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Bareilly News: पत्नी की हत्या के मामले में आरोपी पति 32 साल बाद बरी
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बरेली। आग लगाकर पत्नी की हत्या करने के आरोप में जेल में बंद पति को अपर सत्र न्यायाधीश त्वरित न्यायालय प्रथम रवि कुमार दिवाकर ने दोषमुक्त करार दिया है। घटना के 32 साल बाद आरोपी पति को कोर्ट ने बरी कर दिया है। न्यायालय ने कहा कि मामले में कोई स्वतंत्र साक्ष्य या तथ्य प्रस्तुत नहीं किया गया है।
घटना कैंट थाना क्षेत्र में 13 मार्च 1993 को हुई थी। कानपुर देहात के रसूदाबाद थाना क्षेत्र के असालतगंज निवासी निर्मला का विवाह 23 अप्रैल 1992 में कैंट निवासी शिव गोविंद त्रिपाठी उर्फ राजू भारती के साथ हुआ था। वह सेना की आर्मी मेडिकल कोर में सिपाही के पद पर कार्यरत था। एक वर्ष बाद आग से झुलसकर निर्मला की मौत हो गई। मृतका के पिता कृष्ण कांत द्विवेदी ने दामाद शिव गोविंद के खिलाफ मुकदमा दर्ज कराया। 29 जून 2013 को आरोप पत्र न्यायालय में दाखिल किया गया। इस दौरान अभियोजन की ओर से दो गवाह और 14 साक्ष्य पेश किए गए। न्यायालय ने गवाहों को सुनने और साक्ष्यों का अवलोकन करने के बाद कहा कि कृष्णकांत द्विवेदी ने असत्य एवं निराधार कथनों के आधार पर शिव गोविंद के खिलाफ वाद दर्ज कराया है। मामले में कोई स्वतंत्र तथ्य का साक्षी न्यायालय के समक्ष प्रस्तुत नहीं हुआ है। इस वजह से शिव गोविंद त्रिपाठी को बरी कर दिया गया। कहा कि शिव गोविंद को 10 दिनों के भीतर 25 हजार का व्यक्तिगत बंध पत्र एवं समान धनराशि के दो प्रतिभूति दाखिल करने होंगे। ताकि किसी अपील होने की स्थिति में न्यायालय के समक्ष उपस्थित हो सकें। संवाद
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घटना कैंट थाना क्षेत्र में 13 मार्च 1993 को हुई थी। कानपुर देहात के रसूदाबाद थाना क्षेत्र के असालतगंज निवासी निर्मला का विवाह 23 अप्रैल 1992 में कैंट निवासी शिव गोविंद त्रिपाठी उर्फ राजू भारती के साथ हुआ था। वह सेना की आर्मी मेडिकल कोर में सिपाही के पद पर कार्यरत था। एक वर्ष बाद आग से झुलसकर निर्मला की मौत हो गई। मृतका के पिता कृष्ण कांत द्विवेदी ने दामाद शिव गोविंद के खिलाफ मुकदमा दर्ज कराया। 29 जून 2013 को आरोप पत्र न्यायालय में दाखिल किया गया। इस दौरान अभियोजन की ओर से दो गवाह और 14 साक्ष्य पेश किए गए। न्यायालय ने गवाहों को सुनने और साक्ष्यों का अवलोकन करने के बाद कहा कि कृष्णकांत द्विवेदी ने असत्य एवं निराधार कथनों के आधार पर शिव गोविंद के खिलाफ वाद दर्ज कराया है। मामले में कोई स्वतंत्र तथ्य का साक्षी न्यायालय के समक्ष प्रस्तुत नहीं हुआ है। इस वजह से शिव गोविंद त्रिपाठी को बरी कर दिया गया। कहा कि शिव गोविंद को 10 दिनों के भीतर 25 हजार का व्यक्तिगत बंध पत्र एवं समान धनराशि के दो प्रतिभूति दाखिल करने होंगे। ताकि किसी अपील होने की स्थिति में न्यायालय के समक्ष उपस्थित हो सकें। संवाद
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