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यौम-ए-अशूरा के दिन ही आएगी कयामत
Bareilly
Updated Sat, 17 Nov 2012 12:00 PM IST
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बरेली। मोहर्रम पर पैगंबर-ए-इस्लाम के नवासे हजरत इमाम हुसैन की शहादत की याद ताजा हो जाती है। किसी शायर ने कहा भी है- कत्ले हुसैन असल में मरगे यजीद है, इस्लाम जिंदा होता है हर करबला के बाद। करबला की जंग में हजरत इमाम हुसैन की शहादत हर धर्म के लोगों के लिए मिसाल है।
यह जंग बताती है कि जुल्म के आगे कभी नहीं झुकना चाहिए, चाहे इसके लिए सिर ही क्यों न कट जाए। अल्लाह ने फरमाया है कि कयामत भी यौम-ए-अशूरा के दिन ही आएगी। इस्लामिक नए साल की दस तारीख को नवासा-ए-रसूल इमाम हुसैन अपने 72 साथियों और परिवार के साथ मजहबे इस्लाम को बचाने, हक और इंसाफ कोे जिंदा रखने के लिए शहीद हो गए थे। नबी ने फरमाया है कि अल्लाह उससे मोहब्बत करता है, जो हुसैन से मोहब्बत करता है। यौम-ए-अशूरा के दिन रोजा रखें तो उसके साथ नवीं तारीख या ग्याहरवीं तारीख को भी रोजा रखना चाहिए। अल्लाह ने यौम-ए-अशूरा के दिन आसमानों, पहाड़ों, जमीन और समुद्रों को पैदा किया। इसी दिन हजरत इब्राहीम पैदा हुए। फरिश्तों को भी इसी दिन पैदा किया। फिरऔन को इसी दिन दरिया-ए-नील में गर्क किया गया। हजरत सुलेमान अलैहिस्सलाम को जिन्नों और इंसों पर हुकूमत इसी दिन अता हुई। हजरत आदम अलैहिस्सलाम की तौबा भी अल्लाह ने इसी दिन कुबूल की। दुुनिया में सबसे पहली बारिश भी यौमे अशूरा के दिन ही हुई।
यह जंग बताती है कि जुल्म के आगे कभी नहीं झुकना चाहिए, चाहे इसके लिए सिर ही क्यों न कट जाए। अल्लाह ने फरमाया है कि कयामत भी यौम-ए-अशूरा के दिन ही आएगी। इस्लामिक नए साल की दस तारीख को नवासा-ए-रसूल इमाम हुसैन अपने 72 साथियों और परिवार के साथ मजहबे इस्लाम को बचाने, हक और इंसाफ कोे जिंदा रखने के लिए शहीद हो गए थे। नबी ने फरमाया है कि अल्लाह उससे मोहब्बत करता है, जो हुसैन से मोहब्बत करता है। यौम-ए-अशूरा के दिन रोजा रखें तो उसके साथ नवीं तारीख या ग्याहरवीं तारीख को भी रोजा रखना चाहिए। अल्लाह ने यौम-ए-अशूरा के दिन आसमानों, पहाड़ों, जमीन और समुद्रों को पैदा किया। इसी दिन हजरत इब्राहीम पैदा हुए। फरिश्तों को भी इसी दिन पैदा किया। फिरऔन को इसी दिन दरिया-ए-नील में गर्क किया गया। हजरत सुलेमान अलैहिस्सलाम को जिन्नों और इंसों पर हुकूमत इसी दिन अता हुई। हजरत आदम अलैहिस्सलाम की तौबा भी अल्लाह ने इसी दिन कुबूल की। दुुनिया में सबसे पहली बारिश भी यौमे अशूरा के दिन ही हुई।
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