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आतंकवाद और मुसलमानों के सम्मान की उठी बात
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बरेली। हजरत हबीब रजा खां (हबीब मियां) के उर्स में मुसलमानों से जुड़े मामलों को लेकर एक तीन सूत्री एजेंडा जारी किया गया, जो राष्ट्रपति और प्रधानमंत्री को भेजा जा रहा है। इसमें आतंकवाद, मुसलमानों के सम्मान और शिक्षा के संबंध में बात उठाई गई।
एजेंडे में देश की स्थिति पर चिंता जताते हुए कहा गया कि मुसलमानों से देश भक्ति और देशवासी होेने के सुबूत मांगे जा रहे हैं। वहीं कुछ नेता मुसलमानों को पाकिस्तान भेजने की बात करते हैं। ऐसे नेताओं पर हुकूमत को कार्रवाई करनी चाहिए। क्योंकि यह मुसलमानों की मानहानि का मामला है और हिंदुस्तान की कानून व्यवस्था पर सवाल है। जब हुकूमत मुसलमानों को भारतीय मानती है और वोटर आईडी, पासपोर्ट आदि से भारतीय होने का प्रमाण देती है तो कोई भी नेता कैसे किसी भारतीय मुसलमान को पाकिस्तानी करार दे सकता है।
आतंकवाद के मुद्दे पर कहा गया कि आज लोग इस्लाम को आतंकवाद से जोड़ते हैं, जबकि इस्लाम का आतंकवाद से न कोई नाता था और न ही है। इस्लाम नाम है समाज से बुराई मिटाने का। यदि कोई शख्स आतंकवाद फैला रहा है तो वह हरगिज मुसलमान नहीं हो सकता। ऐसे लोग इस्लाम से खारिज हैं। शिक्षा के मुद्दे पर कहा कि देश में शिक्षा प्रणाली को सहज और सरल बनाने के साथ ही देश में समान शिक्षा प्रणाली लागू होनी चाहिए। समान शिक्षा प्रणाली न होने के कारण शिक्षा में भी अमीर गरीब का अंतर बना हुआ है।
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एजेंडे में देश की स्थिति पर चिंता जताते हुए कहा गया कि मुसलमानों से देश भक्ति और देशवासी होेने के सुबूत मांगे जा रहे हैं। वहीं कुछ नेता मुसलमानों को पाकिस्तान भेजने की बात करते हैं। ऐसे नेताओं पर हुकूमत को कार्रवाई करनी चाहिए। क्योंकि यह मुसलमानों की मानहानि का मामला है और हिंदुस्तान की कानून व्यवस्था पर सवाल है। जब हुकूमत मुसलमानों को भारतीय मानती है और वोटर आईडी, पासपोर्ट आदि से भारतीय होने का प्रमाण देती है तो कोई भी नेता कैसे किसी भारतीय मुसलमान को पाकिस्तानी करार दे सकता है।
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आतंकवाद के मुद्दे पर कहा गया कि आज लोग इस्लाम को आतंकवाद से जोड़ते हैं, जबकि इस्लाम का आतंकवाद से न कोई नाता था और न ही है। इस्लाम नाम है समाज से बुराई मिटाने का। यदि कोई शख्स आतंकवाद फैला रहा है तो वह हरगिज मुसलमान नहीं हो सकता। ऐसे लोग इस्लाम से खारिज हैं। शिक्षा के मुद्दे पर कहा कि देश में शिक्षा प्रणाली को सहज और सरल बनाने के साथ ही देश में समान शिक्षा प्रणाली लागू होनी चाहिए। समान शिक्षा प्रणाली न होने के कारण शिक्षा में भी अमीर गरीब का अंतर बना हुआ है।
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