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पिता को मुखाग्नि देकर बेटी ने तोड़ी सामाजिक बेड़ियां
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बरेली। बेटियां समाज की कुरीतियों को तोड़कर आगे बढ़ने लगी हैं। बरेली में एक बेटी ने अपने पिता की चिता को मुखाग्नि देकर समाज की उस कुरीति को तोड़ा है, जिसमें बेटा ही मुखाग्नि देने का अधिकार रखता है। बेटी ने पिता को मुखाग्नि दी तो संजयनगर श्मशान भूमि पर मौजूद हर किसी की निगाहें उसके चेहरे पर टिकी हुई थीं।
सामाजिक बेड़ियों को तोड़ने का यह फैसला करने वाली किरण सक्सेना भाजपा की महिला मोर्चा प्रकोष्ठ की जिला उपाध्यक्ष भी हैं। पिता को मुखाग्नि देकर वे उन तमाम बेटियों के लिए मिसाल बनीं जो परिवार में बेटा न होने पर भी उनके लिए आरक्षित फर्ज अदा करने में हिचकिचाती रहती हैं। किरण के 75 वर्षीय पिता राधा कृष्ण सक्सेना का सोमवार की दोपहर करीब साढ़े तीन बजे निधन हो गया। वे लंबे समय से गंभीर बीमारी से ग्रसित थे। किरण ने बताया कि पिता ने उन्हें बेटी का संस्कार दिया लेकिन बेटे की तरह पालन पोषण किया। मां की तबियत भी खराब रहती है इसलिए वे बीमार पिता की देखभाल करने में सक्षम नहीं थीं। इसलिए उन्होंने ही बीमार पिता की सेवा बेटे की तरह की। बताया कि पिता चाहते थे कि वे ही उनका अंतिम संस्कार करें। इसलिए उन्होंने पिता की ख्वाहिश और सामाजिक बेड़ियों को तोड़कर नए प्रतिमान गढ़ने को यह कदम उठाया। जिसमें उनके पति वेद प्रकाश सक्सेना नेे पूरा सहयोग किया।
हौसले के कायल हुए लोग
मुश्किल घड़ी में हर कोई किरण के साथ खड़ा नजर आया। इंदिरा नगर में उनके आवास से सुबह नौ बजे शव यात्रा को किरण ने कंधा दिया तो हर कोई उनके हौसले का कायल हो गया। इससे पहले उन्होंने परंपरानुसार और सभी कर्मकांड भी किए। संजय नगर श्मशान भूमि पर उनके पिता के अंतिम संस्कार के दौरान केंद्रीय मंत्री संतोष गंगवार, शहर विधायक डॉ. अरुण कुमार, भाजपा नेता गुलशन आनंद, कायस्थ महासभा के संजय सक्सेना, अखिलेश सक्सेना, मानव सेवा क्लब के सुरेंद्र बीनू सिन्हा समेत अन्य सामाजिक समितियों के पदाधिकारी मौजूद रहे।
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सामाजिक बेड़ियों को तोड़ने का यह फैसला करने वाली किरण सक्सेना भाजपा की महिला मोर्चा प्रकोष्ठ की जिला उपाध्यक्ष भी हैं। पिता को मुखाग्नि देकर वे उन तमाम बेटियों के लिए मिसाल बनीं जो परिवार में बेटा न होने पर भी उनके लिए आरक्षित फर्ज अदा करने में हिचकिचाती रहती हैं। किरण के 75 वर्षीय पिता राधा कृष्ण सक्सेना का सोमवार की दोपहर करीब साढ़े तीन बजे निधन हो गया। वे लंबे समय से गंभीर बीमारी से ग्रसित थे। किरण ने बताया कि पिता ने उन्हें बेटी का संस्कार दिया लेकिन बेटे की तरह पालन पोषण किया। मां की तबियत भी खराब रहती है इसलिए वे बीमार पिता की देखभाल करने में सक्षम नहीं थीं। इसलिए उन्होंने ही बीमार पिता की सेवा बेटे की तरह की। बताया कि पिता चाहते थे कि वे ही उनका अंतिम संस्कार करें। इसलिए उन्होंने पिता की ख्वाहिश और सामाजिक बेड़ियों को तोड़कर नए प्रतिमान गढ़ने को यह कदम उठाया। जिसमें उनके पति वेद प्रकाश सक्सेना नेे पूरा सहयोग किया।
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हौसले के कायल हुए लोग
मुश्किल घड़ी में हर कोई किरण के साथ खड़ा नजर आया। इंदिरा नगर में उनके आवास से सुबह नौ बजे शव यात्रा को किरण ने कंधा दिया तो हर कोई उनके हौसले का कायल हो गया। इससे पहले उन्होंने परंपरानुसार और सभी कर्मकांड भी किए। संजय नगर श्मशान भूमि पर उनके पिता के अंतिम संस्कार के दौरान केंद्रीय मंत्री संतोष गंगवार, शहर विधायक डॉ. अरुण कुमार, भाजपा नेता गुलशन आनंद, कायस्थ महासभा के संजय सक्सेना, अखिलेश सक्सेना, मानव सेवा क्लब के सुरेंद्र बीनू सिन्हा समेत अन्य सामाजिक समितियों के पदाधिकारी मौजूद रहे।
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