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गुदड़ी के लाल, तंगहाली में कैसे करें कमाल
Bareilly
Updated Tue, 27 May 2014 05:38 AM IST
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बरेली। आर्थिक तंगी के बीच साल भर खूब पढ़ाई की। दिन रात एक कर नंबर भी अच्छे ले आए । इंटरमीडिएट के बाद इंजीनियर बनने के इच्छुक इन गुदड़ी के लाल अपने घर की तंग आर्थिक स्थिति से मायूस हैं। अब भी यूपी बोर्ड में 85 फीसदी से अधिक अंक पाना काफी कठिन माना जाता है। प्रथम श्रेणी में पास होना ही किसी चक्रव्यूह को तोड़ने जैसा है। इन गुदड़ी के लालों ने विपरीत परिस्थितियों में 85 फीसदी से ज्यादा अंक हासिल कर दिए। मैथ ग्रुप में कई स्टूडेंट के 90 से अधिक आए हैं। मनोहर भूषण इंटर कालेज के प्रतिभाशाली छात्र अभिषेक अग्रवाल ने 87.2 फीसदी अंक प्राप्त किए हैं। पिता लवकुश अग्रवाल पार्ट टाइम अकाउंटेंट हैं। अभिषेक इंजीनियर बनना चाहते हैं, मगर घर की आर्थिक स्थिति को देखकर मायूस से लगते हैं। विष्णु इंटर कालेज के संजय कुमार परीक्षा के समय बीमार हो गए थे। फिर भी इंटर में 79 फीसदी अंक प्राप्त कर इंटर की परीक्षा पास की। उपराष्ट्रपति से अच्छा मॉडल बनाने पर पुरस्कार भी मिल चुका है। पिता प्राइवेट इलेक्ट्रिशियन हैं। संजय कहते हैं कि उनका सपना आईआईटी से इंजीनियरिंग करने का है, अगर मेरा सलेक्शन नहीं हुआ तो साल भर फिर तैयारी करूंगा। मगर, फीस जमा करने के लिए एजुकेशन लोन लेना पड़ेगा। उपनेश यादव ने 88 फीसदी अंक प्राप्त किए। पिता साधू राम यादव टूल मैकेनिक हैं। इस होनहार छात्र ने यूपीटीयू की परीक्षा दी है। कहना है कि अगर सरकारी कॉलेज मिला तो पढ़ लेंगे नहीं तो बीएससी करेंगे। सत्यम विमल 85 फीसदी अंक से इंटर पास हुए। पिता छवि भूषण विमल इलेक्ट्रिशियन हैं, सत्यम आईआईटी करना चाहते हैं। मगर घर की आर्थिक स्थिति कमजोर होने के चलते पॉलीटेक्निक की परीक्षा देंगे। यही हाल 88.8 फीसदी अंक हासिल कर इंटर पास करने वाले चंदन सिंह का है। भौतिक विज्ञान में इनके सबसे अधिक 98 और मैथ में 95 अंक है। भौतिक विज्ञान के प्रवक्ता वीके तिवारी बताते हैं कि साइंस स्ट्रीम से पढ़ने वाले बच्चाें का सपना तो इंजीनियरिंग करने का है मगर, आर्थिक तंगी इसमें आड़े आ रही है।
मेधावी लड़कियों पर सवार ‘नीली बत्ती’ की धुन
बरेली। यूपी बोर्ड की मेधावी छात्राओं को नीलीबत्ती यानी कि अफसर बनने की धुन सवार है। मैथ और बायोलॉजी ग्रुप से पढ़ाई करने के बावजूद भी कांति कपूर बालिका इंटर कालेज की छात्राएं आईएएस बनना चाहती हैं। इनका मानना है कि समाजसेवा पावर मिलने पर ही हो सकती है।
सुपरवाइजर जयपाल गंगवार और बीना गंगवार की बेटी काजल गंगवार आईएएस में आना चाहती हैं। पांच घंटे नियमित पढ़ाई करने वाली इस मेधावी छात्रा का मानना है कि देश और समाज की सेवा पावर मिलने पर ही हो सकती है। 89.41 फीसदी अंक हासिल करने वाली रूबी ने बिना कोचिंग के पढ़ाई की। स्वामी विवेकानंद को अपना आदर्श बताने वाली रूबी आईएएस बनकर भ्रष्टाचार को दूर करूंगी। 92.2 प्रतिशत अंक पाने वाली हर्षा सक्सेना का कहना है कि भ्रष्टाचार ने देश को खोखला कर रखा है, आईएएस बनकर इसे दूर करना है। यह पूछने पर कि आईएएस लॉबी में भी भ्रष्ट हैं, इसपर हर्षा कहती हैं कि सब एक जैसे नहीं होते।
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मेधावी लड़कियों पर सवार ‘नीली बत्ती’ की धुन
बरेली। यूपी बोर्ड की मेधावी छात्राओं को नीलीबत्ती यानी कि अफसर बनने की धुन सवार है। मैथ और बायोलॉजी ग्रुप से पढ़ाई करने के बावजूद भी कांति कपूर बालिका इंटर कालेज की छात्राएं आईएएस बनना चाहती हैं। इनका मानना है कि समाजसेवा पावर मिलने पर ही हो सकती है।
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सुपरवाइजर जयपाल गंगवार और बीना गंगवार की बेटी काजल गंगवार आईएएस में आना चाहती हैं। पांच घंटे नियमित पढ़ाई करने वाली इस मेधावी छात्रा का मानना है कि देश और समाज की सेवा पावर मिलने पर ही हो सकती है। 89.41 फीसदी अंक हासिल करने वाली रूबी ने बिना कोचिंग के पढ़ाई की। स्वामी विवेकानंद को अपना आदर्श बताने वाली रूबी आईएएस बनकर भ्रष्टाचार को दूर करूंगी। 92.2 प्रतिशत अंक पाने वाली हर्षा सक्सेना का कहना है कि भ्रष्टाचार ने देश को खोखला कर रखा है, आईएएस बनकर इसे दूर करना है। यह पूछने पर कि आईएएस लॉबी में भी भ्रष्ट हैं, इसपर हर्षा कहती हैं कि सब एक जैसे नहीं होते।
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