{"_id":"594f3d2d4f1c1b813a8b46d1","slug":"81498365229-bareilly-news","type":"story","status":"publish","title_hn":"जिला अस्पताल से जारी हो गया फर्जी प्रमाण पत्र, जांच को आई टीम","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
जिला अस्पताल से जारी हो गया फर्जी प्रमाण पत्र, जांच को आई टीम
Updated Sun, 25 Jun 2017 05:49 PM IST
विज्ञापन
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
बरेली।
ग्रामीण इलाकों में प्रयोगशाला सहायक के तौर पर काम करने वालों को जिला अस्पताल से ट्रेनिंग के बाद प्रमाण पत्र दिया जाता है, लेकिन वर्ष 2007 में कासगंज के एक व्यक्ति को यह प्रमाण पत्र बिना ट्रेनिंग के ही जारी कर दिया गया। उसकी नौकरी लग गई। जब किसी मामले में वह जेल गया तो उसकी नौकरी की तहकीकात शुरू हुई। सत्यापन के लिए कासगंज से आई टीम को बरेली जिला अस्पताल की ओर से बताया गया है कि यह प्रमाण पत्र उनके यहां से जारी नहीं हुआ है।
प्रयोगशाला सहायक की ट्रेनिंग जिला अस्पताल में होती है। इसमें तीन मेंबर होते हैं। पैथालॉजिस्ट, मुख्य चिकित्सा अधीक्षक और चिकित्सा अधीक्षक ट्रेनिंग पूरी करने के बाद प्रमाण पत्र जारी करते हैं। प्रयोगशाला सहायक ग्राम की नियुक्ति सीएमओ के अंडर में होती है। योगेंद्र सिंह ने वर्ष 2007 में ट्रेनिंग लेकर कासगंज में ज्वाइनिंग ली थी। सत्यापन को आई टीम ने इस संबंध में पूछताछ की। प्रमुख अधीक्षक डॉ. केएस गुप्ता ने सीनियर पैथालॉजिस्ट डॉ. यूवी सिंह से इस संबंध में जानकारी ली तो पता चला कि 40 लोगों को उस दौरान ट्रेनिंग दी गई थी, लेकिन इसमें योगेंद्र सिंह शामिल नहीं हैं। वर्ष 2007 के बाद वर्ष 2011- 12 में इसकी ट्रेनिंग हुई थी। डॉ. केएस गुप्ता ने बताया कि उन्होंने टीम को लिखकर दे दिया है कि प्रमाण पत्र बरेली जिला अस्पताल से जारी नहीं किया गया है।
विज्ञापन
ग्रामीण इलाकों में प्रयोगशाला सहायक के तौर पर काम करने वालों को जिला अस्पताल से ट्रेनिंग के बाद प्रमाण पत्र दिया जाता है, लेकिन वर्ष 2007 में कासगंज के एक व्यक्ति को यह प्रमाण पत्र बिना ट्रेनिंग के ही जारी कर दिया गया। उसकी नौकरी लग गई। जब किसी मामले में वह जेल गया तो उसकी नौकरी की तहकीकात शुरू हुई। सत्यापन के लिए कासगंज से आई टीम को बरेली जिला अस्पताल की ओर से बताया गया है कि यह प्रमाण पत्र उनके यहां से जारी नहीं हुआ है।
प्रयोगशाला सहायक की ट्रेनिंग जिला अस्पताल में होती है। इसमें तीन मेंबर होते हैं। पैथालॉजिस्ट, मुख्य चिकित्सा अधीक्षक और चिकित्सा अधीक्षक ट्रेनिंग पूरी करने के बाद प्रमाण पत्र जारी करते हैं। प्रयोगशाला सहायक ग्राम की नियुक्ति सीएमओ के अंडर में होती है। योगेंद्र सिंह ने वर्ष 2007 में ट्रेनिंग लेकर कासगंज में ज्वाइनिंग ली थी। सत्यापन को आई टीम ने इस संबंध में पूछताछ की। प्रमुख अधीक्षक डॉ. केएस गुप्ता ने सीनियर पैथालॉजिस्ट डॉ. यूवी सिंह से इस संबंध में जानकारी ली तो पता चला कि 40 लोगों को उस दौरान ट्रेनिंग दी गई थी, लेकिन इसमें योगेंद्र सिंह शामिल नहीं हैं। वर्ष 2007 के बाद वर्ष 2011- 12 में इसकी ट्रेनिंग हुई थी। डॉ. केएस गुप्ता ने बताया कि उन्होंने टीम को लिखकर दे दिया है कि प्रमाण पत्र बरेली जिला अस्पताल से जारी नहीं किया गया है।
विज्ञापन