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उपलब्धि : पशुओं से वातावरण में घुल रही मीथेन को कम करेगा मेथलो
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आईवीआरआई वैज्ञानिकों ने तैयार किया खाद्य उत्पाद, गाय, भैंस, भेड़, बकरी को मेथलो का सेवन कराने पर मीथेन उत्सर्जन का स्तर घटा
बरेली। ग्लोबल वार्मिंग के कई कारकों में मीथेन उत्सर्जन की भूमिका करीब 16 फीसदी है। इसमें भी 80 फीसदी उत्सर्जन गाय, भैंस, भेड़, बकरी जैसे जुगाली करने वाले पशु करते हैं। पशुओं से उत्सर्जित मीथेन को करीब 15 फीसदी तक कम करने में वैज्ञानिकों ने सफलता हासिल की है।
भारतीय पशु चिकित्सा अनुसंधान संस्थान के पशु पोषण विभाग के वैज्ञानिकों ने मेथलो उत्पाद तैयार किया है। दावा है कि इसके सेवन से पशु द्वारा मीथेन उत्सर्जन कम होगा। वरिष्ठ वैज्ञानिक डॉ. अंजू काला के मुताबिक मीथेन ग्रीनहाउस गैस है। इसका द्रव्यमान ग्लोबल वार्मिंग के अहम कारक कार्बन डाइऑक्साइड उत्सर्जन के समान द्रव्यमान से करीब 23 गुना ज्यादा होता है।
गाय, भैंस, भेड़, बकरी जैसे हरा चारा खाने वाले पशु पाचन क्रिया के दौरान मीथेन उत्सर्जित करते हैं। इसे कम करने के लिए तैयार उत्पाद मेथलो कारगर साबित हुआ है। बताया कि मीथेन की प्रक्रिया पशु के शरीर में बंद कर दी जाए तो भोजन की पाचन शक्ति बंद हो जाएगी। हालांकि, जब मेथलो का सेवन संस्थान के फार्म के पशुओं को कराया गया तो शुरुआत में 12 फीसदी और फिर उसकी क्षमता बढ़ाने पर करीब 15 फीसदी तक उत्सर्जन कम हुआ।
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वजन भी तेजी से बढ़ा और शारीरिक तनाव घटा
डॉ. अंजू काला के मुताबिक शोध में पशु पोषण विभाग के डॉ. एलसी चौधरी, डॉ. बीबी चतुर्वेदी, डॉ. जागृति सिंह का सहयोग रहा। करीब तीन वर्ष पूर्व शुरू हुआ शोध कार्य बीते दिनों पूरा हो चुका है। बताया कि इसके सेवन से मीथेन उत्सर्जन घटने के साथ पशुओं की सेहत में भी सुधार दिखा। गाय और भैंस का वजन तेजी से बढ़ा। विभिन्न परिस्थितियों में तनाव सहन की क्षमता बढ़ी। दूध उत्पादन में भी इजाफा हुआ।
हर्बल उत्पाद है मेथलो, एंटी ऑक्सीडेंट भी बढ़ा
वैज्ञानिकों के मुताबिक, मेथलो उत्पाद को जुगाली करने वाले पशुओं में आंतरिक मीथेन में कमी के लिए क्रमवार इन विट्रो और इन विवो परीक्षण किए गए। नतीजा रहा कि चारा सेवन के दौरान आहार में फाइबर का अंश बढ़ा। एंटी ऑक्सीडेंट स्थिति में सुधार हुआ। इससे एक सुरक्षित और हर्बल एंटी मीथेनोजेन के रूप में क्षमता बढ़ी। मेथलो वेजिटेबल प्रोडक्ट यानी औषधीय गुण वाले पौधे, मसाले और एसेंशियल तेलों से बनाया गया है। अमर उजाला ब्यूरो
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बरेली। ग्लोबल वार्मिंग के कई कारकों में मीथेन उत्सर्जन की भूमिका करीब 16 फीसदी है। इसमें भी 80 फीसदी उत्सर्जन गाय, भैंस, भेड़, बकरी जैसे जुगाली करने वाले पशु करते हैं। पशुओं से उत्सर्जित मीथेन को करीब 15 फीसदी तक कम करने में वैज्ञानिकों ने सफलता हासिल की है।
भारतीय पशु चिकित्सा अनुसंधान संस्थान के पशु पोषण विभाग के वैज्ञानिकों ने मेथलो उत्पाद तैयार किया है। दावा है कि इसके सेवन से पशु द्वारा मीथेन उत्सर्जन कम होगा। वरिष्ठ वैज्ञानिक डॉ. अंजू काला के मुताबिक मीथेन ग्रीनहाउस गैस है। इसका द्रव्यमान ग्लोबल वार्मिंग के अहम कारक कार्बन डाइऑक्साइड उत्सर्जन के समान द्रव्यमान से करीब 23 गुना ज्यादा होता है।
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गाय, भैंस, भेड़, बकरी जैसे हरा चारा खाने वाले पशु पाचन क्रिया के दौरान मीथेन उत्सर्जित करते हैं। इसे कम करने के लिए तैयार उत्पाद मेथलो कारगर साबित हुआ है। बताया कि मीथेन की प्रक्रिया पशु के शरीर में बंद कर दी जाए तो भोजन की पाचन शक्ति बंद हो जाएगी। हालांकि, जब मेथलो का सेवन संस्थान के फार्म के पशुओं को कराया गया तो शुरुआत में 12 फीसदी और फिर उसकी क्षमता बढ़ाने पर करीब 15 फीसदी तक उत्सर्जन कम हुआ।
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वजन भी तेजी से बढ़ा और शारीरिक तनाव घटा
डॉ. अंजू काला के मुताबिक शोध में पशु पोषण विभाग के डॉ. एलसी चौधरी, डॉ. बीबी चतुर्वेदी, डॉ. जागृति सिंह का सहयोग रहा। करीब तीन वर्ष पूर्व शुरू हुआ शोध कार्य बीते दिनों पूरा हो चुका है। बताया कि इसके सेवन से मीथेन उत्सर्जन घटने के साथ पशुओं की सेहत में भी सुधार दिखा। गाय और भैंस का वजन तेजी से बढ़ा। विभिन्न परिस्थितियों में तनाव सहन की क्षमता बढ़ी। दूध उत्पादन में भी इजाफा हुआ।
हर्बल उत्पाद है मेथलो, एंटी ऑक्सीडेंट भी बढ़ा
वैज्ञानिकों के मुताबिक, मेथलो उत्पाद को जुगाली करने वाले पशुओं में आंतरिक मीथेन में कमी के लिए क्रमवार इन विट्रो और इन विवो परीक्षण किए गए। नतीजा रहा कि चारा सेवन के दौरान आहार में फाइबर का अंश बढ़ा। एंटी ऑक्सीडेंट स्थिति में सुधार हुआ। इससे एक सुरक्षित और हर्बल एंटी मीथेनोजेन के रूप में क्षमता बढ़ी। मेथलो वेजिटेबल प्रोडक्ट यानी औषधीय गुण वाले पौधे, मसाले और एसेंशियल तेलों से बनाया गया है। अमर उजाला ब्यूरो