{"_id":"58307dd64f1c1b5536901e3e","slug":"ageing-will-release-two-thousand-prisoners","type":"story","status":"publish","title_hn":"बूढ़े दो हजार कैदियों को मिलेगी रिहाई","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
बूढ़े दो हजार कैदियों को मिलेगी रिहाई
ब्यूरो/अमर उजाला, बरेली
Updated Sun, 20 Nov 2016 12:18 AM IST
विज्ञापन
Ageing will release two thousand prisoners
- फोटो : बरेली, अमर उजाला
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
प्रदेश भर की जेलों में उम्रकैद की सजा काट रहे दो हजार बूढ़े कैदियों के परिवार वालों के लिए खुशखबरी है। शासन अच्छे आचरण वाले कैदियों की रिहाई करके परिवार के साथ जीने का मौका दे सकता है। जेल अफसरों को पैरोल से संबंधित अधिकार दिए जाने की बात चल रही है। परिवार में मौत का शादी के मौके पर आसानी से पैरोल पर रिहाई हो सकेगी। मुख्यमंत्री अखिलेश यादव ने जेल मंत्री के इसी तरह के कई प्रस्तावों पर सहमति जता दी है। विधानसभा चुनाव से पहले सीएम के अंतिम फैसला लेने के बाद कई नई व्यवस्थाएं लागू हो सकती हैं।
पुलिस लाइंस में अमर उजाला से विशेष बातचीत में जेल मंत्री बलवंत सिंह रामूवालिया ने कहा कि जेलों में सुधार को शक्तियों को विकें द्रीकरण किया जाना जरूरी है। अधीक्षक को छुट्टी के लिए लखनऊ दौड़ना पड़ता है। उनकी छुट्टी डीआईजी स्तर से ही होने लगेगी। शादी और मौत के मौके पर जेलों में बंद लोगों के परिवार वाले आवेदन करते हैं। 72 घंटे डीएम के स्तर से किसी को भी पैरोल पर जमानत दी जा सकती है। इसके आगे शासन से ही पैरोल पर जमानत मिलती है। इस व्यवस्था में कुछ ऐसा होना चाहिए कि शादी और मौत के मौकों पर आसानी से पैरोल पर जमानत मिलनी चाहिए। सबसे अहम मामला बूढ़े बंदियों की रिहाई का है। पुलिस की रिपोर्ट समय से मिलने की वजह से कैदी रिहा नहीं हो पाते हैं। आजीवन सजा काटने वाले तमाम कैदी ऐसे हैं, जिनके बारे में विचार किया जा सकता है। उनके व्यवहार में सुधार के बारे में जेल प्रशासन ही सबसे बेहतर जान सकता है। जबकि रिपोर्ट पुलिस के मांगी जाती है। जेल अफसरों के प्रमोशन के मामले भी लटके हैं। उन्होंने कहा कि सीएम साहब से इन मुद्दों पर सहमति जता दी है। उम्मीद है कि विधानसभा चुनाव से पहले कुछ नए फैसले होंगे। इससे जेल में बंद 70 साल से ज्यादा आयु के बुजुर्ग कैदियों को राहत मिल सकती है।
जेल का उद्घाटन, शिफ्ट बाद में होगी
बरेली। शनिवार को जेल मंत्री बलवंत सिंह रामूवालिया ने बीसलपुर रोड पर नई जेल का उद्घाटन तो कर दिया, लेकिन शिफ्ट होने में अभी एक महीने लग सकता है। जिला कारागार में वहां के हिसाब से स्टाफ भी नहीं हैं। इसलिए और भी तमाम तरह की दिक्कतें आएंगी। नई जेल में अभी इंटरनेट कनेक्शन नहीं मिल पाया है। बंदियों को शिफ्ट करने के लिए सुरक्षा को पुलिस की भी जरूरत होगी।
विज्ञापन
विज्ञापन
पुलिस लाइंस में अमर उजाला से विशेष बातचीत में जेल मंत्री बलवंत सिंह रामूवालिया ने कहा कि जेलों में सुधार को शक्तियों को विकें द्रीकरण किया जाना जरूरी है। अधीक्षक को छुट्टी के लिए लखनऊ दौड़ना पड़ता है। उनकी छुट्टी डीआईजी स्तर से ही होने लगेगी। शादी और मौत के मौके पर जेलों में बंद लोगों के परिवार वाले आवेदन करते हैं। 72 घंटे डीएम के स्तर से किसी को भी पैरोल पर जमानत दी जा सकती है। इसके आगे शासन से ही पैरोल पर जमानत मिलती है। इस व्यवस्था में कुछ ऐसा होना चाहिए कि शादी और मौत के मौकों पर आसानी से पैरोल पर जमानत मिलनी चाहिए। सबसे अहम मामला बूढ़े बंदियों की रिहाई का है। पुलिस की रिपोर्ट समय से मिलने की वजह से कैदी रिहा नहीं हो पाते हैं। आजीवन सजा काटने वाले तमाम कैदी ऐसे हैं, जिनके बारे में विचार किया जा सकता है। उनके व्यवहार में सुधार के बारे में जेल प्रशासन ही सबसे बेहतर जान सकता है। जबकि रिपोर्ट पुलिस के मांगी जाती है। जेल अफसरों के प्रमोशन के मामले भी लटके हैं। उन्होंने कहा कि सीएम साहब से इन मुद्दों पर सहमति जता दी है। उम्मीद है कि विधानसभा चुनाव से पहले कुछ नए फैसले होंगे। इससे जेल में बंद 70 साल से ज्यादा आयु के बुजुर्ग कैदियों को राहत मिल सकती है।
विज्ञापन
जेल का उद्घाटन, शिफ्ट बाद में होगी
बरेली। शनिवार को जेल मंत्री बलवंत सिंह रामूवालिया ने बीसलपुर रोड पर नई जेल का उद्घाटन तो कर दिया, लेकिन शिफ्ट होने में अभी एक महीने लग सकता है। जिला कारागार में वहां के हिसाब से स्टाफ भी नहीं हैं। इसलिए और भी तमाम तरह की दिक्कतें आएंगी। नई जेल में अभी इंटरनेट कनेक्शन नहीं मिल पाया है। बंदियों को शिफ्ट करने के लिए सुरक्षा को पुलिस की भी जरूरत होगी।
विज्ञापन