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बेटे का ब्याह कर दुनिया से चल बसे पति पत्नी
Bareilly
Updated Wed, 23 Apr 2014 05:34 AM IST
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बहेड़ी। अभी तीन दिन पहले हुए इकलौते बेटे के ब्याह की खुशियां घर के गोसे-गोसे में चहक रही थीं कि अचानक तीन घंटे के अंतराल में हर तरफ मातम पसर गया। दूल्हे के सिर से पहले पिता का साया उठा और फिर वहीं विलाप करते करते मां भी हमेशा के लिए खामोश हो गई। बहुत कारुणिक वातावरण में दोपहर बाद दोनों के शवों का यहां के रामलीला मैदान के पास के श्मशान स्थल पर अंतिम संस्कार कर दिया गया।
मोहल्ला शेखूपुरा निवासी 61 वर्षीय मथुरा प्रसाद नगर पालिका में सफाई कर्मचारी के पद से करीब एक साल पहले ही रिटायर हुए थे। वह अपनी पत्नी मुन्नी देवी (55) व इकलौते पुत्र मिथुन के साथ रहते थे। मथुरा प्रसाद अचानक पीलिया की बीमारी की चपेट में आकर इलाज करा रहे थे। बताया जाता है कि दो दिनाें से उन्हें वायरल बुखार भी हो गया था। 19 अप्रैल को दंपति के इकलौते बेटे मिथुन की शादी पुनई गांव की लड़की के साथ हुई थी। 20 अप्रैल को बहू को लेकर बारात वापस लौटी तो दंपति के चेहरे पर खुशी की चमक थी। एक दिन बाद ही 21 अप्रैल की रात करीब साढ़े आठ बजे मथुरा प्रसाद का अचानक निधन हो गया। पति की मौत से विकल हुई उनकी पत्नी तीन घंटे तक शव के पास बैठी रोती-चिल्लाती रहीं। अचानक उनका रोना-चीखना भी बंद हो गया। इस पर बेटे ने पास जाकर देखा तो मां भी अपने प्राण त्याग चुकी थीं।आस-पड़ोस में यह खबर फैली तो लोगों का हुजूम उनके घर पर उमड़ पड़ा। दोपहर बाद दोनों के शवों को ले जाकर बांसी मठ के श्मशान स्थल पर उनका अंतिम संस्कार कर दिया गया।
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मोहल्ला शेखूपुरा निवासी 61 वर्षीय मथुरा प्रसाद नगर पालिका में सफाई कर्मचारी के पद से करीब एक साल पहले ही रिटायर हुए थे। वह अपनी पत्नी मुन्नी देवी (55) व इकलौते पुत्र मिथुन के साथ रहते थे। मथुरा प्रसाद अचानक पीलिया की बीमारी की चपेट में आकर इलाज करा रहे थे। बताया जाता है कि दो दिनाें से उन्हें वायरल बुखार भी हो गया था। 19 अप्रैल को दंपति के इकलौते बेटे मिथुन की शादी पुनई गांव की लड़की के साथ हुई थी। 20 अप्रैल को बहू को लेकर बारात वापस लौटी तो दंपति के चेहरे पर खुशी की चमक थी। एक दिन बाद ही 21 अप्रैल की रात करीब साढ़े आठ बजे मथुरा प्रसाद का अचानक निधन हो गया। पति की मौत से विकल हुई उनकी पत्नी तीन घंटे तक शव के पास बैठी रोती-चिल्लाती रहीं। अचानक उनका रोना-चीखना भी बंद हो गया। इस पर बेटे ने पास जाकर देखा तो मां भी अपने प्राण त्याग चुकी थीं।आस-पड़ोस में यह खबर फैली तो लोगों का हुजूम उनके घर पर उमड़ पड़ा। दोपहर बाद दोनों के शवों को ले जाकर बांसी मठ के श्मशान स्थल पर उनका अंतिम संस्कार कर दिया गया।
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