'घर से बेदखल करना चाहते हैं बेटा-बहू': 78 साल की मां ने अदालत से लगाई गुहार, वृद्धा की पीड़ा सुन जज हुए भावुक
कोर्ट ने महिला का मकान बेचने और बेदखल करने पर अगले आदेश तक रोक लगा दी है। कोर्ट ने अपने आदेश में कहा कि वास्तव में जब कोई मां इतनी पीड़ा में हो कि वह सहन न कर पाए, तभी वह अपने सगे बेटे के खिलाफ मुकदमा करेगी।
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बरेली में 78 साल की वृद्ध मां ने कोर्ट से गुहार लगाई कि उसका बेटा और बहू उन्हें घर से बेदखल करना चाहते हैं। इसलिए उनको और उनके रिश्तेदारों को ऐसा करने से रोका जाए। वृद्धा ने कोर्ट से मांग की कि वह लोग उसके घर पर कब्जा न करें और न ही मकान को बेचें। कोर्ट ने महिला की याचिका पर आदेश करते हुए बेटा-बहू को ऐसा करने से रोक लगा दी। बुधवार को यह आदेश लघुवाद न्यायाधीश रवि दिवाकर ने किया।
कोर्ट में याचिका देते करते हुए रामलीला मैदान सुभाषनगर की रहने वाली भाग्यवती देवी ने कहा कि उसने यह मकान 23 जनवरी, 1981 को खरीदा था। वर्ष 2009 में वह अध्यापक के पद से सेवानिवृत्त हुई थी, लेकिन पिछले 23 साल से उसका बेटा और बहू उसकी पेंशन और वेतन जबरदस्ती लेकर चले जाते हैं। उसके साथ बदतमीजी करते है और जान से मारने की धमकी देते। ये लोग मकान बेचने की धमकी दे रहे हैं। गुंडों के बल पर उसके मकान पर कब्जा करके उसे बेचना चाह रहे हैं।
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कोर्ट ने जताई हैरानी
कोर्ट ने अपने आदेश में कहा कि आश्चर्य हो रहा है कि 78 साल की वृद्धा को अपने सगे बेटा-बहू के खिलाफ मुकदमा करना पड़ रहा है। वास्तव में जब कोई मां इतनी पीड़ा में हो कि वह सहन न कर पाए, तभी वह अपने सगे बेटे के खिलाफ मुकदमा करेगी।
कोर्ट ने महिला का मकान बेचने और बेदखल करने पर अगले आदेश तक रोक लगा दी है। कोर्ट ने आदेश का पालन कराने के लिए इसकी प्रति डीएम, एसएसप और रजिस्ट्रार को भी भेजने का आदेश दिया। अगली सुनवाई के लिए 28 जुलाई की तारीख तय की है।