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अब सुधरेंगी विवि की कक्षाएं और लाइब्रेरी
Updated Thu, 15 Jun 2017 09:55 PM IST
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बरेली।
रुहेलखंड विश्वविद्यालय में संसाधन बढ़ाने और शिक्षा की गुणवत्ता सुधारने के लिए मानव संसाधन विकास मंत्रालय की ओर से 15 करोड़ रुपये का बजट स्वीकृत हो गया है। मंत्रालय और वर्ल्ड बैंक के सहयोग से टेक्निकल एजुकेशन क्वालिटी इंप्रूवमेंट प्रोग्राम के तहत विश्वविद्यालय को धनराशि जारी की गई है। साथ ही विश्वविद्यालय प्रशासन परिसर में सुविधाआें को बढ़ाने के लिए तैयारी में भी जुट गया है।
बृहस्पतिवार को इस संबंध में जानकारी देते हुए कुलपति प्रो. एके शुक्ला ने बताया कि विश्वविद्यालय की लाइब्रेरी, क्लास रूम और प्रयोगशालाओं में सुधार के लिए यह प्रोग्राम लांच किया गया है। योजना के दूसरे चरण में रुहेलखंड विश्वविद्यालय का चयन हुआ। उन्होंने बताया कि 2014 में मानव संसाधन मंत्रालय ने विश्वविद्यालय को 10 करोड़ रुपये का बजट स्वीकृत किया था। ग्रांट से यूनिवर्सिटी ने स्मार्ट क्लासेस बनवाने के साथ सेंट्रल लाइब्रेरी के लिए किताबें खरीदीं और विभागों की लाइब्रेरी बनवाई। साढ़े पांच करोड़ रुपये से लैब के लिए उपकरण खरीद हुई थी।
15 करोड़ से सुधारेंगे सूरत
कुलपति ने यह भी जानकारी दी कि विश्वविद्यालय प्रशासन शैक्षिक गुणवत्ता सुधारने में जुट गया है। स्वीकृत 15 करोड़ रुपये के बजट से विश्वविद्यालय पीजी कोर्स शुरू करने के साथ ही प्रयोगशाला को आधुनिक बनाएगा। क्लास रूम में पढ़ाए जाने वाले लेक्चर रिकार्ड होकर ऑटोमैटिक ई-मेल के माध्यम से स्टूडेंट के पास पहुंचे इसके लिए भी व्यवस्था की जाएगी। ई बुक्स, ई जनरल्स और पढ़ाई से संबंधित सॉफ्टवेयर भी खरीदे जाएंगे।
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लापरवाही से कट गए थे ढाई करोड़ रुपये
दूसरे चरण में जब विश्वविद्यालय का चयन हुआ तो उसमें 10 करोड़ रुपये मिलने थे, लेकिन विश्वविद्यालय प्रशासन की ओर से सिर्फ साढ़े सात करोड़ रुपये का ही प्रस्ताव बनाकर भेजा गया। विश्वविद्यालय के लिए मंत्रालय की ओर से ढाई करोड़ रुपये घटाकर साढ़े सात करोड़ रुपये ही जारी किए गए। इसकी मदद से कई कार्य हुए।
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रुहेलखंड विश्वविद्यालय में संसाधन बढ़ाने और शिक्षा की गुणवत्ता सुधारने के लिए मानव संसाधन विकास मंत्रालय की ओर से 15 करोड़ रुपये का बजट स्वीकृत हो गया है। मंत्रालय और वर्ल्ड बैंक के सहयोग से टेक्निकल एजुकेशन क्वालिटी इंप्रूवमेंट प्रोग्राम के तहत विश्वविद्यालय को धनराशि जारी की गई है। साथ ही विश्वविद्यालय प्रशासन परिसर में सुविधाआें को बढ़ाने के लिए तैयारी में भी जुट गया है।
बृहस्पतिवार को इस संबंध में जानकारी देते हुए कुलपति प्रो. एके शुक्ला ने बताया कि विश्वविद्यालय की लाइब्रेरी, क्लास रूम और प्रयोगशालाओं में सुधार के लिए यह प्रोग्राम लांच किया गया है। योजना के दूसरे चरण में रुहेलखंड विश्वविद्यालय का चयन हुआ। उन्होंने बताया कि 2014 में मानव संसाधन मंत्रालय ने विश्वविद्यालय को 10 करोड़ रुपये का बजट स्वीकृत किया था। ग्रांट से यूनिवर्सिटी ने स्मार्ट क्लासेस बनवाने के साथ सेंट्रल लाइब्रेरी के लिए किताबें खरीदीं और विभागों की लाइब्रेरी बनवाई। साढ़े पांच करोड़ रुपये से लैब के लिए उपकरण खरीद हुई थी।
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15 करोड़ से सुधारेंगे सूरत
कुलपति ने यह भी जानकारी दी कि विश्वविद्यालय प्रशासन शैक्षिक गुणवत्ता सुधारने में जुट गया है। स्वीकृत 15 करोड़ रुपये के बजट से विश्वविद्यालय पीजी कोर्स शुरू करने के साथ ही प्रयोगशाला को आधुनिक बनाएगा। क्लास रूम में पढ़ाए जाने वाले लेक्चर रिकार्ड होकर ऑटोमैटिक ई-मेल के माध्यम से स्टूडेंट के पास पहुंचे इसके लिए भी व्यवस्था की जाएगी। ई बुक्स, ई जनरल्स और पढ़ाई से संबंधित सॉफ्टवेयर भी खरीदे जाएंगे।
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लापरवाही से कट गए थे ढाई करोड़ रुपये
दूसरे चरण में जब विश्वविद्यालय का चयन हुआ तो उसमें 10 करोड़ रुपये मिलने थे, लेकिन विश्वविद्यालय प्रशासन की ओर से सिर्फ साढ़े सात करोड़ रुपये का ही प्रस्ताव बनाकर भेजा गया। विश्वविद्यालय के लिए मंत्रालय की ओर से ढाई करोड़ रुपये घटाकर साढ़े सात करोड़ रुपये ही जारी किए गए। इसकी मदद से कई कार्य हुए।