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सैयद अहमद बरेली के नहीं राय बरेली के थे
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बरेली। खानकाह तहसीनिया के सज्जादानशीन मौलाना हस्सान रजा खां ने पूर्व रॉ अधिकारी कर्नल आरएसएम सिंह के बयान को गलत बताया है। उन्होंने कहा है कि बरेली का नाम लेकर जिस सैयद अहमद बरेलवी का जिक्र किया है वह न तो बरेली के रहने वाले थे न बरेली से कोई संबंध था और न ही वह बरेलवी थे। उनका वास्ता राय बरेली से था और वह राय बरेलवी थे।
कर्नल सिंह पिछले दिनों यहां एक कार्यक्रम में भाग लेने आए थे जिसमें उन्होंने बालाकोट में मुजहिदीन मूवमेंट का जिक्र किया था। इस पर मौलाना हस्सान ने सैयद अहमद के संबंध में यह भी कहा वह सुन्नी मुसलमान नहीं बल्कि अंग्रेजों के एजेंट थे। उन्होंने सूबा-ए-सरहद जाकर गैर मुस्लिमों को नहीं बल्कि सुन्नी मुसलमानों से जंग की थी। उनकी मौत भी वहीं हुई थी। इतना ही नहीं सैयद अहमद के मुरीद मौलवी इस्माइल देहलवी का भी यही अंजाम उसी जगह पर हुआ था। उनके अनुयायी उन दोनों को शहीद कहते और मानते हैं। जहां तक बरेलवियों की बात है आला हजरत ने इस्माइल देहलवी के लिए एक शेर लिख कर कंडम किया था।
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कर्नल सिंह पिछले दिनों यहां एक कार्यक्रम में भाग लेने आए थे जिसमें उन्होंने बालाकोट में मुजहिदीन मूवमेंट का जिक्र किया था। इस पर मौलाना हस्सान ने सैयद अहमद के संबंध में यह भी कहा वह सुन्नी मुसलमान नहीं बल्कि अंग्रेजों के एजेंट थे। उन्होंने सूबा-ए-सरहद जाकर गैर मुस्लिमों को नहीं बल्कि सुन्नी मुसलमानों से जंग की थी। उनकी मौत भी वहीं हुई थी। इतना ही नहीं सैयद अहमद के मुरीद मौलवी इस्माइल देहलवी का भी यही अंजाम उसी जगह पर हुआ था। उनके अनुयायी उन दोनों को शहीद कहते और मानते हैं। जहां तक बरेलवियों की बात है आला हजरत ने इस्माइल देहलवी के लिए एक शेर लिख कर कंडम किया था।
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