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फकीरी लिबास पहनकर हुसैन को याद किया
Bareilly
Updated Tue, 20 Nov 2012 12:00 PM IST
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बरेली। मोहर्रम पर खानकाह-ए-नियाजिया में लोगों ने हरे रंग का फकीरी लिबास पहनकर इस्लाम को जिंदा रखने के लिए कर्बला में शहीद हुए हजरत इमाम हसन और हुसैन को याद किया। खानकाह में अलम और ताजिए भी सजे। भूड़ से निकले तख्त के जुलूस में भारी तादाद में लोगों ने हिस्सा लेकर या हुसैन की सदा बुलंद की। शिया समुदाय के इमामबाड़ों में मजलिसें सजीं और इनमें कर्बला का बयान किया गया।
खानकाह-ए-नियाजिया के सज्जादानशीन हसनैन मियां और मैनेजर शब्बू मियां के साथ उनके परिवार के तमाम लोगों के अलावा हर साल की तरह फकीरी लिबास पहना। बताया गया कि हिंदुस्तान की सभी दरगाहों में मोहर्रम पर हरे रंग का लिबास पहनकर नियाज की जाती है। प्रबंधक शब्बू मियां ने बताया कि हरा हमारे नवी के रोजे का रंग है। यह रंग सच्चा ईमान और हुसेनियत की पहचान बन गया है। भारी संख्या में पहुंचे अकीदतमंदों ने शहीदे कर्बला को याद किया। सोमवार रात को भूड़ से सूफी अनवार का तख्त निकला। लोगों ने तख्त की ज्यारत कर या हुसैन की सदा बुलंद की। मंगलवार को यह तख्त दीवानखाना होते हुए कोहाड़ापीर जाकर अपने नियत स्थान पर समाप्त हो जाएगा। मोहल्ला कं घी टोला में शिया समुदाय के इमामबाड़ा छिद्दी मोहम्मद में हुई मजलिस में आजमगढ़ से आए मौलाना तकी मुर्तजा ने कर्बला की शहादत बयान की। गढ़ैया में हुई मजलिस को कानपुर से आईं सरताज जफर ने खिताब किया। इस मौके पर समर अब्बास जैदी, अनवर हुसैन, जमाल जैदी, अली हाशिम, कल्बे हुसैन, मंजर रिजवी, अली आलिम आदि मौजूद रहे।
खानकाह-ए-नियाजिया में हिंदू परिवारों की भी हाजिरी
मोहर्रम के मौके पर खानकाह-ए-नियाजिया में हाजिरी देने हिंदू परिवारों के पहुंचने का भी सिलसिला बना हुआ है। कई परिवार ऐसे हैं जो हर साल यहां आते हैं। सोमवार को हरदोई के कसबा पाली में रहने वाले संजय पांडे अपनी पत्नी रंजना पांडे के साथ यहां हाजिरी देने पहुंचे। खानकाह के प्रवक्ता जाहिद मियां नियाजी ने बताया कि मुस्लिम ही नहीं तमाम गैर मुस्लिम भी हर साल मोहर्रम के दौरान खानकाह पहुंचते हैं।
खानकाह-ए-नियाजिया के सज्जादानशीन हसनैन मियां और मैनेजर शब्बू मियां के साथ उनके परिवार के तमाम लोगों के अलावा हर साल की तरह फकीरी लिबास पहना। बताया गया कि हिंदुस्तान की सभी दरगाहों में मोहर्रम पर हरे रंग का लिबास पहनकर नियाज की जाती है। प्रबंधक शब्बू मियां ने बताया कि हरा हमारे नवी के रोजे का रंग है। यह रंग सच्चा ईमान और हुसेनियत की पहचान बन गया है। भारी संख्या में पहुंचे अकीदतमंदों ने शहीदे कर्बला को याद किया। सोमवार रात को भूड़ से सूफी अनवार का तख्त निकला। लोगों ने तख्त की ज्यारत कर या हुसैन की सदा बुलंद की। मंगलवार को यह तख्त दीवानखाना होते हुए कोहाड़ापीर जाकर अपने नियत स्थान पर समाप्त हो जाएगा। मोहल्ला कं घी टोला में शिया समुदाय के इमामबाड़ा छिद्दी मोहम्मद में हुई मजलिस में आजमगढ़ से आए मौलाना तकी मुर्तजा ने कर्बला की शहादत बयान की। गढ़ैया में हुई मजलिस को कानपुर से आईं सरताज जफर ने खिताब किया। इस मौके पर समर अब्बास जैदी, अनवर हुसैन, जमाल जैदी, अली हाशिम, कल्बे हुसैन, मंजर रिजवी, अली आलिम आदि मौजूद रहे।
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खानकाह-ए-नियाजिया में हिंदू परिवारों की भी हाजिरी
मोहर्रम के मौके पर खानकाह-ए-नियाजिया में हाजिरी देने हिंदू परिवारों के पहुंचने का भी सिलसिला बना हुआ है। कई परिवार ऐसे हैं जो हर साल यहां आते हैं। सोमवार को हरदोई के कसबा पाली में रहने वाले संजय पांडे अपनी पत्नी रंजना पांडे के साथ यहां हाजिरी देने पहुंचे। खानकाह के प्रवक्ता जाहिद मियां नियाजी ने बताया कि मुस्लिम ही नहीं तमाम गैर मुस्लिम भी हर साल मोहर्रम के दौरान खानकाह पहुंचते हैं।
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