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एक-दूसरे पर ईंट-पत्थर और गोलियां बरसाते रहे उपद्रवी
Bareilly
Updated Sat, 26 Jan 2013 05:30 AM IST
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बरेली। हमेशा शांत रहा मुरावपुरा शुक्रवार को एकाएक उपद्रव की गिरफ्त में आ गया। रोज साथ-साथ उठने, बैठने और रहने वाले लोग दो घंटे तक एक-दूसरे की जान लेने पर तुले रहे रहे। इस बीच पुलिस को भी कई बार मुचैटा लेना पड़ा।
विरोध तब शुरू हुआ जब अंजुमन दूसरी बस्ती के करीब पहुंची। शाम चार बजे विरोध ने उपद्रव का रूप ले लिया। पहले दो पक्षों के बीच ईंट-पत्थर और गोलियां चलीं। लाठी चार्ज करने पर उपद्रवियों ने पुलिस को भी अपना निशाना बनाया। फिर तो समूचे मुरावपुरा गांव में अराजकता का माहौल बन गया। महिलाएं, बच्चे, बड़े, बूढ़े अपने हाथों में डंडे, बांस, बल्ली और ईंट-पत्थर लिए छतों, गांव की गलियों में नजर आ रहे थे। पुलिस के दौड़ाने पर उपद्रवी खेतों की तरफ भाग जाते। कभी उपद्रवी पथराव करके पुलिस को पीछे हटा देते थे। इसी माहौल के बीच आसपास गांवों और शहर से तमाम लोग मुरावपुरा चारो ओर जमा हो गए। उन लोगों ने गांव के किनारे बसे घरों पर पथराव किया। उन घरों में मौजूद लोगों ने अपने हिसाब से मुकाबला किया।
कुछ युवक छुपने के लिए गन्ने के खेत में घुसे तो लोगों ने उनके बाहर निकलने का इंतजार किया। जैसे ही वे बाहर निकले, घात लगाकर बैठे लोगों ने उन पर हमला बोल दिया। जमकर पीटा। बदन पर एक कपड़ा नहीं रहने दिया। उसी हालत में पिटे लोगों ने शहर की ओर दौड़ लगा दी। यहां बता दें कि मुरावपुरा की खादर के उन गांवों में शुमार हैं, जहां आज भी पूरे साल भर नाई चाचा बिना कोई पैसे लिए लोगों की हजामत बनाते हैं। फसल कटने पर ही उन्हें हर परिवार से अनाज मिलता है। इस गांव में शाम करीब छह बजे भारी संख्या में पीएसी और पुलिस मौके पर पहुंची और पूरा गांव छावनी में तब्दील हो गया। कहीं तब जाकर उपद्रवी बाज आए।
विरोध तब शुरू हुआ जब अंजुमन दूसरी बस्ती के करीब पहुंची। शाम चार बजे विरोध ने उपद्रव का रूप ले लिया। पहले दो पक्षों के बीच ईंट-पत्थर और गोलियां चलीं। लाठी चार्ज करने पर उपद्रवियों ने पुलिस को भी अपना निशाना बनाया। फिर तो समूचे मुरावपुरा गांव में अराजकता का माहौल बन गया। महिलाएं, बच्चे, बड़े, बूढ़े अपने हाथों में डंडे, बांस, बल्ली और ईंट-पत्थर लिए छतों, गांव की गलियों में नजर आ रहे थे। पुलिस के दौड़ाने पर उपद्रवी खेतों की तरफ भाग जाते। कभी उपद्रवी पथराव करके पुलिस को पीछे हटा देते थे। इसी माहौल के बीच आसपास गांवों और शहर से तमाम लोग मुरावपुरा चारो ओर जमा हो गए। उन लोगों ने गांव के किनारे बसे घरों पर पथराव किया। उन घरों में मौजूद लोगों ने अपने हिसाब से मुकाबला किया।
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कुछ युवक छुपने के लिए गन्ने के खेत में घुसे तो लोगों ने उनके बाहर निकलने का इंतजार किया। जैसे ही वे बाहर निकले, घात लगाकर बैठे लोगों ने उन पर हमला बोल दिया। जमकर पीटा। बदन पर एक कपड़ा नहीं रहने दिया। उसी हालत में पिटे लोगों ने शहर की ओर दौड़ लगा दी। यहां बता दें कि मुरावपुरा की खादर के उन गांवों में शुमार हैं, जहां आज भी पूरे साल भर नाई चाचा बिना कोई पैसे लिए लोगों की हजामत बनाते हैं। फसल कटने पर ही उन्हें हर परिवार से अनाज मिलता है। इस गांव में शाम करीब छह बजे भारी संख्या में पीएसी और पुलिस मौके पर पहुंची और पूरा गांव छावनी में तब्दील हो गया। कहीं तब जाकर उपद्रवी बाज आए।
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