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बगैर ड्यूटी किए गुपचुप तरीके से मानदेय ले रहीं आंगनबाड़ी वर्कर
न्यूज डेस्क,अमर उजाला,बरेली
Updated Wed, 27 Jun 2018 05:04 PM IST
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आंगनबाड़ी केंद्रों पर ड्यूटी किए बगैर बड़ी तादाद में आंगनबाड़ी वर्कर और सहायिका मानदेय ले रही हैं। इससे बाल विकास परियोजना को तो पलीता लग ही रहा है, सरकारी धन का भी दुरुपयोग हो रहा है। करीब डेढ़ सौ केंद्रों की जांच में ही 31 आंगनबाड़ी वर्कर और सहायिका ड्यूटी से गायब मिलीं हैं, जबकि जिलेभर में 22 सौ से ज्यादा केंद्रों का संचालन हो रहा है। जिला कार्यक्रम अधिकारी ने जल्द ही बड़े पैमाने पर चेकिंग करके ऐसी सहायिका और आंगनबाड़ी वर्कर की सेवाएं समाप्त करने की बात कही है। कुपोषण से लड़ने के लिए आंगनबाड़ी केंद्रों पर महिलाओं और बच्चों को पोषाहार बांटने की जिम्मेदारी कार्यकत्री और सहायिकाओं पर ही है, लेकिन विभागीय कर्मचारियों की मिलीभगत से बड़ी तादाद में कार्यकत्री और सहायिका बगैर ड्यूटी के ही गुपचुप तरीके से मानदेय ले रही हैं। इसका खुलासा तब हुआ जब 158 केद्रों की जांच में 18 कार्यकत्री और 13 सहायिका गायब मिलीं। इसमें फरीदपुर, नवाबगंज, भदपुरा, फतेहगंज पश्चिमी, आलमपुर जाफराबाद और शहर के 21 आंगनबाड़ी केंद्र हैं, जो बंद मिले थे। जिला कार्यक्रम अधिकारी युगल किशोर सांगुड़ी ने बताया कि इन सभी को नोटिस दिया जा रहा है। जवाब संतोषजनक न मिलने पर उनकी सेवाएं समाप्त करने की कार्रवाई होगी।
नहीं देती हैं ससुराल जाने की जानकारी, कागज पर चलती हैं सेवाएं
अगर किसी कार्यकत्री या सहायिका की शादी कहीं दूसरी जगह हो जाती है तो उसे अपनी सेवा समाप्ति के लिए विभाग को लिखित जानकारी देनी चाहिए, लेकिन ऐसे मामलों की इक्का-दुक्का सूचना ही आती हैं। विभागीय अधिकारी भी जांच नहीं करते हैं, लिहाजा कागजों पर ही सेवाएं चलती रहती हैं।
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नहीं देती हैं ससुराल जाने की जानकारी, कागज पर चलती हैं सेवाएं
अगर किसी कार्यकत्री या सहायिका की शादी कहीं दूसरी जगह हो जाती है तो उसे अपनी सेवा समाप्ति के लिए विभाग को लिखित जानकारी देनी चाहिए, लेकिन ऐसे मामलों की इक्का-दुक्का सूचना ही आती हैं। विभागीय अधिकारी भी जांच नहीं करते हैं, लिहाजा कागजों पर ही सेवाएं चलती रहती हैं।
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