडो प्रशिक्षक हैं। वे बताते हैं कि सांची का रुझान बचपन से ही खेलों की ओर था। वह हमेशा अकादमी जाने की जिद करती थी। शुरुआत में वह दूसरों को खेलते देखती थी, लेकिन जल्द ही खुद भी अभ्यास करने लगी। उनका लक्ष्य ब्लैक बेल्ट तक पहुंचना है। वह बरेली, लखनऊ और हरिद्वार में हुई राष्ट्रीय ताइक्वांडो प्रतियोगिता में स्वर्ण और कांस्य पदक जीत चुकी हैं।
देश का प्रतिनिधित्व करना चाहती हैं दिव्यांशीपीलीभीत बाइपास रोड निवासी दस वर्षीय दिव्यांशी सिंह को उनके अभिभावकों ने आत्मरक्षा के उद्देश्य से ताइक्वांडो क्लास में भेजा था, लेकिन धीरे-धीरे उनकी दिलचस्पी बढ़ती गई। अब वह पेशेवर प्रशिक्षण लेकर टूर्नामेंट में प्रतिभाग कर रही हैं। दिव्यांशी का सपना है कि वह अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भारत का प्रतिनिधित्व करें। वह वर्ष 2025 में हरिद्वार में हुई राष्ट्रीय प्रतियोगिता में रजत पदक हासिल कर चुकी हैं। संवाद
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पिता की प्रेरणा... सोने सी निखर रहीं सांची
पुराना शहर निवासी सात वर्षीय सांची सिंह के पिता भानु प्रताप सिंह ताइक्वांडो प्रशिक्षक हैं। वे बताते हैं कि सांची का रुझान बचपन से ही खेलों की ओर था। वह हमेशा अकादमी जाने की जिद करती थी। शुरुआत में वह दूसरों को खेलते देखती थी, लेकिन जल्द ही खुद भी अभ्यास करने लगी। उनका लक्ष्य ब्लैक बेल्ट तक पहुंचना है। वह बरेली, लखनऊ और हरिद्वार में हुई राष्ट्रीय ताइक्वांडो प्रतियोगिता में स्वर्ण और कांस्य पदक जीत चुकी हैं।
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देश का प्रतिनिधित्व करना चाहती हैं दिव्यांशीपीलीभीत बाइपास रोड निवासी दस वर्षीय दिव्यांशी सिंह को उनके अभिभावकों ने आत्मरक्षा के उद्देश्य से ताइक्वांडो क्लास में भेजा था, लेकिन धीरे-धीरे उनकी दिलचस्पी बढ़ती गई। अब वह पेशेवर प्रशिक्षण लेकर टूर्नामेंट में प्रतिभाग कर रही हैं। दिव्यांशी का सपना है कि वह अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भारत का प्रतिनिधित्व करें। वह वर्ष 2025 में हरिद्वार में हुई राष्ट्रीय प्रतियोगिता में रजत पदक हासिल कर चुकी हैं। संवाद
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