फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   Uttar Pradesh ›   Bareilly News ›   Administration game, farmers looted. Rich people earn crores

प्रशासन का खेल, किसान लुट गए.. अमीरों ने करोड़ों कमा लिए

Sun, 08 Oct 2017 01:50 AM IST
बरेली।
बरेली। Updated Sun, 08 Oct 2017 01:50 AM IST
विज्ञापन

विज्ञापन
सर्किल रेट के निर्धारण में पिछले कुछ सालों के दौरान हुआ खेल साफ तौर पर बता रहा है कि प्रशासन के अफसरों ने किस कदर अपने स्वार्थ के लिए किसानों को लुटवाकर अमीरों की जेबें भर दीं। बड़ा बाईपास से जुड़े 23 गांवों में वर्ष 2007 से 2016 के बीच तय हुए सर्किल रेट पर नजर डालें तो प्रशासन का पूरा खेल साफ तौर पर समझ आ जाता है। बड़ा बाईपास के लिए जिस वक्त जमीनों का अधिग्रहण किया जा रहा था, उस दौरान यहां सर्किल रेट नाम मात्र के थे। इसी दौरान कॉलोनाइजरों ने भी यहां अंधाधुंध ढंग से जमीनें खरीद लीं। इसके बाद जब बेतहाशा ढंग से यहां सर्किल रेट बढ़ने शुरू हुए और चार ही सालों में सात गुना ज्यादा तक बढ़ा दिए गए।
पीलीभीत रोड पर आबादी के विस्तार को देखते हुए आठ साल पहले प्रशासन ने प्रस्तावित बड़ा बाईपास के किनारे बसे 23 गांवों में सर्किल रेट बढ़ाकर 33 से 46 लाख हेक्टेयर कर दिए थे। दो साल बाद जब यहां बड़ा बाईपास के लिए जमीन अधिग्रहण का काम शुरू हुआ तो सर्किल रेट पांच लाख प्रति हेक्टेयर तक कम कर दिए गए। 2012-13 में किसानों को मुआवजा देने के लिए करार शुरू हुए तब भी यही स्थिति रही। बड़ा बाईपास के अहलादपुर, रुपापुर बढ़ौपुरा, नवदिया कुर्मियान, कलारी, गजरौला, उड़ला जागीर, मालीपुर अहमदपुर, पुरनापुर, फरीदापुर इनायत खां, लालपुर, आलमपुर समेत 23 गांवों के सर्किल रेट 2009-10 में न्यूनतम 33 लाख और अधिकतम 45 लाख रुपये प्रति हेक्टेयर थे। कालोनाइजर्स को भी पहले से ही पता था कि इन गांवों से होकर बड़ा बाईपास गुजरना है। लिहाजा वे किसानों से तय सर्किल रेट पर जमीनों खरीदते रहे। लेकिन जब 2011-12 में जब बड़ा बाईपास बनाने के लिए जमीन अधिग्रहण करने का काम शुरू हुआ तो प्रशासन ने सर्किल रेट 33 लाख से घटाकर 28 लाख कर दिए। 
विज्ञापन

वजह यह थी कि किसानों को मौजूदा सर्किल रेट के ही आधार पर मुआवजा दिया जाना था। हालांकि इसमें भी धांधली की शिकायतें सामने आईं। कुछ किसानों को न्यूनतम मुआवजा भी नहीं मिल पाया तो कुछ किसान निर्धारित से ज्यादा मुआवजा पा गए। ठीकठाक मुआवजा पाने वाले किसानों में केंद्रीय मंत्री संतोष गंगवार के गांव ट्यूलिया के भी किसान थे। इसके बाद जब जमीन अधिग्रहण की प्रक्रिया निर्माण एजेंसी ने पूरी कर ली और सर्किल रेट के आधार पर किसानों से मुआवजे के लिए करार करने का वक्त आया तो 2013 से 2017 के बीच इन गांवों का सर्किल न्यूनतम 70 लाख से अधिकतम दो करोड़ रुपये प्रति हेक्टेयर कर दिया। यानी सर्किल रेट चार ही सालों में सात गुना तक बढ़ गया। प्रशासन के इस खेल किसानों को तो भारी नुकसान हुआ लेकिन उनकी जमीनें खरीदने वाले कॉलोनाइजरों ने करोड़ों कमा लिए।
विज्ञापन
विज्ञापन


रामगंगा किनारे के गांवों में भी यही खेल  
रामगंगा नदी के किनारे के अखा, ढका, गुरऊ, खजुहाई समेत आधा दर्जन से ज्यादा गांवों के भी सर्किल रेट चार साल के अंदर पांच गुना तक बढ़ गए क्योंकि इन गांवों में पूंजीपतियों ने किसानों से सस्ती कीमत में (आठ से 10 हजार रुपये प्रति बीघा) जमीनें खरीदी थीं। बरेली, बदायूं, उत्तराखंड के रुद्रपुर और पंजाब के रियल एस्टेट कारोबारियों ने पहले से ही किसानों से सस्ती जमीन खरीदने की प्लानिंग कर ली थी। प्रशासन पूंजीपतियों को फायदा पहुंचाने के लिए बाजार रेट से चार या पांच गुना सर्किल रेट बढ़ाता रहा। चार साल पहले रामगंगा किनारे गांवों में जमीनों के सर्किल रेट आठ से 10 लाख रुपये प्रति बीघा थे जो 40 लाख रुपये प्रति हेक्टेयर तक पहुंच गए हैं। बदायूं रोड हाईवे किनारे जमीनों के सर्किल रेट एक करोड़ से भी ऊपर हैं। 

बड़ा बाईपास के इर्द-गिर्द ऐसे हुआ सर्किल रेट घटाने-बढ़ाने का खेल  
 गांव का नाम         2007-08     2009-10       2010-11        2012-13           2016-17
 अहलादपुर            7.8 लाख      33-45 लाख    28-45 लाख      28-45 लाख       70-200 लाख 
 रुपापुर बढ़ैपुरा        8.0 लाख       33-45 लाख    28-45 लाख     28-46 लाख       80-200 लाख 
 नवदिया कुर्मियान    8-9 लाख     33-45 लाख     28-45 लाख    28-45 लाख       80-200 लाख 
  कलारी                 8-9 लाख    33-45 लाख     28-45 लाख     28-45 लाख       70-200 लाख 
 गजरौला               8-9 लाख     33-45 लाख     28-45 लाख   28-45 लाख        80-200 लाख 

बड़ा बाईपास के मुआवजे में गड़बड़ी का मामला
किसान अपने परिवारों समेत 16 अक्तूबर भरेंगे जेल
बरेली।
बड़ा बाईपास की जमीन के मुआवजे में हेराफेरी किए जाने से किसान बेहद खफा हैं। अखिल भारतीय किसान महासभा के जिलाध्यक्ष हरिनंदन सिंह ने मुख्यमंत्री को भेजे पत्र में कहा है कि बड़ा बाईपास की भूमि के मुआवजा वितरण में हेराफेरी हुई है, लेकिन कोई सुनने को तैयार नहीं है। वे इसे लेकर 16 अक्टूबर से परिवार के साथ जेल भरेंगे।

किसान नेता हरिनंदन का कहना है कि बड़ा बाईपास पर मुआवजा बांटने में बड़ा खेल हुआ है। कुछ खास लोगों को फायदा पहुंचाने के लिए सर्किल रेट में खेल किया गया है। ट्यूलिया और परसाखेड़ा गांव के लोगों को अधिकतम सर्किल रेट से भी ज्यादा का भुगतान कर दिया गया जबकि 25 गांव को न्यूनतम सर्किल रेट से भी कम देने की कोशिश की जा रही है। यह किसानों के साथ अन्याय है। उनके साथ बेईमानी हुई है। किसान इसे किसी भी हाल में बर्र्दाश्त नहीं करेगा। मुआवजा दिलाने को लेकर डीएम से भी हमारी बात हुई थी, लेकिन अब वह भी कोई उनकी मदद नहीं करने को तैयार है। इसलिए हम इंसाफ के लिए 16 अक्टूबर से परिवार के साथ जेल भरो आंदोलन शुरू करने जा रहे हैं। 
विज्ञापन
विज्ञापन

रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News App, iOS Hindi News App और Amarujala Hindi News APP अपने मोबाइल पे|
Get all India News in Hindi related to live update of politics, sports, entertainment, technology and education etc. Stay updated with us for all breaking news from India News and more news in Hindi.

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed