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लाखाें का लालच देकर ‘लूटा’
Bareilly
Updated Sat, 19 Jan 2013 05:31 AM IST
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बरेली। मोबाइल टॉवर लगाने के बहाने कुछ लोगों ने एक रेलवे कर्मचारी के विकलांग बेटे को लाखों रुपये का लालच देकर सात हजार रुपये ठग लिए। इस मामले में आईजी के आदेश पर सुभाषनगर पुलिस ने नोएडा की एक कंपनी के मैनेजर समेत दो के खिलाफ मुकदमा दर्ज किया है।
नार्दर्न रेलवे के कैरिज एंड वैगन के क्लीनर राजेंद्र गौड़ का परिवार साउथ रेलवे कॉलोनी में रहता है। तीन माह पहले क्लीनर के विकलांग बेटे विवेक ने विज्ञापन में छपे नंबर पर फोन किया। फोन रिसीव करने वाली युवती ने अपना नाम प्रीति बताया। विवेक ने प्रीति को बताया कि गोरखपुर के भक्सा गांव में उन्हें टॉवर लगवाना है। इस पर प्रीति ने उनको एसबीआई कानपुर का खाता संख्या दिया और बताया कि यह खाता उनकी नोएडा के सेक्टर -18 जे-5 स्थित ‘थ्री जी’ कंपनी के मैनेजर का है। इसमें 7001 रुपये जमा करने के बाद बताए गए पते पर टॉवर लग जाएगा और पहले महीने से ही 20 हजार रुपये मिलने लगेंगे। बाद में कंपनी उन्हें 30 लाख रुपये एडवांस देगी। विवेक ने प्रीति के बताए खाते में रुपये जमा कर दिए।
इसके बाद प्रीति ने 30 लाख के टैक्स के बहाने 28 हजार रुपये और खाते में डालने को फोन करने शुरू कर दिए। विवेक और उसके पिता ने इससे इंकार किया तो प्रीति 14 हजार रुपये देने को कहने लगी। इस दौरान विवेक ने कंपनी के बारे में जानकारी की तो पता चला कि इस तरह कहीं टॉवर नहीं लगाए जाते हैं। अब प्रीति का मोबाइल बंद आ रहा है।
नार्दर्न रेलवे के कैरिज एंड वैगन के क्लीनर राजेंद्र गौड़ का परिवार साउथ रेलवे कॉलोनी में रहता है। तीन माह पहले क्लीनर के विकलांग बेटे विवेक ने विज्ञापन में छपे नंबर पर फोन किया। फोन रिसीव करने वाली युवती ने अपना नाम प्रीति बताया। विवेक ने प्रीति को बताया कि गोरखपुर के भक्सा गांव में उन्हें टॉवर लगवाना है। इस पर प्रीति ने उनको एसबीआई कानपुर का खाता संख्या दिया और बताया कि यह खाता उनकी नोएडा के सेक्टर -18 जे-5 स्थित ‘थ्री जी’ कंपनी के मैनेजर का है। इसमें 7001 रुपये जमा करने के बाद बताए गए पते पर टॉवर लग जाएगा और पहले महीने से ही 20 हजार रुपये मिलने लगेंगे। बाद में कंपनी उन्हें 30 लाख रुपये एडवांस देगी। विवेक ने प्रीति के बताए खाते में रुपये जमा कर दिए।
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इसके बाद प्रीति ने 30 लाख के टैक्स के बहाने 28 हजार रुपये और खाते में डालने को फोन करने शुरू कर दिए। विवेक और उसके पिता ने इससे इंकार किया तो प्रीति 14 हजार रुपये देने को कहने लगी। इस दौरान विवेक ने कंपनी के बारे में जानकारी की तो पता चला कि इस तरह कहीं टॉवर नहीं लगाए जाते हैं। अब प्रीति का मोबाइल बंद आ रहा है।
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