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गायकी के बाद फिल्म मेकिंग में उतरे खुर्शीद अली
बरेली
Updated Sun, 22 Nov 2015 01:54 AM IST
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बरेली। उत्तर प्रदेश में चुनिंदा गजल गायकों में एक नाम खुर्शीद अली खां का भी है। उन्होंने गजल गायकी से शुरुआत कर फिल्म मेकिंग तक का सफर तय किया है। फिलहाल अभी वह एक एलबम बना रहे हैं। इससे पहलेे एक सीडी फिल्म मैं रह गया कुंवारा बना चुके हैं।
खुर्शीद अली खां कहते हैं कि उन्हें लंबा संघर्ष करना पड़ा है। एक तो म्युजिकल लाइन में उनकी कोई बैकग्राउंड नहीं थीं। घर से भी बहुत मुखालफत हुई। धीरे-धीरे पहचान बनी तो घर में भी स्वीकारिता बनी। प्रारंभिक शास्त्रीय गायन का प्रशिक्षण उन्होंने पंडित टीका राम झा से बदायूं में हासिल किया। सुगम संगीत गायन वादन का प्रशिक्षण श्रीनंदन गोस्वामी से और खास तौर से गजल गायकी का प्रशिक्षण उस्ताद यूनुस मलिक से मुंबई में लिया।
उन्हें गायकी का शौक पांच वर्ष की आयु से ही हो गया। धीरे-धीरे सुगम संगीत में सभी तरह के गीत, गजल, भजन, और संगीत निर्देशन में पारंगत हो गए। 1975 से मंच पर आए और 1981 से दूरदर्शन से जुड़े। म्युजिकल कंपनी सुपर कैसेट और टी-सीरीज ने भी उनके कैसेट रिलीज किए। इसमें 1984 में तसव्वर और 1988 में आईना प्रमुख है। 1999 में डीडी-वन के सीरियल आदर्श में गायन एवं संगीत निर्देशन किया। प्राइम म्युजिकल एंड फिल्म्स ने हाल ही में गजलों का एलबम तबस्सुम लांच किया है।
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इसके अलावा डीडी-वन पर आने वाले किसानों के सीरियल के टाइटिल सांग के अलावा बैकग्राउंड म्युजिक भी दिया। इसमें गीत अपने शिष्यों दीप्ती अग्रवाल, स्तुति शर्मा, तान्या सिंह, जीनत मैसी, अंकिता सक्सेना, मुस्कान शर्मा से गवाया है। यह सब कुछ उन्होंने आईवीआरआई मेें नौकरी करते हुए किया। फिलहाल वह रायबरेली के जिलाधिकारी सूर्य पाल गंगवार के रचित गीतों और गजलों पर काम कर रहे हैं। इसकी आडियो रिकार्डिंग पूरी हो चुकी है इसका फिल्मांकन शेष है। भविष्य में उनका फिल्म इंस्टीट्यूट खोलने का इरादा है।
हासिल कर चुके हैं ऋषिकेष मुखर्जी एवार्ड
खुर्शीद अली खां को संगीत और गायकी के क्षेत्र में कई एवार्ड मिल चुके हैं। इसमें उल्लेखनीय है 1985 में सुर सिंगार संसद की ओर से फिल्म निर्माता निर्देशक ऋषिकेष मुखर्जी एवार्ड। शोभना एवार्ड, बेगम अख्तर एवार्ड, यूथ एवार्ड, वासलिया एवार्ड, कम्युनिटी एवार्ड, इंटेलेक्चुअल पीस एवार्ड, कमंडेशन एवार्ड, रोटरी, जेसीज क्लब सहित कई समाजिक व सांस्कृतिक संस्थाओं की ओर से भी सम्मानित हो चुके हैं।
पिछड़ रही है गजल गायकी
गजलों के लिए बेहतर माहौल नहीं बन पा रहा है। गायक खुर्शीद अली खां कहते हैं कि महफिलें खत्म हो गई। कद्रदान घट गए। इस लिए गजलों की खनक भी कम हो रही है। हालांकि वह मानते हैं कि फिर माहौल बनेगा और गजलों की महफिल सजेगी। हां इसके लिए नई पीढ़ी को उत्साह के साथ आगे आना होगा।
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खुर्शीद अली खां कहते हैं कि उन्हें लंबा संघर्ष करना पड़ा है। एक तो म्युजिकल लाइन में उनकी कोई बैकग्राउंड नहीं थीं। घर से भी बहुत मुखालफत हुई। धीरे-धीरे पहचान बनी तो घर में भी स्वीकारिता बनी। प्रारंभिक शास्त्रीय गायन का प्रशिक्षण उन्होंने पंडित टीका राम झा से बदायूं में हासिल किया। सुगम संगीत गायन वादन का प्रशिक्षण श्रीनंदन गोस्वामी से और खास तौर से गजल गायकी का प्रशिक्षण उस्ताद यूनुस मलिक से मुंबई में लिया।
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उन्हें गायकी का शौक पांच वर्ष की आयु से ही हो गया। धीरे-धीरे सुगम संगीत में सभी तरह के गीत, गजल, भजन, और संगीत निर्देशन में पारंगत हो गए। 1975 से मंच पर आए और 1981 से दूरदर्शन से जुड़े। म्युजिकल कंपनी सुपर कैसेट और टी-सीरीज ने भी उनके कैसेट रिलीज किए। इसमें 1984 में तसव्वर और 1988 में आईना प्रमुख है। 1999 में डीडी-वन के सीरियल आदर्श में गायन एवं संगीत निर्देशन किया। प्राइम म्युजिकल एंड फिल्म्स ने हाल ही में गजलों का एलबम तबस्सुम लांच किया है।
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इसके अलावा डीडी-वन पर आने वाले किसानों के सीरियल के टाइटिल सांग के अलावा बैकग्राउंड म्युजिक भी दिया। इसमें गीत अपने शिष्यों दीप्ती अग्रवाल, स्तुति शर्मा, तान्या सिंह, जीनत मैसी, अंकिता सक्सेना, मुस्कान शर्मा से गवाया है। यह सब कुछ उन्होंने आईवीआरआई मेें नौकरी करते हुए किया। फिलहाल वह रायबरेली के जिलाधिकारी सूर्य पाल गंगवार के रचित गीतों और गजलों पर काम कर रहे हैं। इसकी आडियो रिकार्डिंग पूरी हो चुकी है इसका फिल्मांकन शेष है। भविष्य में उनका फिल्म इंस्टीट्यूट खोलने का इरादा है।
हासिल कर चुके हैं ऋषिकेष मुखर्जी एवार्ड
खुर्शीद अली खां को संगीत और गायकी के क्षेत्र में कई एवार्ड मिल चुके हैं। इसमें उल्लेखनीय है 1985 में सुर सिंगार संसद की ओर से फिल्म निर्माता निर्देशक ऋषिकेष मुखर्जी एवार्ड। शोभना एवार्ड, बेगम अख्तर एवार्ड, यूथ एवार्ड, वासलिया एवार्ड, कम्युनिटी एवार्ड, इंटेलेक्चुअल पीस एवार्ड, कमंडेशन एवार्ड, रोटरी, जेसीज क्लब सहित कई समाजिक व सांस्कृतिक संस्थाओं की ओर से भी सम्मानित हो चुके हैं।
पिछड़ रही है गजल गायकी
गजलों के लिए बेहतर माहौल नहीं बन पा रहा है। गायक खुर्शीद अली खां कहते हैं कि महफिलें खत्म हो गई। कद्रदान घट गए। इस लिए गजलों की खनक भी कम हो रही है। हालांकि वह मानते हैं कि फिर माहौल बनेगा और गजलों की महफिल सजेगी। हां इसके लिए नई पीढ़ी को उत्साह के साथ आगे आना होगा।