CBSE Result: कोरोना ने माता-पिता को छीना... नहीं हारी हिम्मत, सीबीएसई की परीक्षा में अदीबा ने लहराया परचम
अदीबा ने 98.6 फीसदी अंकों के साथ 12वीं की परीक्षा उत्तीर्ण की है। वह जिले में तीसरे स्थान पर रहीं। अदीबा ने तमाम बाधाओं को लांघकर यह सफलता पाई है।
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बरेली में सेटेलाइट बस अड्डे के पास रहने वाली अदीबा के माता-पिता का कोरोना महामारी से निधन हो गया। इसके बावजूद अदीबा और उसके दो भाई-बहनों ने हार नहीं मानी। बड़ी बहन और भाई ने अदीबा का हौसला बढ़ाया। जिसका सुखद नतीजा सामने आया। मंगलवार को आए सीबीएसई के परीक्षा परिणाम में अदीबा ने 98.6 फीसदी अंकों के साथ 12वीं की परीक्षा उत्तीर्ण कर ली। साथ ही, वह जिले में तीसरे पायदान पर रहीं।
अदीबा ने बताया कि माता-पिता के निधन के बाद सभी भाई-बहन एक-दूसरे का संबल बनकर आगे बढ़े। बड़ी बहन एमटेक कर इंजीनियरिंग के क्षेत्र में कॅरिअर बना रही हैं। छोटा भाई नोएडा से मास्टर्स की पढ़ाई कर रहा है। स्वभाव से शांत, गंभीर और अनुशासित अदीबा अपने दिवंगत पिता के उसूलों से प्रेरणा लेकर आगे बढ़ती रहीं। वह बताती हैं कि उनके पिता की सादगी और विचारशीलता उनके जीवन की दिशा तय करने में सहायक बनी। उन्होंने पढ़ाई को ही अपना उद्देश्य बना लिया।
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दिन में 5-6 घंटे पढ़ाई
अदीबा ने दिनचर्या निर्धारित कर खुद को परीक्षा के लिए तैयार किया। दिन में 5 से 6 घंटे पढ़ाई, अनुशासन और आत्मनिर्भर सोच ने उन्हें इस मुकाम तक पहुंचाया। उन्होंने पढ़ाई के साथ संतुलन बनाते हुए सोशल मीडिया का सीमित और सकारात्मक उपयोग किया। अवकाश के दौरान में कोरियन ड्रामा देखना और संगीत सुनना उन्हें मानसिक सुकून देता है।
अदीबा सफलता को मंजिल नहीं, बल्कि एक शुरुआत मानती हैं। अब वह लॉ एंट्रेंस एग्जाम की तैयारी कर रही हैं और भविष्य में वकील बनने का सपना संजोए हुए हैं। उनका कहना है कि कठिन समय में परिवार का भावनात्मक सहयोग सबसे बड़ा सहारा बना।
पिता की मृत्यु के बाद मां ने संभाला, खुद भी बच्चों को पढ़ाया ट्यूशन
जिंगल बेल्स स्कूल की छात्रा युक्ता सिंह ने 10वीं की परीक्षा में 91.4 प्रतिशत अंक प्राप्त किए हैं। युक्ता के मुताबिक, उनके पिता डॉ. राजेंद्र पाल की चार जुलाई 2021 में ब्रेन हेमरेज से मृत्यु हो गई थी। इसके बाद उनकी मां सुनीता ने निजी स्कूल में जॉब कर भाई हिमांशु गौतम और उनकी परवरिश शुरू की। आर्थिक रूप से कमजोर होने की वजह से भाई की 10वीं की पुरानी किताबों से पढ़ाई की। जिन विषयों के पाठ्यक्रम बदल गए थे, उनकी किताबें लाइब्रेरी से ली।
वर्ष 2024 में मां की तबीयत खराब होने से उनकी नौकरी भी छूट गई। तब युक्ता ने भी अपनी पढ़ाई छोड़ने का मन बना लिया था। स्कूल के शिक्षकों ने उन्हें हिम्मत दी। पढ़ाई जारी रखी, लेकिन खर्च उठाने के लिए छोटे बच्चों को ट्यूशन देना शुरू कर दिया। इसके कुछ समय बाद मां ठीक हो गईं तो उन्होंने भी सहयोग शुरू कर दिया। इससे युक्ता ने बच्चों को ट्यूशन देना बंद कर परीक्षा की तैयारी पर फोकस किया। नतीजा, आज उनके सामने है।