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अबूझ तिथि पर हो गईं चार सौ शादियां
न्यूज डेस्क,अमर उजाला,बरेली
Updated Tue, 20 Nov 2018 12:17 AM IST
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अस्त हुए गुरु की वजह से इस वर्ष शादी के महज तीन शुभ मुहूर्त हैं। मगर देवोत्थान होने से शहर में मंगल कार्यों की शुभारंभ हो गया। सोमवार को लोक रीति अनुसार अबूझ तिथि का मौका मिला तो करीब चार सौ जोड़े वैवाहिक बंधन में बंधे। ज्योतिषाचार्यों के मुताबिक देवोत्थान पर शुभ मुहूर्त होने और अबूझ तिथि मिलने से वैवाहिक लग्नें पहले से तय हो चुकी थीं।
अबूझ तिथि पर विवाह संपन्न कराने के लिए शहर के छोटे-बड़े करीब दो सौ मैरिज हॉल समेत 40 होटल पहले से ही बुक थे। इसके चलते मैदान व पार्कों में भी खूब आयोजन संपन्न हुए हैं। इसके अलावा बैंड-बाजा, बग्घी और टेंट हाउस, लाइटिंग, कैटरिंग आदि की एडवांस बुकिंग होने से सुविधाओं का लाभ लेने के लिए लोगों को जेब ज्यादा ढीली करनी पड़ी। निश्चित समयांतराल के दौरान एक साथ दो से तीन जगहों पर ऑर्डर बुक थे। ऐसे में आयोजन में धूम-धड़ाका तो हुआ लेकिन ज्यादा देर तक नहीं। क्योंकि एक आयोजन संपन्न कराकर दूसरी बुकिंग पर जाना था। इसके लिए कैटरिंग, लाइटिंग और टेंट हाउस संचालकों ने दिहाड़ी पर मजदूरों को भी लगा रखा था। वहीं, मैरिज हॉल में भी एक साथ दो-दो वैवाहिक आयोजन संपन्न हुए। इस मौके पर वैवाहिक रस्मों को अदा कराने के लिए पंडितों को ‘चेलों’ का भी सहारा लेना पड़ा। पं. मुकेश मिश्रा ने बताया कि एक से अधिक शादियां होती हैं तो दूसरे पंडितों के साथ भी मैनेज करना पड़ता है।
वैवाहिक तिथि भी बदलवानी पड़ी
पं. नीरज शर्मा ने बताया कि नवंबर और दिसंबर में महज तीन ही मुहूर्त हैं। अबूझ तिथि के शुभ मुहूर्त पर एडवांस में ही मैरिज हॉल, बैंड-बाजा, लाइटिंग, कैटरिंग आदि बुक हो चुके थे। ऐसे में पिछले दिनों जजमानों ने पूर्व में तय हुई तिथि भी कैंसिल कराई है। ज्यादातर ने मकर संक्रांति और वैलेंटाइन डे की तिथि मांगी है। उन्होंने संभावना जताई कि इन दो तिथियों पर भी कई वैवाहिक आयोजन होंगे।
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अबूझ तिथि पर विवाह संपन्न कराने के लिए शहर के छोटे-बड़े करीब दो सौ मैरिज हॉल समेत 40 होटल पहले से ही बुक थे। इसके चलते मैदान व पार्कों में भी खूब आयोजन संपन्न हुए हैं। इसके अलावा बैंड-बाजा, बग्घी और टेंट हाउस, लाइटिंग, कैटरिंग आदि की एडवांस बुकिंग होने से सुविधाओं का लाभ लेने के लिए लोगों को जेब ज्यादा ढीली करनी पड़ी। निश्चित समयांतराल के दौरान एक साथ दो से तीन जगहों पर ऑर्डर बुक थे। ऐसे में आयोजन में धूम-धड़ाका तो हुआ लेकिन ज्यादा देर तक नहीं। क्योंकि एक आयोजन संपन्न कराकर दूसरी बुकिंग पर जाना था। इसके लिए कैटरिंग, लाइटिंग और टेंट हाउस संचालकों ने दिहाड़ी पर मजदूरों को भी लगा रखा था। वहीं, मैरिज हॉल में भी एक साथ दो-दो वैवाहिक आयोजन संपन्न हुए। इस मौके पर वैवाहिक रस्मों को अदा कराने के लिए पंडितों को ‘चेलों’ का भी सहारा लेना पड़ा। पं. मुकेश मिश्रा ने बताया कि एक से अधिक शादियां होती हैं तो दूसरे पंडितों के साथ भी मैनेज करना पड़ता है।
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वैवाहिक तिथि भी बदलवानी पड़ी
पं. नीरज शर्मा ने बताया कि नवंबर और दिसंबर में महज तीन ही मुहूर्त हैं। अबूझ तिथि के शुभ मुहूर्त पर एडवांस में ही मैरिज हॉल, बैंड-बाजा, लाइटिंग, कैटरिंग आदि बुक हो चुके थे। ऐसे में पिछले दिनों जजमानों ने पूर्व में तय हुई तिथि भी कैंसिल कराई है। ज्यादातर ने मकर संक्रांति और वैलेंटाइन डे की तिथि मांगी है। उन्होंने संभावना जताई कि इन दो तिथियों पर भी कई वैवाहिक आयोजन होंगे।
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