Bareilly News: भूमि अधिग्रहण घोटाले में सिर्फ दो अफसरों पर गाज, बाकी पर कार्रवाई का इंतजार
बरेली-सितारगंज हाईवे के लिए भूमि अधिग्रहण में घोटाला सामने आने के बाद एनएचएआई के क्षेत्रीय अधिकारी संजीव कुमार शर्मा और परियोजना निदेशक बीपी पाठक का निलंबन हो चुका है। लेकिन अभी तक न तो कंसलटेंसी कंपनी को काम से रोका गया है और न ही कोई कार्रवाई की गई है।
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एनएचएआई से मोटा मुआवजा हड़पने के मामले में दो बड़े अधिकारी निलंबित किए जा चुके हैं, लेकिन मूल्यांकन के लिए ज्वाइंट मेजरमेंट सर्वे में हेराफेरी करने वाले राजस्व विभाग और निजी कंसल्टेंसी फर्म के कर्मचारी-अधिकारी अभी काम कर रहे हैं। अभी तक न तो कंसलटेंसी कंपनी को काम से रोका गया है और न ही कोई कार्रवाई की गई है।
राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण (एनएचएआई) बरेली-पीलीभीत-सितारगंज हाईवे के चौड़ीकरण पर काम कर रहा है। इसके लिए वर्ष 2021 से लगातार जमीन अधिग्रहण करके किसानों को मुआवजा देने का काम चल रहा है। इस काम में केवल सरकारी कर्मचारी ही नहीं बल्कि एनएचएआई की ओर से नियुक्त निजी कंसल्टेंसी कंपनी के कर्मचारी व अधिकारी भी लगाए गए हैं।
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ज्वाइंट मेजरमेंट सर्वे में खाली जमीन पर मकान, गोदाम और टीन शेड निर्माण दर्शाकर करोड़ों रुपये दिलाने में इस कंपनी के कुछ कर्मचारियों और अधिकारियों की भूमिका भी संदेह के दायरे में है। अगर मूल्यांकन और सर्वे के दौरान निजी कंपनी के कर्मचारी-अधिकारी हस्ताक्षर नहीं करते तो घोटाले की पत्रावली आगे अधिकारियों तक नहीं पहुंच पाती।
वहीं अधिकारी अगर हस्ताक्षर करने से पहले क्रॉस चेकिंग की जहमत उठाते तो यह नौबत न आती। अब पूरे घटनाक्रम में सवाल यह है कि एनएचएआई के दो अधिकारियों को जिम्मेदार ठहराने के बाद भ्रष्टाचार के सिस्टम में शामिल नीचे और ऊपर की कई कड़ियों को छोड़ क्यों दिया गया, जबकि सर्वे के साथ घोटाले की शुरुआत हुई और मूल्यांकन होने तक जारी रही।
इस तरह से जुड़ी कड़ी से कड़ी
हाईवे के चौड़ीकरण के लिए जमीन अधिग्रहण करते समय मूल्यांकन में फर्जीवाड़ा हुआ। भ्रष्टाचार के लिए कड़ी से कड़ी तब जुड़ी जब सरकारी, गैरसरकारी कर्मचारी-अधिकारी व मुनाफाखोरों के नेटवर्क आपस में मिल गए।
निजी कंसलटेंट कंपनी नियुक्त होने के साथ शुरुआत दिल्ली से हुई। एलाइनमेंट से लेकर भूमिवार सर्वे और मूल्यांकन तक का काम निजी कंसलटेंट कंपनी के पास होता है। कंपनी के अधिकारी-कर्मचारी मुआवजा वितरण से लेकर एनएचएआई को कब्जा दिलाने तक की प्रक्रिया में शामिल रहते हैं।
जांच एवं कार्रवाई के घेरे में आई निजी कंपनी
सर्वे और मूल्यांकन को लेकर फर्जीवाड़ा सामने आने के बाद एनएचएआई के परियोजना निदेशक प्रशांत दुबे ने निजी कंसलटेंसी कंपनी के बारे में अब एनएचएआई मुख्यालय को अवगत कराया है। इसमें एक दो दिन में कार्रवाई होने के आसार हैं।